17/07/2025
आसमान से कुछ और दिखा
जमीन पर कुछ और ही था
दोनों की बीच की दूरी
सत्य साबित हो रहा था
जमीन पर कंकर दिखे पत्थर दिखे
चट्टानों से टकरा रही थी नदियां
आसमान से हरियाली दिखी खुशहाली दिखी
चांदी सी चमक रही थी गलियां
आसमान से पेड़ दिखे, पहाड़ दिखा
विचरण में लीन थी चिड़ियां
जमी पर बाढ़ दिखा, सुखाड़ दिखा
इमारतों में सजी थी टहनियां
आमसान से विकास की झलक दिखी
सुंदर नजारा दिखा
जमीन पर विकास गायब था
हालात बेचारा दिखा।
छोटा सा कलमकार- रविशंकर चौधरी