Dillip Patel

Dillip Patel कभी कभी थोड़ा कुछ लिख लेता हूँ...
जो भी लिखता हूँ, अपना लिखता हूँ,
कभी हकीकत, कभी सपना लिखता हूँ...

रंग केसरी बल देता, हर जटिल प्रश्न का हल देता है,डूब रही कश्ती का जैसे माँझी रुख बदल देता है।उषा की किरणें थोड़ी, थोड़ी स...
11/08/2026

रंग केसरी बल देता, हर जटिल प्रश्न का हल देता है,
डूब रही कश्ती का जैसे माँझी रुख बदल देता है।
उषा की किरणें थोड़ी, थोड़ी संध्या की लाली को,
मिश्रित कर भारत माँ के माथे पर तिलक लगाते हैं।
चलो तिरंगा लहराते हैं...
- दिलीप...✍️
#हरघरतिरंगा

मैल धुले मन हों उजले, जब श्वेत रंग ये गहरा हो,शीतलता ऐसी कि मानो चाँद ज़मीं पर ठहरा हो।तुम अक्षत लेकर आओ, हम कुमकुम लेकर...
10/08/2026

मैल धुले मन हों उजले, जब श्वेत रंग ये गहरा हो,
शीतलता ऐसी कि मानो चाँद ज़मीं पर ठहरा हो।
तुम अक्षत लेकर आओ, हम कुमकुम लेकर आते हैं,
हम तुम मिलकर चंदा की पूजा का थाल सजाते हैं।
चलो तिरंगा लहराते हैं...
- दिलिप...✍️

हरा रंग ऐसा छाए, हर घर हरियाली हो जाए,  नफरत की तपती धरती पर वो खुशहाली बो जाए।  चारों ओर उजाला हो, अंधकार सिमटकर सो जाए...
09/08/2026

हरा रंग ऐसा छाए, हर घर हरियाली हो जाए,
नफरत की तपती धरती पर वो खुशहाली बो जाए।
चारों ओर उजाला हो, अंधकार सिमटकर सो जाए,
आओ बुझी हुई बाती को सूरज से सुलगाते हैं।
- दिलीप...✍️

चलो तिरंगा लहराते हैं, हर घर अलख जगाते हैं,  इन रंगों के आगे इन्द्रधनुष फीके पड़ जाते हैं।
07/08/2026

चलो तिरंगा लहराते हैं, हर घर अलख जगाते हैं,
इन रंगों के आगे इन्द्रधनुष फीके पड़ जाते हैं।

राह में पत्थर भी थे, कुछ लोग भी थे,फ़र्क़ अब दोनों में मैं करने लगा हूँ।- दिलीप...✍️
05/08/2026

राह में पत्थर भी थे, कुछ लोग भी थे,
फ़र्क़ अब दोनों में मैं करने लगा हूँ।
- दिलीप...✍️

ज़ख्म में जब से नमक उसने भरा है,तब से हमदर्दों से मैं डरने लगा हूँ।- दिलीप...✍️
04/08/2026

ज़ख्म में जब से नमक उसने भरा है,
तब से हमदर्दों से मैं डरने लगा हूँ।
- दिलीप...✍️

पाँव में जब से मुझे काँटा चुभा है,हर क़दम अब सोचकर रखने लगा हूँ।- दिलीप...✍️
03/08/2026

पाँव में जब से मुझे काँटा चुभा है,
हर क़दम अब सोचकर रखने लगा हूँ।
- दिलीप...✍️

बोझ फल का जब से मैं सहने लगा हूँ,  पत्थरों का लक्ष्य मैं बनने लगा हूँ।- दिलीप...✍️
02/08/2026

बोझ फल का जब से मैं सहने लगा हूँ,
पत्थरों का लक्ष्य मैं बनने लगा हूँ।
- दिलीप...✍️

देशी शिक्षा के लिए करें यहाँ उपवास,औलादें उनकी करें परदेशी अभ्यास।​— दिलीप...✍ सृजन फिर से Story of This Life Everyone 𝑭...
01/08/2026

देशी शिक्षा के लिए करें यहाँ उपवास,
औलादें उनकी करें परदेशी अभ्यास।
​— दिलीप...✍
सृजन फिर से Story of This Life Everyone 𝑭𝒐𝒍𝒍𝒐𝒘𝒆𝒓𝒔. Kaavya Pedia

विरह वेदना से व्याकुल   धरा ने जाने क्या बात कही,  अम्बर के निर्झर नैनों से   अविरत अश्रुधार बही।- दिलीप...✍️
31/07/2026

विरह वेदना से व्याकुल
धरा ने जाने क्या बात कही,
अम्बर के निर्झर नैनों से
अविरत अश्रुधार बही।
- दिलीप...✍️

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