02/15/2026
ग्रेजुएशन करने के बाद वर्तिका बैंक में प्रोबेशनरी अफसर बनने की तैयारी में जुट गई थी। एक नामी कोचिंग सेंटर में एडमिशन लिया, जहां उसकी मुलाकात गजाला से हुई। गजाला भी उसी क्लास में थी, वही सपना देख रही थी। दोनों की सोच मिलती-जुलती, बातें लंबी—बस, दोस्ती हो गई। गजाला थोड़ी शरारती, वर्तिका सीधी-सादी, लेकिन यही तो दोस्ती का मसाला था!
एक शाम कोचिंग के बाद गजाला ने वर्तिका को अपने भाई के दोस्त से मिलवाया। "वर्तिका, इनसे मिलो। ये विक्रम हैं—मेरे भाई के दोस्त। काफी हैंडसम हैं न... क्यों?" गजाला ने चुटकी लेते हुए कहा और मुस्कुरा दी।
विक्रम ने झट से वर्तिका की आंखों में झांकते हुए कहा, "अरे, हम हैंडसम हैं, तो क्या आपकी सहेली कम खूबसूरत हैं? हमें तो लगता है, आप किसी ब्यूटी क्वीन से कम नहीं!" वर्तिका शरमा गई, गाल लाल हो गए। पहली ही मुलाकात में ऐसी तारीफ—दिल की धड़कनें तेज हो गईं। विक्रम अब रोज कोचिंग के बाद आता। कभी चाय का बहाना, कभी रास्ते में गपशप। वर्तिका को अच्छा लगने लगा।
एक दिन गजाला ने जानबूझकर क्लास स्किप कर दी। वर्तिका बाहर निकली तो विक्रम खड़ा था। वर्तिका थोड़ी घबरा गई, बचना चाहती थी, लेकिन विक्रम ने रास्ता रोक लिया। "वर्तिकाजी, आज गजाला नहीं आईं क्या?"
"नहीं, वो तो आज नहीं आईं।"
"तो क्या आज आप हमसे बात भी नहीं करेंगी? क्या हम इतने बुरे हैं?"
"नहीं-नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। आप तो काफी हैंडसम हैं!" वर्तिका के मुंह से ये शब्द फिसल गए। अरे, ये तो अनजाने में निकल गया! विक्रम की आंखें चमक उठीं, जैसे नशा चढ़ गया हो। वर्तिका मन ही मन सोचने लगी—ये जीभ कैसे फिसल गई?
उसके बाद तो जैसे बाढ़ आ गई। रोज प्यार भरे मैसेज, 'गुड मॉर्निंग' से 'स्वीट ड्रीम्स' तक। विक्रम की बातें इतनी मीठी कि वर्तिका सपनों में खोने लगी। गजाला भी खुश—वो तो इश्क की इस आग में घी डाल रही थी। "यार, विक्रम कितना परफेक्ट है तेरे लिए! बस, प्रपोज कर दे," वो उकसाती। वर्तिका हामी भर लेती। एक दिन विक्रम ने कॉफी डेट पर बुलाया। वर्तिका तैयार हो गई—नई ड्रेस, हल्का मेकअप। लेकिन वो डेट? वो तो जिंदगी बदलने वाली साबित हुई।
कॉफी शॉप में विक्रम ने हाथ पकड़ लिया। "वर्तिका, मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम मेरी हो!" वर्तिका का दिल उछल पड़ा। वो भी कबूल कर लिया। लेकिन अगले ही हफ्ते शक की डोर ने कसना शुरू कर दिया। विक्रम के फोन पर अजीब मैसेज आते—'मिस यू, डार्लिंग' किसी दीपा से। वर्तिका ने गजाला से पूछा, लेकिन वो टाल गई। "अरे, बस कोई पुरानी दोस्त होगी। तू टेंशन मत ले।"
वर्तिका को शक हुआ। उसने अपनी पुरानी सहेली नेहा को बताया, जो आईटी में काम करती थी। नेहा ने विक्रम का नंबर चेक किया—सोशल मीडिया पर तो जैसे हनीट्रैप! दर्जनों लड़कियों के साथ फ्लर्टिंग, डेट्स, प्रॉमिस। और हां, दीपा नाम की एक लड़की—वो भी कोचिंग की ही। नेहा ने कहा, "ये इश्कबाज है, यार। सबको फंसाता है, फिर छोड़ देता है।"
वर्तिका का खून खौल उठा। लेकिन अकेले क्या करेगी? नेहा ने सलाह दी—गजाला को टेस्ट कर। वर्तिका ने गजाला को फोन किया। "गजाला, विक्रम दीपा से मिल रहा है। तू जानती है न?" गजाला हंस पड़ी, "अरे, वो तो बस दोस्त है। तू बेवकूफ मत बन।" लेकिन वर्तिका ने रिकॉर्डिंग ऑन कर ली। गजाला ने खुद कबूल कर लिया—वो विक्रम की मदद करती थी, लड़कियों को फंसाने में। "विक्रम को मज़ा आता है, और मुझे भी थोड़ा गिफ्ट्स मिल जाते हैं। तू भी तो खुश थी न?"
दोस्ती का मुखौटा उतर गया। वर्तिका ने नेहा और दीपा को कॉल किया। दीपा भी धोखा खा चुकी थी। चारों लड़कियों ने मिलकर प्लान बनाया—विक्रम को सबक सिखाना है, और गजाला को भी, जो लड़कियों को बेच रही थी। वर्तिका ने घरवालों को सब बता दिया। मम्मी-पापा पहले गुस्सा हुए, लेकिन जब प्लान सुना, तो तैयार। "ऐसे मक्कारों को ठीक करना ही पड़ेगा," पापा ने कहा।
प्लान सिंपल था। दीपा को विक्रम से डेट फिक्स करवानी थी। वर्तिका ने फोन किया— "विक्रम, आज दीपा के साथ डेट पर चलो न? वो इंतज़ार कर रही है।" विक्रम घबरा गया, "नहीं यार, आज जरूरी काम है।" लेकिन ट्रैप सेट था। नेहा ने विक्रम का लोकेशन ट्रैक किया—वो किसी और लड़की से मिल रहा था! सबूत जमा हो गए।
अगले दिन कोचिंग के बाहर सब इकट्ठा। विक्रम आया, मुस्कुराता हुआ। वर्तिका ने कहा, "विक्रम, एक बात कहनी है।" उसने मैसेजेस, चैट्स, रिकॉर्डिंग सब दिखा दी। विक्रम का चेहरा सफेद पड़ गया। "सॉरी... मैं बदल जाऊंगा।" लेकिन दीपा ने कहा, "बदलना? पहले तो कई दिल तोड़े!" गजाला भी आ गई, लेकिन वर्तिका ने उसे आईना दिखाया— "तू मेरी दोस्त थी या साजिशकर्ता?"
गजाला रोने लगी, "मैं गलत थी। माफ कर दो।" वर्तिका ने माफ कर दिया, लेकिन दोस्ती? वो खत्म। विक्रम को चेतावनी— "अगर कभी किसी लड़की को धोखा दिया, तो ये सबूत पुलिस तक पहुंचेंगे।" विक्रम कांपता हुआ भागा।
तब वर्तिका ने दीपा और विक्रम की डेटिंग कन्फर्म करने के लिए आखिरी कॉल किया। "चलो, डेट पर चलो।" विक्रम ने टाल दिया, लेकिन अब सब जान चुके थे—उसका खेल खत्म। वर्तिका मुस्कुराई। प्यार आया था, लेकिन सबक बड़ा मिला। अब वो न सिर्फ बैंक ऑफिसर बनेगी, बल्कि स्मार्ट भी—धोखों से बचने वाली। गजाला? वो अकेली रह गई, सोचती—दोस्ती का फायदा उठाना महंगा पड़ गया।
वाह! क्या ट्विस्ट था न? विक्रम जैसा इश्कबाज आपके आसपास तो नहीं? कमेंट में अपनी स्टोरी शेयर करें! अगर ये कहानी दिल को छू गई या हंसी ला दी, तो लाइक❤️ दबाएं और दोस्तों को टैग करके शेयर करें🔄—क्योंकि ऐसी कहानियां सिखाती हैं, प्यार में आंखें खुली रखो!