01/08/2026
हनुमान के होते प्रभु
(मुखड़ा)
हनुमान के होते प्रभु, ये कैसे सोच लिया,
यमराज हमारे लक्ष्मण का प्राण ले जाएंगे क्या?
जब तक बजरंगी खड़े हैं, संकट पास न आएगा,
रामभक्त की शक्ति के आगे, काल भी सिर झुकाएगा।
(अंतरा 1)
राम का नाम हृदय में लेकर, वीर चला रणधाम,
भक्ति जिसकी ढाल बनी है, साथ खड़े हैं श्रीराम।
गदा उठाकर गरज पड़े जब, काँपे तीनों लोक,
धर्म की रक्षा करने वाले, मिटा दें हर शोक।
(मुखड़ा)
हनुमान के होते प्रभु, ये कैसे सोच लिया,
यमराज हमारे लक्ष्मण का प्राण ले जाएंगे क्या?
जब तक बजरंगी खड़े हैं, संकट पास न आएगा,
रामभक्त की शक्ति के आगे, काल भी सिर झुकाएगा।
(अंतरा 2)
संकटमोचन नाम तुम्हारा, जग सारा गुण गाए,
जो भी सच्चे मन से पुकारे, दौड़े-दौड़े आए।
रामदूत की अटल भक्ति, सबसे ऊँची शान,
जय-जय पवनसुत हनुमान, जय-जय वीर हनुमान।
(समापन)
जय श्रीराम की गूँजे वाणी, जय हनुमान महान,
भक्ति, शक्ति और सेवा का तुम ही हो सम्मान।
जय बजरंगबली! जय श्रीराम!