17/06/2025
अबकी बरस जो आए बादल
प्रेम गीत ही गाए बादल
विरह, तपन उच्छवास बदन में
भय, आशंका, विचलित मन में
कोई खबर तो लाए कही से
मेघदूत सा आए बादल
अबकी बरस जो आए बादल
बाट जोहती, हियरा तरसे
चित्त , चिंता, मन, आंखें बरसे
मांग सिंदूर भरा रहने दे
चीर सुहाग ले आए बादल
अबकी बरस जो आए बादल
आग की लपटें, द्वेष जगत में
डर की छाया गत आगत में
रात उनींदी, जान हलक में
शांतिदूत बन जाए बादल
अबकी बरस जो आए बादल
मिथिलेश
17 जून 2025