अपनी लेखनी

अपनी लेखनी Poet

25/07/2026

शब्द का भावार्थ समझो पहले
विरोधाभास अच्छी बात नहीं हैं।
✍️ सत्येन्द्र मौर्या

Poet

07/07/2026

महंगे इत्र लगानें से घाटियां
विचारों कि - बदंबू नहीं जाती हैं ।
पवित्र मन वाला मनुष्य फटे
वस्त्र - में भी महान होता है।
,✍️ सत्येन्द्र मौर्या

08/06/2026

आज नहीं कल हर कोई
दुनिया से मुक्त हों जायेगा।

कौन कितनी विरासत का मालिक था
ये मामला भी संदिग्ध रह जायेगा।

जिन्दगी का वसूल भी है पक्का
किसी ना किसी दिन मौत सजा सुनायेगी।

मिट्टी मात्र में मिल जाने से
हमारा भविष्य मिट जायेगा।

सुदूर-गामी सोच रखने वाले
तुम्हारा ही शायद कुछ हो पायेगा।

सजाये मौत को सोचने मात्र से ही
आंखों से आंसू निकल ही जायेगा

हो कितना भी साहसी कोई क्यों ना
वो भी मौत से डर ही जायेगा।.......
✍️ सत्येन्द्र मौर्या

18/04/2026

मैं कब कहा कि।
तुम्हारे कौतूहल पर ध्यान नहीं देता ।
देख कर अनदेखा कर जाते।
और कितना सम्मान देता।
मेरी प्रतिक्रियाएं
नियंत्रण में हैं।मेरे
मैं उकसाने वालों को
तुम जितना सम्मान नहीं देता।
✍️ सत्येन्द्र मौर्या

14/03/2026

मुझे पहचानते तों सभी हैं।
मगर मन-भर जानता कौन हैं।

मैं मेरे खिलाफ किये बगावत का
सुबह शाम अंजाम लिखता हूं।

जानता हूं तुम्हें मैं बड़ी शिद्दत से
मगर चलों फिर भी अंजान लिखता हूं।

✍️ सत्येंद्र मौर्या .......

11/02/2026

हम कहां वाकिब थे तुम्हारे फरेब से
हमें तो लगा महानुभाव।
जैसा दिखते हो तुम वैसे हो
मन के भी अंदर से।
हुनर झुकने का मुझमें बहुत हैं
मगर हर चौखट पर सजदा करू।
यह मुझे गवारा नहीं।
बात सजदों की नहीं हैं महानुभाव।
सजदा किस नियत से हो रहा ये जरूरी हैं।
"कहते हैं ना कि ।
मयखाने में बैठा हर कोई शराबी
और मस्जिद में झुका हर कोई
नमाजी नहीं होता हैं।
✍️ सत्येंद्र मौर्या.....!!......!!

08/02/2026

जब युद्ध लम्बे समय तक
चलने वाला हो तो मान्यवर।
सारे अस्त्र-शास्त्र
एक साथ नहीं छोड़े जाते हैं।
✍️ सत्येंद्र मौर्या

कहते हैं ना कि......   नई नवेली दुल्हन का        श्रृंगार तभी तक अच्छा हैं।               जब तक उसके आगे पीछे           ...
05/02/2026

कहते हैं ना कि......
नई नवेली दुल्हन का
श्रृंगार तभी तक अच्छा हैं।
जब तक उसके आगे पीछे
रूप रंग निहारने वाले हैं।
✍️सत्येंद्र मौर्या

आदि का भी अंत होता हैं।यहां कहां‌‍‌ कुछ भी अनंत होता हैं।मानों तो पतझड़ भी एक घटना हैं।ना ही बारह महीने भादों रहता.........
31/01/2026

आदि का भी अंत होता हैं।
यहां कहां‌‍‌ कुछ भी अनंत होता हैं।
मानों तो पतझड़ भी एक घटना हैं।
ना ही बारह महीने भादों रहता......
और ना बारह महीने बसंत होता हैं।
✍️सत्येन्द्र मौर्या

मेरे टूटनें का जिम्मेदार कोई और नहीं बस मेरा      जौहरी ही  हैं।उसकी जिद हैं कि हमें और तराशा जाये ।                    ...
27/01/2026

मेरे टूटनें का जिम्मेदार
कोई और नहीं बस मेरा
जौहरी ही हैं।
उसकी जिद हैं कि
हमें और तराशा जाये ।
✍️ सत्येन्द्र मौर्या

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