30/09/2023
सिर्फ एक ही किताब ए लफ़्ज़ पर टिकी है सारी कहानी मेरी,,
उसका नाम हटा कर देखो तो मुझमे कुछ भी खाश नहीं..
मैं बे जुबा, बे आवाज़ हू, बे लफ़्ज़ हू आवारा उसके बग़ैर,,
उसके लिए है सारी ग़ज़लें, सारे लफ़्ज़,सारी मासूम सादगी वरना
देखा जाए तो मुझमें उसके सिवा कुछ भी खास नहीं,,