21/07/2026
Mk's कविता ✍️
आज हर कोई
किसी ना किसी को
छल रहा है...
किसी का भूखा रहना
तो किसी का
चुप रहना खल रहा है...
समस्या छात्र की है
समस्या समाज की है
समस्या काम की है
समस्या बेरोजगारी की है
समस्या सत्ता की है
समस्या जनसमुदाय की है
समस्या परिवार की है
मुझे तो लगता है समस्या
ये सब है ही नहीं
समस्या सिर्फ
वर्चस्व की है
कुर्सी की है
पावर में रहने की है
अपनी बात मनवाने की है
ना किसी की सुनने की
सिर्फ सुनाने की है...
संभाल लो अपने आप को
अब भी व़क्त है
जो छल रहा है
सबको खल रहा है
सोंचो समझो और देखो
सब अपना ही है
जो अब बिखर रहा है...
- मुकेश कुमार
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