आध्यात्मिक, ऐतिहासिक तथा तात्विक चर्चाएं

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आध्यात्मिक, ऐतिहासिक तथा तात्विक चर्चाएं पंडित मंगलेश शर्मा

10/09/2026

शोभन योग मंत्र -
शोभन योग के देवता - ब्रह्मा
शोभन योग के अधिष्ठाता - शुक्र

मंत्र ~ ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्।
स दाधार पृथिवीं द्या मुतैमां कस्मै देवाय हविषा विधेम्।।

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09/09/2026

सौभाग्य योग मंत्र -
सौभाग्य योग के देवता - ब्रम्हा
सौभाग्य योग के अधिष्ठाता ग्रह - बुध

मंत्र ~ब्रम्हॺज्ञानंप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरूचो वेनऽआवः।सबुध्न्याऽउपमाऽअस्यविष्ठाः सतश्चॺॊनिम सतश्चविवः।।

ॐ ब्रम्हणे नमः

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08/09/2026

आयुष्मान योग मंत्र -
आयुष्मान योग के आराध्य देव - महादेव
आयुष्मान योग के अधिष्ठाता - चंद्रदेव

मंत्र ~ ॐ चन्द्रमामनसो जातश्श्चक्षोः सूर्ॺ्ॺॊऽअजायत।
श्रोत्राद्वायुश्श्च प्राणश्श्च मुखादग्निरजायत।।

ॐ सोमाय नमः

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08/09/2026

समस्त सनातनियों को गौवत्स द्वादशी की मंगलमय शुभकामनाएं।

गोवत्स द्वादशी (बछ बारस) हिंदू धर्म में संतान की दीर्घायुश, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल कामना के लिए मनाया जाने वाला एक पवित्र व्रत है।
इस दिन सुबह स्नान करके गाय और बछड़े की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गाय उपलब्ध न होने पर मिट्टी से गाय-बछड़े की मूर्ति बनाकर भी पूजा करने का विधान है।
इस दिन गाय के दूध, दही या उससे बने किसी भी उत्पाद का सेवन नहीं किया जाता है, क्योंकि यह दिन गौ माता का दूध उनके बछड़े के लिए समर्पित माना जाता है।

चाकू का प्रयोग वर्जित: इस दिन चाकू या किसी भी धारदार वस्तु से कटी हुई सब्जियों या फलों का सेवन नहीं किया जाता है।

विशेष प्रसाद: इस दिन अंकुरित अनाज, भीगे हुए चने, मोठ और बाजरे का प्रसाद चढ़ाया और खाया जाता है।

✍️आपका अपना
आपके ह्रदय के समीप
आपसे स्नेह बांटने को नित्य उत्सुक
पंडित मंगलेश शर्मा

07/09/2026

प्रीति योग मंत्र -
प्रीति योग के देवता - विष्णु
प्रीति योग के अधिष्ठाता - बुध

शांति मंत्र ~ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

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06/09/2026

विष्कुंभ योग शांति -
देवता - यमराज
अधिष्ठाता - शनि

शांति मंत्र ~ॐ त्र्यंबकंॺ्ॺऻमहेसुगन्धिम्पुष्टिवर्द्धनम्।
उर्व्वारूकमिवबन्धनान्न्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

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मित्रों!!! अभी तक हमने नक्षत्र शांति के मंत्रों के विषय में जाना है।जिस प्रकार नक्षत्र शांति होती है, उसी प्रकार अशुभ यो...
06/09/2026

मित्रों!!!
अभी तक हमने नक्षत्र शांति के मंत्रों के विषय में जाना है।जिस प्रकार नक्षत्र शांति होती है, उसी प्रकार अशुभ योग शांति भी होती है।आईए, जानते हैं अशुभ योग शांति के मंत्र।
नित्य न‌ई जानकारी पाने हेतु पेज पर बने रहें।साथ ही, कोई संशय हो अथवा ज्योतिष से संबंधित अन्य कोई प्रश्न हो तो आप लोग निःसंकोच मुझसे संपर्क कर सकते हैं। कुछ मित्रों के मैसेजेस तथा कॉल्स मुझे प्राप्त हुए। ज्योतिष से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण उलझनों को लेकर उन्होंने कॉल्स किए थे। किंतु, उनमें अधिकांश मित्र अपना संशय पूछने में हिचकिचा तथा सकुचा रहे थे। किंतु, ज्योतिष संबंधित किसी भी प्रश्न को पूछने में किसी को हिचकिचाने की, सकुचाने की आवश्यकता नहीं है। फेसबुक तथा यूट्यूब पर पोस्ट्स डालने के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य यही है, कि ज्योतिष अध्ययन करने वाले जितने भी ब्राह्मण छात्र हैं, प्रायः सभी को ज्योतिष संबद्ध समुचित ज्ञान प्राप्त हो।अत‌एव, हर ब्राह्मण बालक, ज्योतिष का अध्ययन करने वाला हर छात्र अपने किसी भी संशय को लेकर मुझे निःसंकोच कॉल अथवा मैसेज कर सकते हैं। मैं यदि व्यस्त रहा और आपकी कॉल नहीं ले पाया,तो आपको रिटर्न कॉल करुंगा।अत‌एव कॉल कनेक्ट न हो पाने पर बार-बार कॉल करके न स्वयं व्याकुल हों, तथा न ही मुझे चिंतित करें।केवल ज्योतिष संबंधित संशयों को ही लेकर मुझसे संपर्क करें। व्यर्थ कॉल न करें। धन्यवाद्।

✍️आपका अपना
आपके ह्रदय के समीप
आपसे स्नेह बांटने को नित्य उत्सुक
पंडित मंगलेश शर्मा
📱-9516831181

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05/09/2026

रेवती नक्षत्र मंत्र ~
देवता - पूषा

पूषन तव व्रते वयं न रिष्येम कदाचन।
स्तोतारस्तऽइह स्मसि।।

ॐ पूषाय नमः

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05/09/2026

शिक्षक दिवस तथा अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस की शुभकामनाएं।
आज एक ऐसी विभूति का जन्मदिवस है, जिसने शिक्षण को नये आयाम दिए।वहीं, दूसरी ओर ऐसी विभूति की पुण्यतिथि है, जिसने स्वयं धनाढ्य होते हुए भी निर्धनों की वेदनाओं का अपने ह्रदय में आभास किया।
जी, हां।
मैं बात कर रहा हूं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तथा उस महान् महिला मदर टेरेसा की।
गजब का संजोग है। एक पूरब से तो एक पश्चिम से।एक का उदय दिवस (जन्मदिवस) तथा एक का अस्त दिवस (पुण्यतिथि)।आईए,आज आपको इन दोनों के विषय में विस्तार से बताते हैं।

मदर टेरेसा ~"मदर टेरेसा (२६ अगस्त १९१० - ५ सितम्बर १९९७) जिन्हें रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से उपाधि दी गयी है, का जन्म 'आन्येज़े गोंजा बोयाजियू' के नाम से एक 'अल्बेनीयाई' परिवार में 'उस्कुब, उस्मान साम्राज्य (वर्त्तमान सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य)' में हुआ था। मदर टेरेसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिन्होंने १९४८ में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ले ली थी। इन्होंने १९५० में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। ४५ सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ और मरते हुए लोगों की इन्होंने मदद की और साथ ही मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया।"
"१९७० तक वे निर्धनों तथा असहायों के लिए अपने मानवीय कार्यों के लिए प्रसिद्ध हो गयीं, माल्कोम मुगेरिज के कई वृत्तचित्र और पुस्तक जैसे 'समथिंग ब्यूटीफुल फॉर गॉड' में इसका उल्लेख किया गया है। इन्हें १९७९ में नोबेल शांति पुरस्कार और १९८० में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया गया था। मदर टेरेसा के जीवनकाल में 'मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी' का कार्य लगातार विस्तृत होता रहा और उनकी मृत्यु के समय तक वह १२३ देशों में ६१० मिशन नियंत्रित कर रही थीं। इसमें एचआईवी/एड्स, कुष्ठ और तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाएं/ घर शामिल थे और साथ ही सूप, रसोई, बच्चों और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और विद्यालय भी थे। मदर टेरसा की मृत्यु के बाद इन्हें पोप जॉन पॉल द्वितीय ने धन्य घोषित किया और इन्हें कोलकाता की धन्य (संत) की उपाधि प्रदान की।

ह्रदयाघात के कारण 5 सितंबर 1997 के दिन मदर टैरेसा की मृत्यु हुई थी।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ~वहीं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के चित्तूर जिले के तिरुत्तनी ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरस्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। वह एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार से थे।
भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद और देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में ही मनाया जाता है।
जिसका मुख्य कारण और इतिहास अत्यंत गौरवमय है।वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उनकी विद्वत्ता,दार्शनिकता तथा शिक्षा प्रणाली से संपूर्ण भारणवर्ष के छात्र इतने प्रभावित थे कि वर्ष 1962 में जब वे राष्ट्रपति बने, तब उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी।उस समय जन्मदिवस मनाने का इतना अधिक चलन नहीं था, किंतु आंग्ल संस्कृति के हैप्पी बर्थडे से प्रभावित छात्र छात्राएं चाहते थे कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस मनाएं।
इस के उत्तर में डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि व्यक्तिगत जन्मदिन मनाने के स्थान पर यदि इस दिन को देश के सभी शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो उन्हें अधिक प्रसन्नता होगी।
उनकी इसी इच्छा का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की।उनकी प्रभावशीलता को देखते हुए वे चाहते तो इस दिवस को स्वयं उनके जन्मदिवस के रुप में मनाना आरंभ हो सकता था। किंतु, वे शिक्षा के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने ये दिवस भारत के समस्त शिक्षकों के सम्मान में स्मरणीय बना दिया।

नमन है ऐसी विभूतियों को, जो अपने लिए नहीं, समस्त धरातल के लिए जीतीं रहीं।

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04/09/2026

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र मंत्र ~
देवता - अहिर्बुध्न्य

ॐ शिवोनामासिस्वधितिस्तेपितानमस्तेऽअस्तु मा मा हि ग्वं सीः।
निवर्त्तयाम्म्यायुषेऽन्नाद्यायप्प्रजननाय रायस्पोषाय सुप्प्रजास्त्वाय सुवीर्ॺ्ॺऻय।।

ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः

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