24/09/2021
"सुकून"
कहाँ मिलेंगे वो सुकून के पल ।
खोजता हूँ मैं जिन्हें, कहाँ है वो पल ।।
वो पल जिनमें हम,अक्सर खो जाते हैं।
बीते हुए लम्हें ,अक्सर याद आते हैं।।
याद पड़ता नहीँ, कब कैसे खो गए।
जिम्मेदारियों के पहाड़ मिल गए।।
दिन रात, जिनमें दबते चले गए।
सुकून के वो पल, शायद हल्के हो चले।।
*सुरेश पटोनिया