02/11/2025
आज ही के दिन यानी 22 नवंबर, 1774 की दोपहर को, रॉबर्ट क्लाइव — जिन्हें आम तौर पर भारत का लॉर्ड क्लाइव कहा जाता था — श्रॉपशायर काउंटी के वाल्कोट स्थित अपने भव्य घर के बाथरूम में मृत पाए गया। उसी रात, उनके पार्थिव शरीर को पास के मोरेटन से स्थित चर्च ले जाया गया। वहाँ, अंतिम संस्कार में केवल कुछ ही शोकसभा में उपस्थित लोगों की उपस्थिति में, उन्हें दफनाया गया, उनकी कब्र का सही स्थान अज्ञात है। उनकी मृत्यु का विवरण प्रेस में अस्पष्ट जानकारी के माध्यम से जनता से छिपाया गया, जिससे प्रेस को संदेह हुआ कि क्या हुआ था।
18 वर्ष का राबर्ट क्लाइव भारत में केवल , ईस्ट इंडिया कंपनी मामूली क्लर्क बनकर 1744 में आया था । और नौ वर्ष तक लगातार, उसने हर तरह से भारत को लूटा , हर तरह से धन कमाया , सोना चांदी हीरा मोती । कुछ नही छोड़ा । राजाओं के राज्य के राज्य हड़प लिए । लोगो को सूलियों पर चढ़ा दिया । भारत में हर तरह से मौत का तांडव किया ।
दिलचस्प ये है की उसके जितना टूटा उसका आधा ही कंपनी को दिया । यानी भारत की लूट का आधा हिस्सा उसके खुद अपनी तिजोरी में रखा । और जब 1753 में क्लाइव भारत से लौटा तो लोग उसकी अकूत संपत्ति और आश्चर्यजनक वैभव देखकर लोग चकित रह गए । लोगो को बल्कि खुद उसके सहकर्मी और ईस्ट इंडिया कंपनी के तमाम उच्चाधिकारियों को उसमे ईर्ष्या होने लगी । ब्रिटिश सरकार के तमाम अधिकारियों को उसकी शोहरत हजम नही हुई ।
ऐसे में सरकार ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दायर कर दिया । और कोर्ट में उसकी पेशियां होने लगी ।
इसी बीच उसको एक बार फिर भारत जाने का मौका मिला चूंकि वो एक योद्धा था , इस लिए ब्रिटिश सरकार ने पुनः ब्रिटिश सरकार का प्रभुत्व स्थापित करने के लिए फोर्ट सेंट डेविड के उप गवर्नर बनाकर भारत भेजा । इसी समय 1757 में इसके सिराजुद्दौला को हराया , यह युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए एक निर्णायक जीत थी, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी भारत में सर्वोच्च शक्ति बन गई। लेकिन इस बीच ब्रिटिश सरकार में इसकी लोकप्रियता में भारी कमी आई । इसके ऊपर भष्टाचार का आरोप धीरे धीरे सिद्ध होने लगे थे । भारत में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बहुत धन कमाया, जिसके कारण ब्रिटेन में उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और संसद में उनकी कड़ी आलोचना हुई। इन मुकदमों और बदनामी से वह बहुत परेशान और शर्मिंदा रहने लगा था ।
जब क्लाइव ने जनवरी 1767 में भारत छोड़ा तो उसके पास £401,102 (2023 में £67,900,000 के बराबर) की संपत्ति थी । जो लोग कल तक इसकी भारत विजय का गुणगान करते नही थक रहे थे , वही लोग इसे कोसने लगे ।
वैसे भी भारत ने किए गए इसके अत्याचार की हाय इसे लेकर तर गई ।
भारत से वापसी के बाद इसे भारी अवसाद ने घेर लिया क्लाइव दिन दिन भर अपनी अरबों खरबों के महल में पड़ा रहता था । कहते है अंत आखिरी समय में ये भारत में किए गए गुनाह को सोचकर रोया करता था ।
खैर इसी तरह के अवसाद के चलते अफीस की लत ने उसे विक्षिप्त कर दिया और इसी विक्षिप्तता में उसने 22 नवंबर, 1774 को 49 वर्ष की अवस्था में आत्महत्या कर ली ।
“यह एक ऐसे व्यक्ति के जीवन का एक अपमानजनक अंत था जिसकी प्रतिष्ठा - उसके अपने चरित्र में प्रतिबिम्बित - एक चरम से दूसरे चरम तक झूलती रही। या तो वह ब्रिटिश इतिहास का सबसे महान सैन्य नेता था जिसने अकेले दम पर एक साम्राज्य स्थापित किया, या वह वह व्यक्ति था जिसने अपने लाभ के लिए एक गौरवशाली देश की संपत्ति को व्यक्तिगत रूप से लूटा और लूटा। शायद एकनिष्ठ दृढ़ निश्चयी और साहसी व्यक्ति या एक "अस्थिर समाजोपथ" (विलियम डेलरिम्पल के शब्दों में), जिसकी मूर्तियाँ नष्ट कर दी जानी चाहिए। इतिहास के फैसले पर अभी भी विवाद है। फिर भी, क्लाइव और उसकी विरासत के बारे में तर्क स्पष्ट रूप से इतिहास के बारे में नहीं , बल्कि राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर वर्तमान बहसों और दृष्टिकोणों के प्रति हमारे अपने दृष्टिकोण के बारे में हैं।”