22/06/2026
वो जो हिन्द का चमकता सितारा हैं, जो देश को चलाने की काबिलियत रखते हैं, जिनकी आंखों में सैकड़ों सपने हर पल पनप रहे हैं। उनके नाम हर माता पिता ,एक ऐसी सूची में देखना चाहते हैं जिसके बाद संघर्ष का अंत हो और जीवन की नई शुरुवात लेकिन ये दुर्भाग्य है इस देश का कि हर दूसरे दिन यहां एक सूची प्रकाशित होती है। सुंदर मासूम चमकती आंखों वाले युवा बच्चों की लेकिन उनके नाम के आगे लगा है स्वर्गीय..!
क्या ये उम्र थी उनकी चले जाने की। क्या इस देश का आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई स्कूल कॉलेज कोचिंग में लुटाकर अपने बच्चों को इसी सूची में प्रकाशित करने के लिए पाल रहा है। क्या इन बच्चों का मर जाना इतनी सामान्य सी बात है कि अब लोग ऐसी खबर पढ़कर औपचारिकता से बस अखबार का पन्ना पलट देते हैं।
हर नए दिन एक नई सूची प्रकाशित होती है कोई परीक्षा के स्ट्रेस में चला गया किसी को पेपर लीक का नाकाम सिस्टम खा गया किसी को प्रशासन की लापरवाही खा गई कोई अस्पताल के वार्ड में जल कर मर गया तो कोई किताब पढ़ते हुए स्वाहा हो गया।
कितना सरल हो गया ऐसी खबरों को पढ़कर अगली खबर का इंतजार करना, हम भीतर से कितने अमानव हो गए इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। किसी के जीवन भर की पूंजी थे ये बच्चे, किसी के घर का चिराग़ ,किसी मां के जीने की आस किसी पिता की आंखों का तारा... क्या कोई भरपाई है इस लॉस की..?
आप महंगी बिल्डिंग में घर लेकर रह रहे हैं फिर भी आग लगी तो करोड़ो का घर ही कब्र बन जाएगा, न महंगे होटल सुरक्षित हैं न बहुमंजिला इमारत न स्कूल न कॉलेज न दुकान... आखिर जिम्मेदारी किसकी है..? कोई तो होगा जो जिम्मेदारी लेगा, क्या सरकारें इतनी नादान है कि आपदा नाम की भी चीज होती है उसे भुला बैठीं है। सभी आगजनी की घटनाओं में एक बात कॉमन है कही भी आग बुझाने की गाड़ी समय से नहीं पहुंची। जहां पहुंची तो आवश्यक उपकरण ही नहीं थे।
ये कैसा विकास कर दिया हमने इस देश का..? कोई गड्ढे में गिरकर मदद मांगते हुए मर जाता है कोई आग में फंसकर मर जाता है और प्रशासन बस यही कह पाता है उनके पास आपदा प्रबंधन के लिए इंतजाम नहीं है।
प्रधान मंत्री राहत कोष के लिए इस देश ने भर भर के दान दिया था। कितने और बच्चों की मौत के बाद राहत कार्यक्रम शुरू होगा या सरकार मौत के बाद बस मुआवजा बांटती रहेगी।।
अगले चुनाव में जब अपनी उपलब्धियां गिनाने ये सरकार आए तो आप ये मृत्यु सूची उनके सामने रखकर सवाल जरूर करियेगा। इस सूची को वो अपनी उपलब्धि मानते हैं या नहीं..!
सवाल पूछने की जरूरत है आखिर क्यों... और कब तक.. हमारे बच्चों के जीवन का मोल नहीं समझा जाएगा..
अब तो इस देश और सिस्टम से कोई उम्मीद ही खत्म होती जा रही है..!