Awaaz-e-Amit Words & Society

Awaaz-e-Amit
Words & Society साहित्य, समाज और समकाल पर बेबाक विचार।
कविता, व्यंग्य और वर्तमान पर स्पष्ट अभिव्यक्ति।
शब्दों के माध्

03/04/2026

बचपन की यादें फिर से ताजा 🌟🌈😊👍

02/04/2026
29/03/2026

🌿 मिट्टी की महक का पुनर्जागरण 🌿

वही सिगड़ी, वही चूल्हा,
वही पुरखों का प्यार,
धुएँ में भी बसता था,
जीवन का असली सार।

नीली लौ ने जब छीना,
मिट्टी का वो अपनापन,
सुविधा तो घर में आई,
पर खो बैठा था जीवन।

रोटी में वो स्वाद कहाँ था,
ना वो खुशबू, ना वो बात,
गैस की जल्दी में जैसे,
छूट गया था हर जज़्बात।

बीमारियों ने घर घेरा,
तन-मन होने लगे लाचार,
तब याद आया चूल्हा फिर,
जिसमें बसता था संस्कार।

अब फिर धुआँ उठता देखो,
कच्ची मिट्टी के घर से,
सेहत की खुशबू लौट आई,
माँ के हाथों की लहर से।

चाहे मजबूरी कह लो इसको,
या वक्त का कोई वार,
पर लौट रहा है फिर से,
चूल्हे का स्वस्थ संसार।

सच ही कहते ज्ञानी जन,
ये सृष्टि है गोल आकार,
जो छूट गया था पीछे कहीं,
वो लौटे बारंबार।

परंपराएँ मरती नहीं,
बस लेती हैं विश्राम,
वक्त के संग फिर जीवित होती,
बनकर अपना ही अभिराम।

अंबालाल उर्फ अमित लोढ़ा कहें,
मिट्टी में छुपा है सच्चा संसार,
जो जड़ों से जुड़ा रहेगा सदा,
वही पाएगा जीवन का असली सार।।

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23/03/2026

“वाटी गाँव – वीर भूमि, संस्कृति धाम”

अरावली की गोद उज्ज्वल,
जहाँ पवन भी गाथा गाए,
उस पावन धरा का परिचय—
वाटी गाँव जगत कहलाए।

माटी में ममता घुली हुई,
हर कण में इतिहास बसा,
देव-मंदिर, ताल-तलाईयाँ,
धरती का आँचल झिलमिल सा।

जहाँ सुबहें शंखनाद करें,
और संध्या दीपों से सजे,
जहाँ संस्कारों की सरिता,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी बहती रहे।

इस पावन भूमि के आंचल में,
एक रहस्य भी छिपा गहरा,
“बुझ” नाम से विख्यात स्थल,
जिसे भीमेरा कहे यह चेहरा।

शांत, रमणीय, एकांत धरा,
जहाँ प्रकृति मुस्काती है,
कल-कल बहते निर्मल जल से,
ध्यान की धुन झरती जाती है।

किनारों पर वह आश्रम प्राचीन,
जहाँ ऋषि-मुनि तप में लीन,
साधना की अग्नि में तपकर,
बना यह क्षेत्र अलौकिक, नवीन।

आज भी वह पथ कठिन है,
जहाँ पहुँच न पाता हर कोई,
वीरान घाटी, दूर बसी,
मानो समय भी ठहर गया हो वहीं।

उसी भूमि पर एक पत्थर,
विशाल, अडिग, अनोखा खड़ा,
जिसे यहाँ की भाषा में कहते—
“गोफानिया भाटा” बड़ा।

जनश्रुति कहती, महाभारत में,
वनवास के उन कठिन दिनों में,
माता कुन्ती संग पांडव आए,
जन-रक्षा हेतु इस क्षेत्र में।

असुरों के आतंक से पीड़ित,
जब जन-जीवन हुआ अधीर,
तब महाबली भीम ने धारण किया,
अपने भीतर का अद्भुत वीर।

गोफन में भर वह शिला-वज्र,
गर्जन सा आकाश हिला,
एक ही प्रहार में दुष्ट दल टूटा,
धर्म का फिर दीप जला।

आज वही शिला साक्षी बनकर,
युगों की कथा सुनाती है,
“गोफानिया भाटा” बनकर भीम का,
पराक्रम अमर दिखाती है।

यह कथा केवल कल्पना नहीं,
आस्था का आधार यहाँ,
क्योंकि पास ही फरारा गाँव में,
खड़ा कुंतेश्वर महादेव महान।

माता कुन्ती की तप-स्थापना,
श्रद्धा का अटूट प्रमाण,
सीना ताने खड़ा वह मंदिर,
जन-जन का विश्वास महान।

इन सब गौरव गाथाओं से,
वाटी की माटी धन्य हुई,
वीरों की यह जन्मभूमि,
संस्कारों से पावन हुई।

यह केवल एक गाँव नहीं,
यह इतिहास का जीवंत ग्रंथ,
जहाँ हर कण कहता गाथा—
धर्म, शौर्य और तप का संतुलित पंथ।

जो यहाँ की धूल को छू ले,
उसमें भी कुछ बदल जाता है,
वाटी की इस पावन माटी से,
जीवन स्वयं काव्य बन जाता है।

अंबालाल उर्फ अमित लोढ़ा,
हृदय से आभार जताता है,
जो इस वाटी की पावन माटी में जन्म लेकर,
अपने जीवन को धन्य बताता है।

जिस धरा ने संस्कार दिए,
जिसने जीवन को अर्थ दिया,
उसी के गुणगान का अवसर पाकर,
मन कृतज्ञता से भर जाता है।

भाग्य है यह, सौभाग्य महान,
जो इस मिट्टी का स्पर्श मिला,
हर कण में छिपी पावनता ने
जीवन का हर रूप खिला।

जो यहाँ की धूल को छू ले,
उसमें भी कुछ बदल जाता है,
वाटी की इस पावन माटी से,
जीवन स्वयं काव्य बन जाता है।

22/03/2026

"रणभेरी के बीच इंसानियत" 🔥

गरज रहा है अम्बर, धरती कांप रही है,
शक्तियों की टक्कर से दुनिया जल रही है।

अमेरिका का ऐलान, इज़राइल का वार,
ईरान की हुंकार से गूंजता संसार।

डोनाल्ड ट्रंप की जिद का ये परिणाम,
राजनीति के खेल में सुलगता हर धाम।

यूरेनियम की चमक, तेल का अभिमान,
इनके लिए जल रहा है पूरा इंसान।

कोई कहे “सुरक्षा”, कोई बोले “अधिकार”,
पर सच ये है—हर ओर है बस हथियार।

इज़राइल को सहारा, अमेरिका का साथ,
ईरान भी खड़ा है लिए अपना ही हाथ।

कटाक्ष सुनो—ये कैसी वीरता की पहचान?
जहाँ मासूमों का खून बने सम्मान!

जहाँ जीत का झंडा लहराए सीना तान,
पर पीछे छूट जाए रोता हर इंसान।

ठिकानों पर हमले, बढ़ता प्रतिशोध,
हर दिन नया जख्म, हर रात नया क्रोध।

आतंक के साये में सिमटता हर घर,
और नेता गिनते हैं जीत का सफर।

पर वीरता वही, जो रक्षा करे प्राणों की,
न कि कीमत बने निर्दोषों के अरमानों की।

देशभक्ति वो, जो शांति का दीप जलाए,
न कि युद्ध की आग में दुनिया झोंक जाए।

उठो, अब भी समय है—सोचो, समझो,
मानवता के दीप को फिर से तुम गढ़ो।

अंबालाल उर्फ अमित लोढ़ा की यही पुकार,
“इंसान बचेगा तो ही बचेगा संसार।”

20/03/2026

“कुदरत का अटल न्याय”

जब चलना नहीं आता था,
तब हाथों का सहारा मिलता था,
आज खुद अपने पैरों पर खड़ा हूँ,
तो हर कदम पर धक्का मिलता है।

गिराने की साज़िश करते हो तुम,
किसी और को ऊपर उठाने के लिए,
पर याद रखो ये वक्त बदलता है,
झूठी ताकत मिट जाने के लिए।

सुन लो मेरी ये हुंकार आज—
जिसके लिए तुम मुझे गिराते हो,
एक दिन वही तुम्हें रौंद देगा,
जिसे तुम अपना बताते हो।

वक्त खामोश जरूर है,
पर न्याय का शंख बजाता है,
कुदरत का अटल ये नियम
हर अत्याचारी को झुकाता है।

आज तुम्हारी महफ़िल सजी है,
भीड़ तुम्हारे साथ खड़ी है,
पर आने वाला हर एक पल
तुम्हारी हार लिखने को खड़ी है।

जब सच से सामना होगा,
तब तक देर बहुत हो जाएगी,
ना कोई साथ निभाएगा,
बस तन्हाई ही रह जाएगी।

और तब याद करोगे तुम—
जिसे तुमने ठुकराया था,
वो हर वार सहकर भी
अडिग खड़ा हो पाया था।

मैं गिरकर भी उठ जाऊँगा,
ये मेरा अटल विश्वास है,
पर जो औरों को गिराते हैं,
उनका निश्चित विनाश है।

कुदरत का नियम अटल है,
न कभी झुका, न झुकेगा,
जो जैसा बोएगा इस जग में,
वो वैसा ही फल भोगेगा।

ये रण की सीख सुन लो तुम—
नफरत से कोई जीत नहीं,
जो औरों को गिराते हैं,
उनकी कोई प्रीत नहीं।

अंबालाल उर्फ अमित लोढ़ा का ये प्रण अटल—
सत्य की राह ही खास है,
जो हर तूफान में अडिग रहे,
वही असली वीर और प्रकाश है।

19/03/2026

* *नववर्ष एवं गुड़ी पड़वा की मंगल वंदना*
*
नव प्रभात की स्वर्णिम बेला, नव संवत्सर का आगमन,
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा लेकर आई, आशा, उमंग और नव जीवन।

सृष्टि का आरंभ इसी दिन हुआ—ऐसा शास्त्रों में वर्णन है,
ब्रह्मा जी ने रचा जगत, यही नववर्ष का पावन कारण है।

आज का दिन केवल तिथि नहीं,
संस्कृति का गौरव, परंपरा का मान है,
हर द्वार सजे, हर मन खिले—
यही हिंदू नववर्ष की पहचान है।

महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का उत्सव,
विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक,
गुड़ी को ऊँचा स्थापित करते हैं,
मानो कह रहे हों—“जीवन हो अडिग और अडिग ही ठीक।”

कड़वे-मीठे नीम-गुड़ का संग,
जीवन का सच्चा संदेश देता है,
सुख-दुख दोनों को अपनाकर,
आगे बढ़ने का पथ सिखाता है।

यह वही दिन है जब
नव विक्रम संवत का प्रारंभ होता है,
राम राज्य की स्मृतियाँ, धर्म की मर्यादा,
हर हृदय में नव उत्साह संजोता है।

खेतों में नई फसल की खुशबू,
आँगन में रंगोली की छटा निराली,
हर मन में नव संकल्प जागे—
हर दिशा में खुशियों की लाली।

आओ इस नववर्ष पर प्रण करें—
संस्कारों को सदा संजोए रखेंगे,
परिश्रम, सत्य और सद्भाव से
अपने जीवन को ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।

हर दिन नया उत्सव बने,
हर पल में हो उजियारा,
हिंदू नववर्ष का यह शुभ अवसर
लाए जीवन में सुख अपार सारा।

🎉 *आपको हिंदू नववर्ष एवं गुड़ी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाएँ* 🎉

ईश्वर करें यह वर्ष आपके जीवन में
स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति और सफलता का नया अध्याय लिखे।

*आप सभी को हिंदू नववर्ष एवं गुड़ी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाएँ!*
ईश्वर से प्रार्थना है क यह नव संवत्सर आपके जीवन में
सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता के नए आयाम लेकर आए।

🌼 सप्रेम शुभेच्छा सहित —
अंबालाल उर्फ अमित लोढ़ा
Facebook पेज: आवाज़ ए अमित

07/03/2026

“नुकसान तो इंसानियत का ही होगा”

अमेरिका चाहे कितनी दादागिरी कर ले,
चाहे धरती पर सैन्य ठिकानों का जाल बिछा दे,
चाहे इसराइल को आग में घी सा उकसाए,
और ताक़त का नगाड़ा बजा दे—
पर इतिहास के पन्नों पर जब सत्य लिखा जाएगा,
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा।

ईरान चाहे कितना ही दंभ भर ले,
अरब की धरती पर चाहे बमों की बारिश कर दे,
मिसाइलों से चाहे आसमान को दहला दे,
और रण का कोलाहल बढ़ा दे—
पर जब राख से उठेगी मानवता की करुण पुकार,
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा।

अमेरिका चाहे टैरिफ की दीवारें खड़ी कर ले,
रूस के आगे चाहे कितने ही रोड़े अटका दे,
भारत को चाहे कितना ही दबाने का भ्रम पाल ले,
और दुनिया को अपने इशारों पर चलाने का स्वप्न देख ले—
पर जब विश्व का संतुलन डगमगाएगा,
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा।

ट्रम्प चाहे कितना ही बड़बोला हो जाए,
विपक्ष चाहे कितना ही हावी हो जाए,
नेताओं की जुबां चाहे तलवार बन जाए,
और राजनीति का रंग और गहरा हो जाए—
पर जब आँसू गिरेंगे आम इंसान की आँखों से,
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा।

युद्धों की जीत में जयकारे भले गूंजें,
पर हारता तो हर बार मानव ही है,
टूटती हैं माताओं की ममता,
और उजड़ता है बच्चों का भविष्य।

ताक़त के इस घमंड में
सत्ता भले मुस्कुरा ले एक पल को,
पर जब धरती माँ का हृदय कराहेगा—
तब युगों तक यही स्वर गूंजेगा…
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा,
नुकसान तो इंसानियत का ही होगा।

✍️ — अमित लोढ़ा

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Udaipur
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