11/09/2026
आज ही के दिन शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से विश्वपटल पर भारत की सनातन आध्यात्मिक परंपरा और समृद्ध संस्कृति का गौरवपूर्ण परिचय कराया था।
शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद जी द्वारा दिया गया विचारोत्तेजक संबोधन भारतीय उपनिषदों की उस अद्वैत दृष्टि का साक्षात प्रकटीकरण था, जो समस्त मानवता को एक ही चेतना के सूत्र में पिरोती है। औपनिवेशिक मानसिकता के सामने दीन-हीन समझे जाने वाले भारत को उन्होंने एक क्षण में विश्वगुरु के आध्यात्मिक सिंहासन पर आसीन कर दिया। उस उद्बोधन ने सिद्ध किया कि भारत का वैभव उसके बाह्य ऐश्वर्य में नहीं, बल्कि उसके अमर दार्शनिक चिंतन में निहित है।
आज जब विश्व अनेक प्रकार के वैचारिक संघर्षों और ध्रुवीकरण से जूझ रहा है, स्वामी जी का यह संदेश हमारे लिए प्रकाश स्तंभ है। आइए, हम उनके विचारों को केवल स्मरण न करें, बल्कि अपने आचरण में उतारें और एक सशक्त, संवेदनशील व एकजुट समाज के निर्माण का संकल्प लें।