Amlendu Shukla

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मां विषय पर 5121 रचनाओं का एक विशाल संग्रह हम पाठकों को उपलब्ध कराने के लिए साईं इंडियन ट्रस्ट एसोसिएशन का हार्दिक आभार ...
06/04/2026

मां विषय पर 5121 रचनाओं का एक विशाल संग्रह हम पाठकों को उपलब्ध कराने के लिए साईं इंडियन ट्रस्ट एसोसिएशन का हार्दिक आभार 🙏🙏

साथ ही साथ इस विशाल संग्रह में मेरी पांच रचनाओं को स्थान देने के लिए सीता ट्रस्ट से जुड़े सभी सदस्यों को मेरा सादर प्रणाम 🙏🙏

अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०

वट सावित्री व्रत पूजन की सभी देवियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🙏कृपानिधान बाबा केदार सभी का कल्याण करें 🙏🙏हर विपत्त...
05/16/2026

वट सावित्री व्रत पूजन की सभी देवियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🙏
कृपानिधान बाबा केदार सभी का कल्याण करें 🙏🙏

हर विपत्ति में धीरज बंधाती है वो,
जन्म जन्मों के रिश्ते निभाती है वो,
मौत भी दूर रहती उसे देखकर,
लड़कर यमराज से भी बचाती है वो,

प्यार करती सदा है बिना मोल के,
है मुश्किल बताना उसे तोल के,
हो स्थिति परिस्थिति यहां चाहे जो,
हर परिस्थिति में रिश्ता निभाती है वो,

भावनाओं का वो एक सागर यहां,
थाह जिसकी नहीं पा सका है कोई,
दूर पति हो अगर आंख से थोड़ा सा,
द्वार पर ही नयन को बिछाती है वो,

देवता भी बिना उसके पूरे नहीं,
हम मनुष्यों की बातें करें क्या यहां?
राम के साथ चलने को सीता बनी,
शिव की खातिर अपर्णा हो जाती है वो,

दो आदर उसे तुम बिना तर्क के,
तर्क चिन्तन से वो तो परे है बहुत
तेरी दुनिया अधूरी है उसके बिना,
पूर्ण दुनिया को तेरे बनाती है वो,

हर विपत्ति में धीरज बंधाती है वो,
जन्म जन्मों के रिश्ते निभाती है वो,
मौत भी दूर रहती उसे देखकर,
लड़कर यमराज से भी बचाती है वो।

अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०

शुभ दिन मुबारक हो मेरे हमसफर❤️अनमोल तेरा संसार,लुटाया तूने मुझ पर यार,करूं आभार मैं कैसे,करूं आभार मैं कैसे?करूं आभार मै...
05/11/2026

शुभ दिन मुबारक हो मेरे हमसफर❤️

अनमोल तेरा संसार,लुटाया तूने मुझ पर यार,
करूं आभार मैं कैसे,करूं आभार मैं कैसे?
करूं आभार मैं कैसे?

जीवन की पगडंडी पर साथ मेरे तुम आए,
तुम ही जानोगे क्या सुख दुख तुमने मुझसे पाये,
चलकर साथ मेरे तुमने मंजिल संग संग नापी,
आने वाली विपदाओं को मुझसे पहले भांपी,

फिर भी धैर्य दिलाया तुमने पाया हमने पार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे
अनमोल तेरा संसार लुटाया तूने मुझ पर यार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे?

सप्तपदी के बंधन में बंधकर हम साथ चले थे,
याद तुम्हें भी होगा जब हम तुम यहां मिले थे,
अनजानापन मिटा कहां इसको हम समझ न पाए,
एक हो गए कैसे हम तुम बिन पहचान बनाए,

लिख न सकता कुछ शब्दों में दिया जो तूने प्यार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे?
अनमोल तेरा संसार लुटाया तूने मुझ पर यार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे?

मेरी सूखी बगिया को जल देकर तूने सजाया,
नन्हें नन्हें फूल खिला तूने उसको महकाया,
भूल गई घरबार स्वयं का घर मेरा अपनाकर,
लिये समेट सभी आंसू तुम दिखी सदा मुस्काकर,

सहयोग रहा तेरा इतना हर स्वप्न हुआ साकार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे?
अनमोल तेरा संसार लुटाया तूने मुझ पर यार,
करूं आभार मैं कैसे करूं आभार मैं कैसे?

रहे प्रकाशित पथ मेरा तूने दीपक सदा जलाया,
एकाकीपन दूर किया और दिल में मुझे बसाया,
उलझे जीवन को मेरे तूने दिया संवार,
करूं आभार मैं कैसे,करूं आभार मैं कैसे?

आंधी तूफानों ने जब जब मुझको यहां डराया,
और छोड़कर साथ यहां जब अपना हुआ पराया,
तब मेरी उलझी नौका की तुम्हीं बनी पतवार,
करूं आभार मैं कैसे,करूं आभार मैं कैसे?

अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०

05/10/2026
सादर नमन अनथक श्रम से नहर बनाता,गाँव,गली और शहर बनाता,सह लेता सारे अभाव को,नहीं तनिक सा वह घबराता,सूरज के संग संग ही निक...
05/01/2026

सादर नमन

अनथक श्रम से नहर बनाता,
गाँव,गली और शहर बनाता,
सह लेता सारे अभाव को,
नहीं तनिक सा वह घबराता,
सूरज के संग संग ही निकलता,
शाम ढले ही घर आ पाता,
योगदान उसका इतना है,
क्या क्या मैं बतलाऊं?
शब्द मेरे हैं बहुत ही थोड़े,
उसकी पीड़ा कैसे गाऊं?

नभचुम्बी जो महल खड़े हैं,
शीत,घाम,वर्षा में अड़े हैं,
सड़कों का जो जाल बिछा है,
जीवन जिससे सरल हुआ है,
हाड़ तोड़ श्रम ये है उनका,
इसमें हिस्सा बहुत न जिनका,
श्रमसाधित उस श्रमिक वर्ग को,
स्वप्न कौन दिखलाऊं?
शब्द मेरे हैं बहुत ही थोड़े,
उसकी पीड़ा कैसे गाऊं?

कम पैसों में जी लेता है,
आंसू सारे पी लेता है,
किस्मत का वह मारा लगता,
लेकिन कभी न हारा लगता,
पत्थर को है वही तोड़ता,
नदियों को भी वही मोड़ता,
बदले में इसके पैसों संग,
थोड़ा सा सम्मान चाहिए,
कैसे वह दिलवाऊं?
शब्द मेरे हैं बहुत ही थोड़े उसकी पीड़ा कैसे गाऊं?

अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०

04/19/2026

Amlendu Shukla

वाराणसी से प्रकाशित प्रतिष्ठित पत्रिका काव्य प्रहर के सम्पूर्ण परिवार का हार्दिक आभार 🙏🙏
04/19/2026

वाराणसी से प्रकाशित प्रतिष्ठित पत्रिका काव्य प्रहर के सम्पूर्ण परिवार का हार्दिक आभार 🙏🙏

आशा भोसले जी को सादर प्रणाम 🙏 विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏 संगीत की प्यारी दुनिया से इक सुन्दर सा स्वर चला गया,ऐसा लगता है जैस...
04/12/2026

आशा भोसले जी को सादर प्रणाम 🙏
विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏

संगीत की प्यारी दुनिया से इक सुन्दर सा स्वर चला गया,
ऐसा लगता है जैसे सुर का हर एक साधक छला गया,
हम कैसे कह दें जाना उनका भी नियति का खेल रहा,
जिसके जाने से लगता है कि धरती का सुर चला गया,

उनके कंठ को अप्रतिम सुर ने ऊँचाई दिलवाई थी,
संस्कृति और कला ने उनसे पहचान नई बनवाई थी,
संगीत कला की दुनिया का वट वृक्ष आज फिर छला गया,
संगीत की प्यारी दुनिया से इक सुन्दर सा स्वर चला गया,

यहां बीत जाते हैं युग तब आशा कोई जन्मती है,
जिसके आने से आशा की किरणें नई चमकती हैं,
तेज पुंज उन किरणों का आज अचानक छला गया,
संगीत की प्यारी दुनिया से इक सुन्दर सा स्वर चला गया,

सच है आज नहीं हैं वो पर जाकर जा न पाएंगी,
स्मृतियों में हम सबके वो जाकर भी रह जायेंगी,
स्वर बसता जो दिलों में सबके कैसे कह दूं वो चला गया,
संगीत की प्यारी दुनिया से इक सुन्दर सा स्वर चला गया।

अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०

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