Bhakti Sangeet TV

Bhakti Sangeet TV Bhakti Sangeet TV provides Hindi and Haryanvi bhajan & bhakti songs sharing positive vibes with you.
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Listen to Kanhaiya Mittal, Sanjay Mittal, Raj Pareek, Anjali Dwivedi, Reshmi Sharma and more Bhajan Singers from India.

15/07/2026

प्रेम का धागा तुमसे बांधा ये टूटे ना- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

कोई भी पास नहीं था तब बाबा पास खड़ा था- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

जो भी दरबार में आया- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

मुझे बाबा सहारा दो- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

दर्दो को सहते-२ टूट गया- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

कृपा बनाये रखना बाबा- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




15/07/2026

अरदास है सुनलो बाबा- Rajni Rajasthani Ji 🙏🙏




तीन बाण और प्रतिज्ञा: बर्बरीक बाल्यकाल से ही अत्यंत वीर और महान धनुर्धर थे। उन्होंने माँ दुर्गा की तपस्या करके तीन अमोघ ...
03/07/2026

तीन बाण और प्रतिज्ञा: बर्बरीक बाल्यकाल से ही अत्यंत वीर और महान धनुर्धर थे। उन्होंने माँ दुर्गा की तपस्या करके तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे, जिनसे तीनों लोकों को जीता जा सकता था।महाभारत युद्ध: जब महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ, तो बर्बरीक भी युद्ध देखने गए। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि जो पक्ष युद्ध में हारेगा, वे उसी की तरफ से लड़ेंगे।श्रीकृष्ण की परीक्षा: भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक हारने वाली सेना की तरफ से लड़े, तो परिणाम विनाशकारी होगा। ब्राह्मण रूप धारण कर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उनकी वीरता का प्रमाण मांगा। बर्बरीक ने पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को एक ही बाण से छेद दिया।





श्याम बाबा (खाटू श्याम) का संबंध महाभारत काल से है। ये पांडुपुत्र भीम के पौत्र (घटोत्चच और मोरवी के पुत्र) थे और पहले 'ब...
03/07/2026

श्याम बाबा (खाटू श्याम) का संबंध महाभारत काल से है। ये पांडुपुत्र भीम के पौत्र (घटोत्चच और मोरवी के पुत्र) थे और पहले 'बर्बरीक' कहलाते थे। उन्होंने अपनी वीरता से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण से वरदान पाया था कि कलियुग में वे 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे और भक्तों के उद्धारक होंगे。बर्बरीक से खाटू श्याम तक की पौराणिक कहानी:तीन बाण और प्रतिज्ञा: बर्बरीक बाल्यकाल से ही अत्यंत वीर और महान धनुर्धर थे। उन्होंने माँ दुर्गा की तपस्या करके तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे, जिनसे तीनों लोकों को जीता जा सकता था।महाभारत युद्ध: जब महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ, तो बर्बरीक भी युद्ध देखने गए। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि जो पक्ष युद्ध में हारेगा, वे उसी की तरफ से लड़ेंगे।श्रीकृष्ण की परीक्षा: भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक हारने वाली सेना की तरफ से लड़े, तो परिणाम विनाशकारी होगा। ब्राह्मण रूप धारण कर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उनकी वीरता का प्रमाण मांगा। बर्बरीक ने पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को एक ही बाण से छेद दिया।शीश का दान: श्रीकृष्ण ने दानवीरता की परीक्षा लेते हुए उनसे उनका शीश (सिर) मांग लिया। एक वीर योद्धा के रूप में बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश काटकर दान कर दिया।युद्ध देखने की इच्छा: बर्बरीक ने श्रीकृष्ण से महाभारत का युद्ध देखने की अंतिम इच्छा व्यक्त की। श्रीकृष्ण ने उनका शीश युद्धभूमि के समीप एक ऊंचे स्थान पर रख दिया, जहाँ से बर्बरीक ने पूरे युद्ध का आँखों देखा हाल देखा।कलयुग में वरदान: बर्बरीक के महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वर दिया कि कलयुग में तुम मेरे (श्याम) रूप में पूजे जाओगे। तुम्हारे नाम मात्र के उच्चारण से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे。खाटू में शीश का प्रकट होना:कलियुग में, राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू गाँव में एक चमत्कार हुआ। एक गाय रोज़ाना अपने थनों से एक स्थान पर दूध की धारा बहाती थी। खुदाई करने पर वहाँ बर्बरीक का कटा हुआ शीश प्रकट हुआ。 तत्पश्चात, खाटू के तत्कालीन राजा रूप सिंह चौहान ने स्वप्न के आधार पर विक्रम संवत 1027 में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया और शीश को स्थापित किया





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