19/01/2023
में आपको एक कहानी सुनाता हूँ।जिसका अर्थ आप स्वयं समझ सकते है।
कही एक गांव में भागवत कथा का आयोजन हो रहा था।तो वहाँ पर पड़ोस के गांव की एक बुजुर्ग महिला उस कथा को श्रवण करने हेतु रोज आया करती थी।।उसी कथा में एक बार कथावाचक ने कहा जो व्यक्ति ईश्वर से अटूट प्रेम करता है।वो भवसागर से पार हो जाता है।।ये बात उस महिला के दिमाग मे बैठ गयी।
जब कथा समापन दिवस हुआ तो उस महिला ने उन पंडित जी जो कथा वाचक थे उनको अपने घर भोजन की दावत दी।।
उस महिला के निमंत्रण पर बो कथावाचक पंडित जी उसके यहाँ भोजन प्राप्त करने हेतु चल दिये।रास्ते मे एक नदी मिली। तो वह बुजुर्ग महिला उस नदी के ऊपर चल पड़ी कथावाचक ने जब यह देखा तो वो आश्चर्य चकित हुए और उन्होंने कहा की मैं इस नदी में कैसे निकल पाऊंगा क्योंकि इसमें तो बहुत पानी है और बहुत गहरी है तो उस महिला ने कहा शास्त्री जी आपने ही कहा था कि आप हृदय मन से प्रभु को अगर याद करते हो तो आप भवसागर से भी पार हो जाओगे।मेने वही किया जो आपने मुझे ज्ञान दिया था।
मेरे कहने का अर्थ सिर्फ ये है कि ये जो कथा वाचक है जो आपको धर्म संस्कृति का ज्ञान कराते है।।जो गली गली ईश्वर का प्रचार कर धर्म के प्रति जागरूक करते है।और इसी क्रम कुछ ऐसे चमत्कार भी हो जाते है।।जिसका आम जनमानस जो इस अंधकार मई दुनिया से निकलकर प्रभु के चरणों मे लीन होकर भवसागर से पार होते है।ऐसे रास्ता दिखाने बालो को कभी ढोंगी पाखंडी मत कहो।।इनका कार्य होता है आपको रास्ता दिखाना आप उस रास्ते पर चलकर सफल होते हो तो चमत्कार है।अगर कामयाब न हुए तो भ्रम फैलाने बाले ओर डोंगी बोलते है।।
आज भी धीरेंद्र शास्त्री जैसे व्यक्ति या संत ही हम सभी को धर्म अधर्म हिंदुत्व महाभारत, राम चरित मानस, इत्यादि शास्त्रों ओर ग्रंथों के बारे में बताते है।अन्यथा इन्हें पड़ने का किसको समय है।।
अंत मे जो ब्यक्ति आपको भवसागर पार कराने की प्रेरणा देकर स्वयं उससे वंचित रह जाता है।।उसके त्याग और परिश्रम को कभी गाली नही दी जाती है।।
अगर किसी को मेरी बात को गलत कहने की छमता हो तो कृपया इस पोस्ट पर अबश्य अपने शब्दों को प्रकट करने की कृपा करें।आपको भी तर्क द्वारा संतुष्ट किया जाएगा।।
धन्यवाद
शुभः रात्रि।।।