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हम मनोरंजन के नाम पे अपनी भाषा को भूल चुके हैं, 'शगल' हमारी उसी जरूरत के लिए बनाया गया है!
तथ्य और मनोरंजन के लिए 'शगल' जाना जायेगा और इसका नाम भी सिद्ध कर जायेगा! शगल अपने मन की वो बात है जो अपने प्रधानमंत्री भी पाते :)

मेरे अजनबी हमसफ़र....जरूर से जरूर पढ़ना:-वो ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठी थी... उसके चेहर...
22/11/2017

मेरे अजनबी हमसफ़र....जरूर से जरूर पढ़ना:-

वो ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठी थी... उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में कि कहीं टीटी ने आकर पकड़ लिया तो..कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टीटी के आने का इंतज़ार करती रही। शायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी। देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा। सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा बेग दिख रहा था। मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफल ही रहा...फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गयी। और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया...लगभग 1 घंटे के बाद टीटी आया और उसे हिलाकर उठाया।
“कहाँ जाना है बेटा” “अंकल दिल्ली तक जाना है”“टिकट है ?” “नहीं अंकल …. जनरल का है ….लेकिन वहां चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें बैठ गयी”“अच्छा 300 रुपये का पेनाल्टी बनेगा” “ओह …अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं”“ये तो गलत बात है बेटा …..पेनाल्टी तो भरनी पड़ेगी” “सॉरी अंकल …. मैं अलगे स्टेशन पर जनरल में चली जाउंगी …. मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं …. कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आई … और ज्यादा पैसे रखना भूल गयी….” बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी टीटी उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे दिल्ली तक उस डब्बे में बैठने की परमिशन देदी। टीटी के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा था..थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं …दिल्ली स्टेशन पर कोई जुगाड़ कराके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पायेगी। मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, दिल कर रहा था कि उसे पैसे देदूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो … और रो मत …. लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह की बात सोचना थोडा अजीब था। उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से … और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे। बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने लगे जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं। फिर मैं एक पेपर पर नोट लिखा,“बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जानता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे बैचेनी हो रही हैइसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूँ …...जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकती हो …. वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो ….. अजनबी हमसफ़र ” एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है। नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरह देखता हुआ नज़र आये तो उसे पता लग जायेगा कि किसने भेजा। लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था...थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की। लगा जैसे कई सालों से इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था। उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया …. फिर चादर का कोनाहटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मैं...पता ही नहीं चला कब आँख लग गयी। जब आँख खुली तो वो वहां नहीं थी … ट्रेन दिल्ली स्टेशन पर ही रुकी थी। और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था ….. मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया .. और उस पर लिखा था … Thank You मेरे अजनबी हमसफ़र …..आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी …. मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं …. घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है इसलिए आनन – फानन में घर जा रही हूँ। आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगी …. उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आज से मैं आपकी कर्ज़दार हूँ ….जल्द ही आपके पैसे लौटा दूँगी। उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह थे …. हर रोज़ पोस्टमैन से पूछता था शायद किसी दिन उसका कोई ख़त आ जाये …. आज 1 साल बाद एक ख़त मिला ….आपका क़र्ज़ अदा करना चाहती हूँ …. लेकिन ख़त के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर … नीचे मिलने की जगह का पता लिखा था …. और आखिर में लिखा था ... तुम्हारी अजनबी हमसफ़र ……

शैम्पू से चकाचक भी किया जाए गाडी को 🤗
21/11/2017

शैम्पू से चकाचक भी किया जाए गाडी को 🤗

न पहले कभी उठे, वो जज़्बात आज बरस रहे हे |स्याही से रंगे हम, कोरे कागज़ को तरस रहे हे || #शगल
20/11/2017

न पहले कभी उठे, वो जज़्बात आज बरस रहे हे |
स्याही से रंगे हम, कोरे कागज़ को तरस रहे हे ||

#शगल

वो, उसे दिवाली की छुट्टियोंमें ही देखा था पहली बार शायद।  किसी दोस्त के घर आयी और पहचान हुई।  यहाँ कक्षाओंका फर्क था, शह...
20/10/2017

वो, उसे दिवाली की छुट्टियोंमें ही देखा था पहली बार शायद।
किसी दोस्त के घर आयी और पहचान हुई।
यहाँ कक्षाओंका फर्क था, शहर का था, जात का भी, मानो कुछ मेल था ही नहीं।
फिर भी वो पसंद थी, बालोंकी तरह आँखें भी नुकीली सी थी उसकी, नज़रें मिलाने में तो कामयाब हो भी जाता पर अब बात कुछ और थी..
उसे कैसे समझाता की ये अब बचपने में खेलने नहीं बुला रहा, अब बात कुछ और है।
वैसे ये बात उसके दिल में भी होगी ही, तब दिवाली कुछ और थी, अब कुछ और ही है।

फोटो छोड़ो भी, मन की बात पढ़ो 👌👌
10/10/2017

फोटो छोड़ो भी, मन की बात पढ़ो 👌👌

👌👌😍
18/09/2017

👌👌😍

एचपी ने 8,999 रुपये में एक छोटा फोटो प्रिंटर लॉन्च किया है जो स्मार्टफोन से कनेक्ट हो सकता है

31/08/2017

कुछ और कश लगा ले ऐ ज़िन्दगी,
बुझ जाऊंगा किसी रोज़ सुलगते-सुलगते..

27/08/2017

असली भक्त तो #बाबाओं के ही हैं इस देश में, #मोदीजी तो फोकट में ही बदनाम हैं....😂😂😂

01/08/2017

हमारे देहात में एक रसूखदार आदमी ने २४ बीघा जमीन पर ५०० करोड़ का कर्जा लिया।
कोई न्यूज कंपनी उसकी तरफ देखने के लिए भी तैयार नहीं। रस्सी से बंधी पेन हाथ में थमानेवाली बैंक और उसके सामने रोते गिड़गिड़ाते आम नागरिक देखते आए हैं हम, ये भी सह लेंगे!
Aji Haan (अजी हाँ) Aaj Tak The Lallantop NDTVKhabar.com

अप्रतिम वास्तुकला से भरा तेरहवी शताब्दी का यह मन्दिर।  इसके बारे में जरूर पढ़िए और दुसरोंकोभी भेजिए।  शायद सरकार जाग जाए ...
26/07/2017

अप्रतिम वास्तुकला से भरा तेरहवी शताब्दी का यह मन्दिर। इसके बारे में जरूर पढ़िए और दुसरोंकोभी भेजिए। शायद सरकार जाग जाए और इसे बचालें!
https://dilseapan.blogspot.com/2017/07/blog-post.html

( "Dharasur" is originated by the name of Lord Shiva .There is a temple of lord Shiva situated on the bank of river Godavari, that is call...

इसीके साथ सुबह का नमस्कार पहुंचे!❤️
14/07/2017

इसीके साथ सुबह का नमस्कार पहुंचे!❤️

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