05/09/2026
शिक्षक दिवस तथा अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस की शुभकामनाएं।
आज एक ऐसी विभूति का जन्मदिवस है, जिसने शिक्षण को नये आयाम दिए।वहीं, दूसरी ओर ऐसी विभूति की पुण्यतिथि है, जिसने स्वयं धनाढ्य होते हुए भी निर्धनों की वेदनाओं का अपने ह्रदय में आभास किया।
जी, हां।
मैं बात कर रहा हूं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तथा उस महान् महिला मदर टेरेसा की।
गजब का संजोग है। एक पूरब से तो एक पश्चिम से।एक का उदय दिवस (जन्मदिवस) तथा एक का अस्त दिवस (पुण्यतिथि)।आईए,आज आपको इन दोनों के विषय में विस्तार से बताते हैं।
मदर टेरेसा ~"मदर टेरेसा (२६ अगस्त १९१० - ५ सितम्बर १९९७) जिन्हें रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से उपाधि दी गयी है, का जन्म 'आन्येज़े गोंजा बोयाजियू' के नाम से एक 'अल्बेनीयाई' परिवार में 'उस्कुब, उस्मान साम्राज्य (वर्त्तमान सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य)' में हुआ था। मदर टेरेसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिन्होंने १९४८ में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ले ली थी। इन्होंने १९५० में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। ४५ सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ और मरते हुए लोगों की इन्होंने मदद की और साथ ही मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया।"
"१९७० तक वे निर्धनों तथा असहायों के लिए अपने मानवीय कार्यों के लिए प्रसिद्ध हो गयीं, माल्कोम मुगेरिज के कई वृत्तचित्र और पुस्तक जैसे 'समथिंग ब्यूटीफुल फॉर गॉड' में इसका उल्लेख किया गया है। इन्हें १९७९ में नोबेल शांति पुरस्कार और १९८० में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया गया था। मदर टेरेसा के जीवनकाल में 'मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी' का कार्य लगातार विस्तृत होता रहा और उनकी मृत्यु के समय तक वह १२३ देशों में ६१० मिशन नियंत्रित कर रही थीं। इसमें एचआईवी/एड्स, कुष्ठ और तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाएं/ घर शामिल थे और साथ ही सूप, रसोई, बच्चों और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और विद्यालय भी थे। मदर टेरसा की मृत्यु के बाद इन्हें पोप जॉन पॉल द्वितीय ने धन्य घोषित किया और इन्हें कोलकाता की धन्य (संत) की उपाधि प्रदान की।
ह्रदयाघात के कारण 5 सितंबर 1997 के दिन मदर टैरेसा की मृत्यु हुई थी।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ~वहीं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के चित्तूर जिले के तिरुत्तनी ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरस्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। वह एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार से थे।
भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद और देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में ही मनाया जाता है।
जिसका मुख्य कारण और इतिहास अत्यंत गौरवमय है।वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उनकी विद्वत्ता,दार्शनिकता तथा शिक्षा प्रणाली से संपूर्ण भारणवर्ष के छात्र इतने प्रभावित थे कि वर्ष 1962 में जब वे राष्ट्रपति बने, तब उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी।उस समय जन्मदिवस मनाने का इतना अधिक चलन नहीं था, किंतु आंग्ल संस्कृति के हैप्पी बर्थडे से प्रभावित छात्र छात्राएं चाहते थे कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस मनाएं।
इस के उत्तर में डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि व्यक्तिगत जन्मदिन मनाने के स्थान पर यदि इस दिन को देश के सभी शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो उन्हें अधिक प्रसन्नता होगी।
उनकी इसी इच्छा का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की।उनकी प्रभावशीलता को देखते हुए वे चाहते तो इस दिवस को स्वयं उनके जन्मदिवस के रुप में मनाना आरंभ हो सकता था। किंतु, वे शिक्षा के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने ये दिवस भारत के समस्त शिक्षकों के सम्मान में स्मरणीय बना दिया।
नमन है ऐसी विभूतियों को, जो अपने लिए नहीं, समस्त धरातल के लिए जीतीं रहीं।
#शिक्षक #दिवस
#डॉ #सर्वपल्ली #राधाकृष्णन्
#मदर #टेरेसा
#धरा #के #देवदूत
#परोपकारार्थमिदंशरीरं
#मानव #धर्म #सर्वोच्च