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हिंदी इस कृषि प्रधान देश की बिंदी है,और करमा ही धरमा अथवा कर्म ही धर्म है। इस देश में सत्य प्रमाणित प्रकृति को सत्य भगवान मानकर पूजा की जाती है, जिस सत्य पर ही दुनियाँ कायम है।यही प्रमाणित सत्य भी है मेरा विचार व्यवहार और संस्कार " सच्चा प्यार भगवान के चरणो में चड़ाया जानेवाला किसी पवित्र फूल की तरह होता है जिसे सिर्फ अपने सच्चे जीवन साथी को चड़ाया जाता है "

संविधान क्या गुलाम करना और उच्च निच जाति भेदभाव करने के लिए बतलाया है क्या जो कि खुदको जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य उ...
15/01/2025

संविधान क्या गुलाम करना और उच्च निच जाति भेदभाव करने के लिए बतलाया है क्या जो कि खुदको जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य उच्च जाति आज भी भेदभाव करते हैं इस देश के मुलनिवासियों को निच जाति कहकर, जबकि हिंदू धर्म में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र यह सब वर्ण व्यवस्था है जो कि जन्म पर नही बल्कि कर्म पर आधारित है, जैसे कि न्यायपालिका विधायिका कार्यपालिका कर्म पर आधारित है। जिसमे अपने कर्म अथवा हुनर के आधार पर चयन करने की प्रक्रिया है न की जन्म पर, जो जिस तरह जाति नही है उसी तरह ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र भी कोई जाति नही बल्कि कर्म पर आधारित वर्ण है। जाति तो हम इंसानो की इंसान ही जाती है जैसे की हाथी गाय कुत्ता बिल्ली वगैरा जाति है जो कि एक जाति दुसरे जाति से संभोग करके बच्चा पैदा नही कर सकता जैसे की गाय और शेर के संभोग से बच्चा पैदा नही हो सकता। और न ही कोई इंसान जाति खुदको शेर कहकर शेरनी से संभोग करके बच्चा पैदा करा सकता है। उसी तरह कोई भी जाति का प्राणी दुसरे जाति के प्राणी से संभोग करके बच्चा पैदा नही कर सकता है, क्योंकि यह अप्रकृति है जिसे हिंदू धर्म में अधर्म कहा जाता है। क्योंकि हिंदू धर्म में विज्ञान प्रमाणित सत्य साक्षात प्रकृति की पूजा भगवान की पूजा है न कि हिंदू भगवान पूजा किसी अप्रकृति की पूजा है। अप्रकृति की पूजा हिंदू धर्म में अधर्म है, जिसका होना मतलब धर्म का खतरे में पड़ना है, जैसे की यदि यदि गाय से इंसान पैदा हो जाएगा तो धर्म खतरे में पड़ जाएगा अथवा अप्रकृति अधर्म हो जाएगा, जो होने पर हिंदू धर्म में यह कहा गया है कि जब जब धर्म को खतरा होगा तो भगवान अथवा प्रकृति अवतरित होकर अधर्म का विनास करके धर्म को वापस स्थापित करता है। जिसे इस उदाहरन से समझा जा सकता है कि यदि कोई शासक जिसका कार्य प्रजा की सेवा सुरक्षा देश की सुरक्षा करना होता है जो कि यदि वह न करके प्रजा और देश को गुलाम करता है तो यह धर्म को खतरा होकर भगवान अवतरित होकर अथवा प्रकृति गुलामी का विनास करके आजादी लाता है जैसे की गोरो ने जब गुलाम करने जैसा अधर्म किया तो उसका विनास होकर गोरो से आजादी कायम हुआ उसी तरह मनुवादि भी अपडेट गुलाम रामराज जैसे अधर्म कर रहा है तो उस गुलामी का विनास होकर धर्म की स्थापना पापस कायम होगी अथवा आजादी कायम होगी यहा असली धर्म है। जिसे हिंदू धर्म में करमा धरमा अथवा कर्मा धर्मा अथवा कर्म ही धर्म है कहा जाता है। जो ज्ञान कोई नही बांटेगा इस समय की कलयुग गुलामी में जो कि वही बांटेगा जिसे प्रकृति भगवान इस प्रकृति प्रमाणित सत्य को बांटने भेजा है,

विवाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर है.राहुल ने वैसे तो अपने भाषण में कई बातें कहीं लेकिन इं...

अबतक एक भी प्रधानमंत्री दलित क्यों नही बनाये गए हैं?
14/01/2025

अबतक एक भी प्रधानमंत्री दलित क्यों नही बनाये गए हैं?

Humanity,environment,family,society, republic,religion,politics, राजनीति, history etc

1947 से लेकर अबतक 2025 तक एक भी प्रधानमंत्री दलित क्यों नही?
13/01/2025

1947 से लेकर अबतक 2025 तक एक भी प्रधानमंत्री दलित क्यों नही?

Humanity,environment,family,society, republic,religion,politics, राजनीति, history etc

क्या india नाम विदेशियों द्वारा दिया गया है यह कहकर india नाम का कोई देश ही नही है यह मान लेनी चाहिए? क्या इस देश का जो ...
10/01/2025

क्या india नाम विदेशियों द्वारा दिया गया है यह कहकर india नाम का कोई देश ही नही है यह मान लेनी चाहिए?

क्या इस देश का जो राष्ट्रीय भाषा हिंदी है, उसे भी बदल देनी चाहिए यह कहकर की hindi शब्द विदेशियों के द्वारा दिया गया है? क्योंकि hindi नाम भी तो विदेशियों द्वारा सिंधू नाम से जोड़कर दिया गया है, और उसी तरह इंडस इंडिया नाम भी सिंधु से जोड़कर दिया गया है। मांशिक विकृत लोगो को जब पता है कि हिंदू नाम सिंधु से जुड़ा हुआ नाम है, और ब्राह्मण नाम बुद्धी ज्ञान अथवा विद्वान ज्ञानी से जुड़ा हुआ है, तब भी वे आजतक क्यों नही समझकर पागलो की तरह यह बहस करते रहते हैं कि हिंदू नाम विदेियों का है इसलिए हिंदू कोई धर्म नही हिन्दुस्तान कोई देश नही, india कोई देश नही? जो पागल लोग क्या विदेशियों द्वारा अपने भाषा बोली अनुसार सिंधु नदी को इंडस नदी और उसी से जोड़कर इस देश को india कहा है उसे भी यह नाम इस देश का नही है बल्कि विदेशियों का है कहकर इस देश को विदेशियों का कह देंगे? उसी तरह क्या पुरी दुनियाँ के विद्वान ज्ञानी लोगो को यह कहकर उन्हे शिक्षक गुरु वगैरा कहने से मना कर देंगे कि पुरी दुनियाँ में ब्राह्मण सिर्फ इस देश को गुलाम बनाकर जो कबिलई मनुवादि छुवाछुत करता है वही सिर्फ पुरी दुनियाँ में खुदको विद्वान पंडित, गुरु, शिक्षक कह सकता है। जिन मांशिक विकृत लोगो को समझ में बार बार खुद ही बहस करके खुद ही स्वीकार किये जाने के बाद भी अबतक क्यों समझ में नही आया है कि इस देश में हिंदू, हिन्दुस्तान, india नाम इस देश की पहचान से जुड़ा हुआ है, और ब्राह्मण की पहचान बुद्धी ज्ञान से जुड़ा हुआ है। जिस बारे में जानकर समझने के लिए क्या बच जाता है कि हिंदू विदेशियों को नही कहा जा सकता और ब्राह्मण अज्ञानियों को नही कहा जा सकता। बल्कि मुल रुप से अज्ञानी लोग जो गुलाम बनाकर उच्च निच छुवाछुत भेदभाव करके खुदको ब्राह्मण कहते हैं वही लोग हैं, क्योंकि बुद्धि ज्ञान किसी को गुलाम बनाना भेदभाव करना नही है, बल्कि बुद्धी ज्ञान इंसानियत कायम करना और प्रमाणित सत्य प्राकृतिक विज्ञान को मानना है, न कि अप्राकृति अविज्ञान को मानना ब्राह्मण अथवा विद्वान पंडित होना है। और जैसा की पुरी दुनियाँ जानती है कि जो विदेशी मुल का घुमकड़ कबिलई जिसे की पुरी दुनियाँ आज मनुवादि के रुप में जानता है जो कि सैकड़ो हजारो सालो से इस देश को गुलाम बनाकर उच्च निच छुवाछुत भेदभाव करता आ रहा है, वह अपनी अविकसित विकृत बुद्धी से इस देश को गुलाम बनाने और इस देश के वेद पुराणो जिसे की आज के समय में हिंदू धर्म के वेद पुराण के रुप में जाना जाता है, और उसे हिंदू धर्म का मुल ज्ञान भी माना जाता है, उसपर भी कब्जा जमाकर खुदको हिंदू विद्वान पंडित ब्राह्मण घोषित करके वेद पुराणो का ज्ञान जो की मुलता सत्य प्रमाणित प्राकृतिक विज्ञान पर अधारित है, उसे न समझकर उसे अप्रकृति अविज्ञान अथवा ढोंग पाखंड अँधविश्वास के रुप में समझकर उसको अपनी विकृत बुद्धी अनुसार मानता है, जिसके विकृत बुद्धी अनुसार कथित लिंगवाला किसी इंसान रुपी पुरुष ब्रह्मा के मुँह हाथ पैर पेट से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र नाम का अलग अलग चार इंसान जाति पैदा हुए हुए हैं जो की जन्म से ही अब अपना अलग अलग जाति के रुप में जाने जाते हैं, जैसे की इस पृथ्वी में बाकि अलग अलग प्रकार के जीव भी जाने जाते हैं, जिस तरह अविज्ञान अप्रकृति को मानने वाले विकृत बुद्धी वाले मनुवादि अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र कोई अपने कर्म हुनर के आधार पर अपनी पहचान लेने वाले एक ही जाति का इंसान नही हैं, बल्कि अलग अलग जाती का प्राणी हैं, जो कि अपने कर्म और हुनर नही बल्कि जन्म से ही ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जाति का अलग अलग चार प्रकार का प्राणी माने जाते हैं, यह बात विकृत बुद्धीवाला मनुवादि मानता है, जो की खुदको जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और इस देश के मुलनिवासियों जिसे की वह गुलाम बनाया है, उसे जन्म से शूद्र घोषित कहकर जन्म से निच जाति अथवा शूद्र मानता है। जबकि ऐसे गुलाम बनाने जैसे पाप कुकर्म करने वाले विकृत मांशिकता के लोगो को हिंदू वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण अथवा विद्वान नही कहा गया है, बल्कि ऐसी विकृत मांशिकता के यह गुलाम करने वाले विदेशी मुल के कबिलई अपने पाप कुकर्म से ब्राह्मण तो क्या क्षत्रिय अथवा रक्षक और वैश्य अथवा धन्ना भी नही कहला सकते, क्योंकि गुलाम बनाने उच्च निच छुवाछुत शोषण अन्याय अत्याचार करने वाले असल में कर्म से अज्ञानी भक्षक और लुटेरा कहलायेंगे जिन्हे उच्च जाति का नही बल्कि सबसे निच कर्म करने वाला निच इंसान कहा जा सकता है। जिसे इस पृथ्वी का सबसे अविकसित इंसान भी कहा जा सकता है।

08/01/2025

अंबेडकर का लिखा संविधान अगर इतना ही ताकतवर है तो उसके लागु होने के बावजुद भी इस देश के बहुसंख्यक मुलनिवासी अबतक गुलाम क्यों है? क्यों संविधान द्वारा सबको जिने का अधिकार मिलने के बावजुद भी अबतक करोड़ो लोग अति गरिबी भुखमरी जीवन जिते हुए भुख से मरने के लिए भी मजबुर हैं? क्योंकि संविधान बहुत पावरफुल है उनको ऐसी गरिबी भुखमरी जीवन जिने देने के लिए? जिस गुलामी जीवन की झांकि खुद सरकार द्वारा राष्ट्रीय आयोग का प्रमुख अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट 2007 ई.अनुसार 29 करोड़ लोग प्रतिदिन 6 रुपया, 26 करोड़ लोग प्रतिदिन 11 रुपया और 28 करोड़ लोग प्रतिदिन 20 रुपया खर्च करके जीवन यापन करते हैं! अथवा तब की आबादी में 83 करोड़ लोग 20 से भी कम खर्च करके अपना जीवन गुजारा करते हैं! जिन लोगो को वर्तमान में भी गरिबी भुखमरी हालात कायम रहने की वजह से प्रति नागरिक हर महिने 5 किलो सरकारी राशन दी जा रही है। जितनी बड़ी आबादी गोरो से आजादी मिलने के बावजुद भी आजतक गरिबी भुखमरी जीवन जिने को मजबुर इसलिए है, क्योंकि फिर से यह देश गुलाम हो गया है विदेशी मुल का उन कबिलई लुटेरो से जिनका dna और यहूदियों का dna एक है! और दोनो एक ही dna अथवा एक ही कबिलई परिवार का विदेशी मूल के हैं, जो विदेशी मुल के कबिलई लोग हिंदू कैसे हुए? कबिलई मनुवादि हिंदू है तो मनुवादि का ही dna का यहूदि भी क्या हिंदू है? और क्या हिंदू धर्म हिंदू पर्व त्योहार होली, दीवाली, मकर संक्रांती, छठ, ओनम, करमा पूजा, सरहूल वगैरा जो की प्रकृति पर अधारित हिंदू कलैंडर के अनुसार मनाई जाती है, वह भी क्या विदेशी पर्व त्योहार है ? जिसे विदेशी धर्म और विदेशी पर्व त्योहार और विदेशी कलैंडर बतलाने मानने वाले लोग दरसल मनुवादियों से संक्रमित विकृत मांशिकता से बिमार लोग हैं! जो विकृत बिमार लोग क्या यह बतला सकते हैं कि अंबेडकर हिंदू रहते जो मुकाम हाशिल किया था वह बड़ा है कि अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाकर उससे भी बड़ा मुकाम हासिल किया ? जाहिर है हिंदू रहते जो मुकाम हासिल किया अंबेडकर ने उसके ही उपलब्धी को दिन रात बतलाया जाता है! जिस हिंदू अंबेडकर के जैसा मुकाम इस देश में मौजुद कौन व्यक्ती हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाकर हासिल किया है? बल्कि इस देश के मुलनिवासियों का हिंदू धर्म को विदेशी मुल के मनुवादियों का धर्म कहने वाले विकृत बिमार इंसान उसी अंबेडकर को गुरुजी और बाबा अंबेडकर भी कहते हैं जिसने की हिंदू रहते मुकाम हासिल किया है! न कि वे उस अंबेडकर की जीवन को गुरुजी और बाबा कहते हैं जिसने की बौद्ध धर्म अपनाकर जीया है? खैर मनुवादियों द्वारा संक्रमित होकर इस देश का हिंदू धर्म को विदेशी धर्म कहने वाले विकृत लोगो को तो यही कहूँगा कि ध्यान से मुझसे यह सत्यबुद्धी ज्ञान ले लो जो ज्ञान आजतक बुद्ध और अंबेडकर ही नही बल्कि किसी भी गुरु ने मनुवादियों से संक्रमित ऐसे विकृत इंसानो को आजतक नही दिया है, जो कि हिंदू धर्म को मनुवादियों का धर्म मानते हैं!जिसके चलते ही वे इस देश के मुल हिंदू मुलनिवासियों को हिंदू नही मानते हैं, और विदेशी मुल के मनुवादियों को मुल हिंदू मानकर हिंदू धर्म को विदेशी धर्म मानते हैं! बल्कि ऐसे ही विकृत लोग मनुवादियों को सचमुच का जन्म से उच्च ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य अथवा उच्च विद्वान पंडित बलवान धनवान मानते हैं!जिसके चलते वे लोग हिंदू धर्म को ब्राह्मणो का धर्म बतलाते हैं, जबकि ब्राह्मण का मतलब हिंदू वर्ण व्यवस्था में कर्म के अनुसार विद्वान ज्ञानी को बतलाया गया है जो न की गुलाम करने और उच्च निच भेदभाव पाप कुकर्म करने वाले को ब्राह्मण बतलाया गया है। क्योंकि सच्चाई यही है कि ये गुलाम करने छुवाछुत करने जैसे दुनियाँ का सबसे बड़ा पाप कुकर्म करने वाले हिंदू धर्म अथवा कर्म के अनुसार सबसे निच कर्म करने वाले सबसे निच लोग हैं, न कि कर्म अनुसार वे गुलाम बनाकर सबसे उच्च ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य कहलायेंगे! जो लोग आज भी यदि हिंदू धर्म के अनुसार शिक्षक बहाली में जाकर अपने साथ हजारो सालो का गुलाम करने उच्च निच छुवाछुत करने की अनुभव बतलाकर शिक्षक बनने के लिए चाहेंगे तो दुनियाँ का कोई भी स्कूल उन्हे यह जानकर शिक्षक नही बनायेगा की ये लोग ज्ञान में भी भेदभाव करते हुए अँगुलीमार डाकू से भी बड़ा अपराध करने वाले अँगुली कटवाकर गुरु दक्षिणा मांगने वाले गुरुघंटाल हैं। जिन्हे असली हिंदू मानने की विकृत मांशिक बिमारी को दुर करने के लिए जो ज्ञान दे रहा हूँ उसे कड़वा दवा के रुप में अपने विकृत बुद्धी में डाल ले ऐसे विकृत लोग जो कि मनुवादियों को मुल हिंदू मानते हैं। जो की मैं सत्य बुद्धी ज्ञान दे रहा हूँ कि मनुवादि हिंदू नही है। और यह भी सत्य बुद्धी ज्ञान ऐसे बिमार लोग ले लें कि हिंदू धर्म उच्च निच छुवाछुत को नही मानता है, और न ही मुल हिंदू छुवाछुत करता है, बल्कि जो हिंदू नही है वह खुदको जन्म से हिंदू कहकर हिंदू धर्म में कब्जा करके और देश गुलाम करके खुदको उच्च ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और इस देश के मुलनिवासियों को शूद्र घोषित करके उच्च निच छुवाछुत आजतक करता आ रहा है, जिसका मतलब ये नही कि हिंदू धर्म उच्च निच छुवाछुत को मानता है, और असली हिंदू उच्च निच छुवाछुत भेदभाव करता है, क्या मुलनिवासि हिंदू अंबेडकर अपने पुरी जीवन में किसी के साथ भेदभाव किया कभी, बल्कि क्या कोई भी मुलनिवासि जो की असली हिंदू है, वह किसी के साथ छुवाछुत भेदभाव करता है? और रही बात हिंदू धर्म में ढोंग पाखंड अँधविश्वास के होने की तो वह तो अंबेडकर का लिखा आजाद भारत का संविधान लागू होकर मनुवादि उसका शपथ लेकर अबतक देश के लोकतंत्र के चारो प्रमुख स्तंभो में कब्जा जमाकर देश को गुलाम किये हुए है, तो क्या संविधान ही देश गुलाम करने के लिए शपथ दिलाता आ रहा है मनुवादियों को या फिर असल में मनुवादि अपने विकृत सोच से इस देश को गुलाम किए हुए हैं, और मनुवादि ही अपने विकृत सोच से हिंदू धर्म में भी कब्जा करके कर्म पर अधारित वर्ण व्यवस्था को जन्म पर अधारित घोषित करके यह झुठ बांटते आ रहे हैं की हिंदू वेद पुराण में यह सब लिखा हुआ है,जबकि मनुवादि न तो हिंदू है, और न ही वह गुलाम बनाकर कर्म के अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य है, और न ही वह हिंदू भगवान है। बल्कि हिंदू मुल रुप से प्राकृति को भगवान मानकर उसकी पूजा करता है, जो कि सत्य विज्ञान प्रमाणित है कि बिना प्रकृति भगवान के इंसान तो क्या किसी भी जीव बल्कि निर्जीव का भी वजुद इस दुनियाँ में नही हो सकती है, यकिन न आए तो बिना हवा पानी अन्न पेड़ पौधा वगैरा के कोई पृथ्वी ही नही बल्कि दुनियाँ अथवा पुरी सृष्टी में कहीं पर भी मौजुद रहकर दिखला दे तो मैं मान जाउँगा की हिंदू धर्म ढोंग पाखंड और अँधविश्वास को मानता है, बल्कि मैं तो यह मानता हूँ कि जो लोग विदेशी मुल के मनुवादियों को असली हिंदू कहते अथवा मानते हैं, वे चाहे जो भी हैं, उनको यह सत्यबुद्धी मौजुद नही है कि असली हिंदू धर्म और असली हिंदू कौन है बल्कि असली हिंदू भगवान कौन है? जिन्हे मैं सत्यबुद्धी दे रहा हूँ कि हिंदू धर्म सत्य को मानता है, और सत्य की पूजा करता है, प्रकृति पत्थर पहाड़ वगैरा को सत्य भगवान का प्रतिक के रुप में पूजा करता है, क्योंकि हिंदू धर्म सत्य प्रमाणित प्राकृति को भगवान मानकर उसकी पूजा करता है न कि उस झुठ की पूजा करता जो कि है ही नही, और जो लोग मनुवादियों के द्वारा बतलाये गए विकृत ढोंग पाखंड अँधविश्वास अप्रकृति ज्ञान को हिंदू वेद पुराणो का ज्ञान मानकर मनुवादियों को हि हिंदू वेद पुराणो का मुल जानकार मानते हैं वे भी दरसल असल में मनुवादियों की तरह ही विकृत बुद्धी ज्ञान लेकर जीवन जी रहे हैं, चाहे क्यों न वे कितने ही उच्च शिक्षा का डिग्री लिये हुए हैं, जिनकी विकृत बुद्धी दरसल मनुवादियों के संक्रमण से उन लोगो को हुई है जो की मनुवादियों के संक्रमण को झेल नही सके और सबसे अधिक पिड़ित हो गए हैं, जिनका पूर्ण इलाज यदि वे जवानी से निचे उम्र तक के हैं तो मुमकिन है, पर यदि उससे उपर का हैं तो अब मुमकिन नही है, क्योंकि वे लाईलाज मरिज हो चूके हैं, जो कि पुरी जीवन मनुवादियों के ही विकृत बुद्धी ज्ञान को ही हिंदू धर्म का मुल ज्ञान मानते हुए जीवन यापन करेंगे, जिनका कुछ नही हो सकता बल्कि उन लोगो को मनुवादियों के संक्रमण से मैं बाहर निकाल सकता हूँ और निकाल रहा हूँ जो कि जवान से कम उम्र के हैं, जिनको मेरे द्वारा बांटे गए सत्यबुद्धी ज्ञान को दवा के रुप में भी लेते रहने से एकदिन उन्हे असली हिंदू और असली हिंदू वेद पुराणो का साक्षात सत्य प्रमाणित ज्ञान और असली हिंदू भगवान पूजा के बारे में सत्य पता चलकर यह पता चल जायेगा कि इस देश को विश्वगुरु आखिर क्यों कहा जाता है, जिस विश्वगुरु का ही ज्ञान सागर से चंद बुंदो का ज्ञान महलो में रहने वाला सिद्धार्थ ने भी वैवाहिक और बाल बचेदार जीवन जिने के बाद महल से बाहर निकलकर उन मुलनिवासियों के बिच जाकर लिया था जो कि असली हिंदू हैं, जो की प्रकृति की पूजा साक्षात सत्य प्रमाणित भगवान के रुप में करते हैं!

गुलामी में देश का प्रधानमंत्री हो या राष्ट्रपति वह गुलाम करने वालो के रिमोर्ट से चलता है! और अभी देश गुलाम ही तो है, जो ...
07/01/2025

गुलामी में देश का प्रधानमंत्री हो या राष्ट्रपति वह गुलाम करने वालो के रिमोर्ट से चलता है! और अभी देश गुलाम ही तो है, जो कि लोकसभा पूर्व उपाध्यक्ष श्री कड़िया मुंडा की रिपोर्ट की झांकि देख पढ़कर कोई भी बुद्धीवाला इंसान यह जान सकता है कि इस कृषि प्रधान देश को 1947 ई. में विदेशी मुल के कबिलई गोरो से आजादी मिलने के बाद फिर से विदेशी मुल के ही उन मनुवादियों का शासन कायम हो गयता है जो कि गोरो के ही शासन में इस कृषि प्रधान देश के मुलनिवासियों के बारे में यह कहते रहे हैं कि ये लोग संसद में जाकर क्या हल चलायेंगे? जो विदेशी मुल का मनुवादि वेदकाल में ही खुदको जन्म से उच्च ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और इस देश के मुलनिवासियों को निच शूद्र घोषित करके गुलाम रामराज लाकर शंभुक प्रजा बनाकर वेद बोलने पर जीभ काटने और वेद सुनने पर कान में गर्म पिघला लोहा शीसा डालने बल्कि गुलाम शंभुक द्वारा वेद ज्ञान लेने पर खुदको भगवान मानकर अपनी पूजा कराने वाले राजा राम ने तो उसकी हत्या तक कर दिया था और गुरुघंटाल द्रोणाचार्य ने अँगुलीमार डाकू से भी बड़ा पाप कुकर्म गुलाम बनाने की विकृत मांशिकता से एकलव्य का अँगुठा कटवा दिया था, जिस तरह के गुलाम बनाना भेदभाव शोषण अत्याचार करने जैसे पाप कुकर्म करके गुलाम पांडवराज लाकर पांडव हिमालय से कुदकर आत्महत्या करके नर्क गये और राज राम गुलाम रामराज लाकर सरयू नदी में डुबकर आत्महत्या करके नर्क गया, बल्कि गोरो से आजादी मिलने के बाद फिर से मनुवादि अपडेट गुलाम रामराज लाकर नर्क ही जा रहे है, और जाते रहेंगे जबतक कि उनके अंदर गुलाम करने उच्च निच भेदभाव करने जैसे पाप कुकर्म करने की विकृत मांशिकता किसी लाईलाज बिमारी की तरह कायम रहेगी, जिस बिमारी की वजह से ही वे आजाद भारत का संविधान का शपथ लेकर भी लोकतंत्र के चारो प्रमुख स्तंभो में कब्जा करके किस तरह की गुलामी कायम किये हुए हैं इसकी झांकी निचे मौजुद है!

(1) दिल्ली में कुल जज 27 जिसमे
ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय-27 जज ,ओबीसी - 0 जज, SC- 0 जज , ST- 0 जज )
(2) पटना में कुल जज 32
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 32 जज , ओबीसी -0 जज , SC- 0 जज , ST- 0 जज )
(3) इलाहाबाद में कुल जज 49 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 47 जज ,ओबीसी - 1 जज, SC- 1 जज ,ST- 0 जज )
(4) आंध्रप्रदेश में कुल जज 31 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 25 जज , ओबीसी - 4 जज, SC- 0 जज ,ST- 2 जज )
(5) गुवाहाटी में कुल जज 15 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 12 जज , ओबीसी - 1 जज, SC- 0 जज ,ST- 2 जज )
(6) गुजरात में कुल जज 33 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 30 जज , ओबीसी - 2 जज, SC- 1 जज , ST- 0 जज )
(7) केरल में कुल जज 24
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 13 जज ,ओबीसी - 9 जज, SC- 2 जज ,ST- 0 जज )
(8) चेन्नई में कुल जज 36 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 17 जज , ओबीसी -16 जज, SC- 3 जज ,ST- 0 जज )
(9) जम्मू कश्मीर में कुल जज 12 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय- 11 जज , ओबीसी - जज, SC-0 जज , ST- 1 जज )
(10) कर्णाटक में कुल जज 34
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय जज 32 , ओबीसी - 0 जज, SC- 2 जज ,ST- 0 जज )
(11) उड़िसा में कुल -13 जज जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 12 जज , ओबीसी - 0 जज, SC- 1 जज ,ST- 0 जज )
(12) पंजाब-हरियाणा में कुल 26 जज
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय - 24 जज ,ओबीसी - 0 जज, SC- 2 जज ,ST- 0 जज )
(13) कलकत्ता में कुल जज 37 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 37 जज , ओबीसी -0 जज, SC- 0 जज ,ST- 0 जज )
(14) हिमांचल प्रदेश में कुल जज 6
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 6 जज ,ओबीसी - 0 जज, SC- 0 जज ,ST- 0 जज )
(15) राजस्थान में कुल जज 24
जिसमे से ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 24 जज ,ओबीसी - 0 जज, SC- 0 जज ,ST- 0 जज )
(16)मध्यप्रदेश में कुल जज 30 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 30 जज ,ओबीसी - 0 जज, SC- 0 जज ,ST- 0 जज )
(17) सिक्किम में कुल जज 2
जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 2 जज ,
ओबीसी - 0 जज ,
SC- 0 जज ,ST- 0 जज )
(18) मुंबई में कुल जज 50 जिसमे ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 45 जज , अोबीसी - 3 जज, SC- 2 जज , ST- 0 जज )
कुल मिलाकर 481 जज में से ब्राह्मण वैश्य क्षत्रिय 426 जज , जबकि OBC के 35 जज ,SC के 15 जज ,ST के 5 जज शामिल हैं!

पैसे को सबसे पावरफुल मानकर उसके पिच्छे भागने वालो का हाल ऐसा ही होनेवाला है, जो संस्कार कृषि सभ्यता संस्कृति की नही बल्क...
06/01/2025

पैसे को सबसे पावरफुल मानकर उसके पिच्छे भागने वालो का हाल ऐसा ही होनेवाला है, जो संस्कार कृषि सभ्यता संस्कृति की नही बल्कि उन पश्चिम के कबिलई सभ्यता संस्कृति का है जो कि गुलाम बनाने वाली जानवरपन सोच है

SN Khandelwal: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का शनिवार की सुबह निधन हो गया। 81 साल की उम्.....

गरिबी भुखमरी दुर करने की काबलियत विदेशी मुल के कबिलई लुटेरो में होती नही, सिर्फ शौक चड़ा हुआ रहता है अमिर बनने और शासक ब...
04/01/2025

गरिबी भुखमरी दुर करने की काबलियत विदेशी मुल के कबिलई लुटेरो में होती नही, सिर्फ शौक चड़ा हुआ रहता है अमिर बनने और शासक बनने की

जिन गुलाम करने वाले कबिलई लुटेरो के औलादो को यदि लगता है कि यह गुलाम मुलनिवासि ऐसे ही सिर्फ बकवास कर रहा है, तो वे मेरी इस चुनौती को स्वीकार करें, खासकर यदि उनमे काबलियत है अपने पूर्वजो और खुदके भी द्वारा भेदभाव करने और गुलाम करने जैसे पाप कुकर्म को स्वीकार करने की, वे ही मेरी चुनौती स्वीकार करके महिनो या सालो नही बल्कि सिर्फ चंद सप्ताह के लिए इस देश की सत्ता इस देश के इस गुलाम मुलनिवासि के हाथो शौंप दे तो वे यदि बुढ़े भी होंगे तो उनकी बुढ़ापा में उन्हे सत्यबुद्धी देते हुए विश्वगुरु की असली काबलियत असली शासक बनने और असली अमिर बनना क्या होता है सोने की चिड़ियाँ को अपडेट करके गरिबी भुखमरी दुर करके बतला दुँगा चंद हफ्तो में ही इस देश की गरिबी भुखमरी दुर करके, क्योंकि मुझे पता है यह देश गरिब नही है, बल्कि इस देश को विदेशी मुल के कबिलई लुटेरो द्वारा गुलाम करके गरिब बनाया गया है! जाहिर है कर्ज लेकर घी पिनेवाला मोदी सरकार नही बल्कि मनुवादि सरकार है जो कि गोरो से आजादी मिलने के बाद फिर से अपना गुलाम रामराज कायम कर लिया है! 2023 ई. का रिपोर्ट अनुसार निचे मौजुद टॉप 10 देशों पर सबसे ज्‍यादा कर्ज (आंकड़े बिलियन डॉलर में) है, जिन सारे देशो के साथ साथ जिन देशो में भी गुलाम करने वाले कबिलई लुटेरो का आतंक कभी न कभी हुआ है, जिसकी वजह से वहां पर गरिबी भुखमरी कायम हुई है, वहाँ पर मौजुद विदेशी मुल के मुठीभर गुलाम करने वाले बाहर से आए कबिलई लुटेरे खुल जा शिमशिम करते हुए चोरी लुटपाट से सबसे अधिक अमिर बनकर उस देश के मुलनिवासियों और बहुत से विदेशी मुल के लोगो के भी हक अधिकारो को किसी मच्छड़ खटमल और जू की तरह चुसकर देश को कर्ज में डुबोकर घी पी रहे हैं, जैसे की कभी विदेशी मुल के कबिलई लुटेरे गोरे और विदेशी मुल के मुस्लिम शासक इस देश को गुलाम बनाकर इस सोने की चिड़ियाँ कहलाने वाले कृषि प्रधान देश को लुटपाट करके जज बनकर भी और कुरान बाईबल पढ़कर भी चर्च और मस्जिद जाकर हली लुईया हली लुईया और अल्ला हू अकबर कहकर घी पीकर सबसे अधिक अमिर बने हुए थे, उसी तरह उनसे आजादी मिलने के बाद फिर से यह देश विदेशी मुल के ही मनुवादि कबिलई लुटेरे से गुलाम होकर आज दुनियाँ का सबसे अधिक गरिबी भुखमरी देशो की लिस्ट में आकर जाहिर सी बात है इस देश को फिर से गुलाम करने वाले मनुवादि भारत माता गाय माता कहकर पिंक क्रांती लाकर घी पी रहे हैं! जिन मनुवादियों का इस देश के लोकतंत्र के चारो प्रमुख स्तंभो में कब्जा तो है ही पर इस देश का हिंदू धर्म में भी कब्जा होकर ये विदेशी मुल के मनुवादि खुदको जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और इस देश के मुलनिवासियों को शूद्र घोषित करके सैकड़ो हजारो सालो से भेदभाव अन्याय अत्याचार करते आ रहे हैं! जिनसे पुरी आजादी मिलना बाकी है, गोरो से आजादी तो सिर्फ झांकी है, उनसे भी अधिक समय तक गुलाम करने वाले मनुवादियों से पुरी आजादी बाकी है, जो की जाहिर है चुनाव से तो नही मिलने वाली है!
1. अमेर‍िका : 33,229
2. चीन : 14,692
3. जापान : 10,797
4. UK : 3,469
5. फ्रांस: 3,354
6. इटली : 3,141
7. भारत: 3,057
8. जर्मनी : 2,919
9. कनाडा : 2,253
10. ब्राजील : 1,873

भारत में बच्चा पैदा होते ही उस पर ₹42,000 का कर्ज हो जाता है👇🏼👇🏼Description:- The Official Youtube Account of India's Most Vibrant Political Movement - T...

गुलाम करने वाले कबिलई लुटेरो को सबसे उच्च विद्वान बलवान धनवान कहना मानो अली बाबा चालीस चोर कहानी में चालीस चोरो को ज्ञान...
12/12/2024

गुलाम करने वाले कबिलई लुटेरो को सबसे उच्च विद्वान बलवान धनवान कहना मानो अली बाबा चालीस चोर कहानी में चालीस चोरो को ज्ञान विज्ञान और टेक्नोलॉजी में सबसे तरक्की करने वाले सबसे विकसित लोग कहना है।जिन्हे की यदि पुछा जाय कि तुम अपना खुदका ऐसा घर दिखाओ जहाँ के तुम मुलनिवासि हो और जहाँ पर तुम्हारे खुदके मुल धन दौलत मौजुद है?तो वे खुल जा शिमशिम कहकर अपनी काली गुफा को खोलकर अपना घर भी दिखाते हैं,और जमा किया हुआ धन दौलत भी दिखाते हैं, जो की दोनो ही मुलता विवादित है कि वह उनका मुल रुप से अपना है कि नही है? जिस तरह के लोगो को सबसे तरक्की करने वाला सबसे विकसित इंसान कहना खुदको सबसे मुर्ख बनाना है। खासकर उन लोगो के द्वारा गुलाम करने वाले लोगो के बारे में ऐसा कहना मुर्खता है,जिनके पूर्वजो ने हजारो साल पहले ही एक जगह विशाल सागर की तरह स्थिर होकर पुरी दुनियाँ पर नजर रखकर सिंधु घाटी कृषि सभ्यता, माया सभ्यता,चीन की सभ्यता,मिस्त्र की सभ्यता,बेबिलोन की सभ्यता,फारस की सभ्यता जैसे आधुनिक विकसित सभ्यता विकसित जीवनशैली की सुरूवात कबका कर चूके थे, जब ये गुलाम करने और उच्च निच गोरा काला भेदभाव करने वाले कबिलई लुटेरे लोग मुलता घुमकड़ लंगटा लुचा जंगली जीवन व्यक्तीत कर रहे थे ।जिस समय विकसित कृषि सभ्यता संस्कृति के लोग एक जगह स्थिर होकर सुख शांती समृद्धी जीवन व्यक्तीत कर रहे थे। जिनके सुख शांती में कथित ये आज के नकली उच्च विद्वान बलवान धनवान मुलता सबसे अविकसित इंसान मुलता शिकारी जानवरो की तरह आकर उत्पात मचाते हुए दुनियाँ का सबसे बड़ा पाप कुकर्म करना सुरु किया और फिर धिरे धिरे स्थिर विकसित सभ्यता संस्कृति को विध्वंस करते हुए घर के भेदियों की सहायता और छल कपट से शासन व्यवस्था में कब्जा जमाया।जिन कब्जाधारियों को वेद पुराणो और इतिहास में मुलता गुलाम करने भेदभाव करने वाले कबिलई लुटेरो के रुप में ही जाना जाता है।जो लोग गुलाम करने के बाद दुसरे की धन संपदाओं को लुटकर घुमकड़ भुखड़ लंगटा लुचा से सबसे उच्चा बनकर खुदको सबसे विकसित मानव बतलाते आ रहे हैं।जिनकी झुठी शान की उधारी जीवनशैली को सबसे तरक्कीवाला उच्च विद्वान बलवान धनवान विकसित जीवन सोचकर उनके जैसा ज्ञान विज्ञान की बाते करना वैसा भी है,जैसा कि बुद्ध को बुद्धी ज्ञान आने से पहले महलो में भारी बस्ता ढोना है।जिस महल के अंदर उसे ज्ञान में भी भेदभाव करने वाले गुरुघंटालो से भारी बस्ता उच्च डिग्री ज्ञान प्राप्त हुई थी,जिस भारी बस्ता को बुद्ध ने फैंककर वह झुठी शान की महल से बाहर निकलकर असली विश्वगुरु से असली ज्ञान विज्ञान तरक्की विकास का बुद्धी ज्ञान प्राप्त किया था। जिसने उन मुलनिवासि लोगो के बिच जाकर असली विकसित बुद्धी ज्ञान को हासिल किया था, जिन्होने की इससे पहले मैने बतलाया हजारो साल पहले ही विकसित कृषि सभ्यता संस्कृति का विकास किया है।जिसे असली ज्ञान विज्ञान तरक्की कहा जाता है। न कि गुलाम बनाकर लुटपाट विकास करते हुए खुदको अमिर बनने वाले भष्मासुरो की ज्ञान विज्ञान तरक्की को असली तरक्की और विकास कहा जाता है, जो की असल में मानो वरदान पाकर हासिल होने के बाद उसका गलत उपयोग करके वरदान देने वालो को ही भष्म करने की कोशिष करता रहता है।पर साथ साथ खुदको भी उसी वरदान से भष्म करने में लगा रहता है।जैसे की रोम यूनान इस कृषि प्रधान देश को समाप्त करने की कोशिष करते हुए खुदको ही खत्म कर लिए। जिस तरह ही अन्य गुलाम करने वाले कबिलई लुटेरे भी वरदान के रुप में जो ज्ञान विज्ञान तरक्की हासिल किये हैं,उसका गलत उपयोग करके दुसरो को भारी नुकसान पहूँचाते हुए खुदको समाप्त करने में लगे हुए हैं।जिनकी तरक्की और विकास को आदर्श मानकर खुद भी ऐसा तरक्की और विकसित इंसान बनने की सोचना और खुद भी भष्मासुर बनना सबसे मुर्ख इंसान बनना है।बजाय इसके की इंसानियत मानवता कायम करने वाला वह इंसान बनो जो की इस पृथ्वी का सबसे असली विकसित इंसान है,जिसके अंदर उन पूर्वजो का dna मौजुद है,जो कि हजारो साल पहले भी इंसानियत कायम करके असल का सुख शांती समृद्धी जीवन जी रहे थे।जिन्होने की आजतक किसी को गुलाम नही बनाया है।पर वे असल का सबसे विद्वान बलवान धनवान सभ्यता संस्कृति होने के बावजुद भी लंगटा लुचा घुमकड़ कबिलई लुटेरो से गुलाम जरुर हुए हैं।जिसके बाद ही धिरे धिरे असली विकसित सभ्यता संस्कृति में गरिबी भुखमरी और विकृत बुद्धी ज्ञान का संक्रमण होकर पहलीबार ढोंग पाखंड और अँधविश्वास की सुरुवात होते हुए कथित बड़े बड़े मूर्ति, मंदिर, मस्जिद चर्च, बनने की भी सुरुवात होकर मंदिर मस्जिद चर्च बनने की होड़ लगते हुए धर्म जाति के नाम से दंगे फसाद भी सुरु हुए, जो की आगे बड़ते बड़ते इतना गंदा रुप धारना कर लिया कि कई विदेशी मुल के कबिलई लुटेरो द्वारा यह कृषि प्रधान अखंड देश बारी बारी से गुलाम होने के बाद वर्तमान के समय में गुलाम करने वालो द्वारा फूट डालो और राज करो की लुटेरी निति द्वारा इस देश को धर्म के नाम से कई टुकड़ो में बंटकर सोने की चिड़ियां और विश्वगुरु कहलाने वाले कृषि प्रधान इस देश में अब गरिबी भुखमरी अशिक्षा ढोंग पाखंड अँधविश्वास का भरमार हो गया है।जिस देश को ये गुलाम करने वाले विदेशी मुल के कबिलई लुटेरो ने सैकड़ो हजारो सालो तक गुलाम करके लंगटा लुचा से खुदको सबसे उच्च विद्वान बलवान धनवान कहते हुए दरसल ये परजिवी मच्छड़ खटमल जू की तरह चुस चुसकर जीवन यापन करते हुए इस देश और इस देश के मुलनिवासियों को गरिबी भुखमरी अशिक्षा ढोंग पाखंड अँधविश्वास दिए हैं।जो देने वाले विदेशी मुल के कबिलई से पुरी आजादी मिलने के बाद ही आगे इस देश ही नही बल्कि पुरी दुनियाँ का इतिहास अपडेट होकर असली सत्य का पता चल जाएगा कि कौन असल ज्ञान विज्ञान तरक्की विकास करने वाला इंसान है,और कौन अब भी मानो पढ़ा लिखा जाहिल और भष्मासुर बना हुआ भ्रष्ट विकृत इंसान है। जिन जाहिलो और भष्मासुरो की आबादी कम होती है, पर वे खुदको ऐसा समझते हैं,जैसे यह देश गुलाम होने के बाद उन्ही का राज इस पृथ्वी पर हमेसा चलने वाली है।

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