Hindi Love Story

Hindi Love Story हिन्दी कहानियाँ -- शिक्षा, समस्याएं और ? Hindi Love Story �

22/09/2024

------- मां -------
*आज की कहानी*

*एक सुन्दर रोचक कथा*
गांव की एक सुंदर नवयुवती रीमा, अपने तीन साल के बच्चे को चिड़ियाघर घुमा रही थी। वहीं पांच-सात कॉलेज के लड़के उसे बार-बार देखते हुए आपस में कुछ बातें कर रहे थे। वे उस खूबसूरत, अकेली देहाती युवती के पीछे हो लिए। रीमा अपने बच्चे को कभी गोद में तो कभी उंगली पकड़े बारी-बारी से जानवरों को दिखा रही थी। पीछे लगे आवारा लड़कों से बिल्कुल बेखबर...
"चलती है क्या नौ से बारह" फिल्मी गाने गाते हुए वे उसे कट मारकर अट्टहास करते शआगे निकल गए। रीमा ने उन पर ध्यान नहीं दिया। वह हिरन के बाड़े के पास अपने बच्चे को उन्हें दिखा रही थी। बच्चा चहकता हुआ उन्हें देख रहा था। आवारा लड़के उस युवती को घूर रहे थे। वे बगल में ही शेर के बाड़े के पास से उसे देख जोर से फब्तियां कस रहे थे।

उनमें से एक लड़का पूरे जोश में था। बाड़े के ऊपर लगे ग्रिल पर बैठ भद्दे गाने गा रहा था। रीमा बच्चे को लिए शेर को दिखाने बढ़ चली थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे उन लड़कों से तनिक भी भय नहीं या वह उन्हें अनदेखा-अनसुना कर रही है। युवक अतिउत्साहित हो उठा। सभी ठहाके लगा रहे थे। रीमा बाड़े के पास पहुंच चुकी थी। तभी बाड़े के ऊपर चढ़ा लड़का लड़खड़ाते हुए बाड़े के अंदर गिर पड़ा। लोगों के होश फाख्ता हो गए।बाड़े से दूर बैठा शेर उठ चुका था। उसने गुर्राते हुए कदम धीरे-धीरे लड़के की तरफ बढ़ा दिया। उसके दोस्त असहाय होकर खड़े थे और सिर्फ चिल्ला रहे थे। भागता हुआ एक गार्ड आकर शेर को आवाज देकर जाने को कह रहा था। एक मिनट के भीतर अफरा-तफरी मच चुकी थी। शेर को आता देख गिरा हुआ लड़का डर से कांप रहा था। उसके जोश के साथ शायद होश भी ठंडे पड़ चुके थे।
"माँ... माँ... बचाओ... बचाओ" की आवाज लगातार तेज हो रही थी और शेर की चाल भी।
तभी उस देहाती युवती, रीमा, ने अपने बदन से साढ़े पांच मीटर लंबी साड़ी उतारकर बाड़े में लटका दिया। बाड़े में गिरे लड़के ने तुरंत उस साड़ी का सिरा मजबूती से पकड़ लिया। फिर लोगों की मदद से उसे निकाल लिया गया। गार्ड युवक को संभालता हुआ बोल पड़ा, "पहले तुम्हारी माँ ने जन्म दिया था, आज इस युवती ने तुम्हें दुबारा जन्म दिया है।"
सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी वह अर्धनग्न युवती, अब उन लड़कों को उनकी माँ नजर आ रही थी।
*अतः, हो सके तो किसी को बेवजह सताओ नहीं। पता नहीं वह कब तुम्हारे लिए मददगार बनकर खड़ा हो जाए। स्त्रियों को हमेशा सम्मान करो।🙏🏻

16/09/2024

-----डाकिया-----
एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।"

आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।"

लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ बहुत जगह जाना है..मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं कर सकता....।"

लड़की की फिर आवाज आई...," डाकिया चाचा , अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए,मैं आ रही हूँ कुछ देर औऱ लगेगा ।

" अब बूढ़े डाकिये ने झल्लाकर कहा,"नहीं,मैं खड़ा हूँ,रजिस्टर्ड चिट्ठी है,किसी का हस्ताक्षर भी चाहिये।"

तकरीबन दस मिनट बाद दरवाजा खुला।
डाकिया इस देरी के लिए ख़ूब झल्लाया हुआ तो था ही,अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन, दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया औऱ उसकी आँखें खुली की खुली रह गई।उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर्र हो गया।

उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या जिसके एक पैर नहीं थे, खड़ी थी।

लडक़ी ने बेहद मासूमियत से डाकिये की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया औऱ कहा...दो मेरी चिट्ठी...।

डाकिया चुपचाप डाक देकर और उसके हस्ताक्षर लेकर वहाँ से चला गया।

वो अपाहिज लड़की अक्सर अपने घर में अकेली ही रहती थी। उसकी माँ इस दुनिया में नहीं थी और पिता कहीं बाहर नौकरी के सिलसिले में आते जाते रहते थे।

उस लड़की की देखभाल के लिए एक कामवाली बाई सुबह शाम उसके साथ घर में रहती थी लेकिन परिस्थितिवश दिन के समय वह अपने घर में बिलकुल अकेली ही रहती थी।
समय निकलता गया।

महीने ,दो महीने में जब कभी उस लड़की के लिए कोई डाक आती, डाकिया एक आवाज देता और जब तक वह लड़की दरवाजे तक न आती तब तक इत्मीनान से डाकिया दरवाजे पर खड़ा रहता।

धीरे धीरे दिनों के बीच मेलजोल औऱ भावनात्मक लगाव बढ़ता गया।
एक दिन उस लड़की ने बहुत ग़ौर से डाकिये को देखा तो उसने पाया कि डाकिये के पैर में जूते नहीं हैं।वह हमेशा नंगे पैर ही डाक देने आता था ।

बरसात का मौसम आया।

फ़िर एक दिन जब डाकिया डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने,जहां गीली मिट्टी में डाकिये के पाँव के निशान बने थे,उन पर काग़ज़ रख कर उन पाँवों का चित्र उतार लिया।
अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाई से उस नाप के जूते मंगवाकर घर में रख लिए ।

जब दीपावली आने वाली थी उससे पहले डाकिये ने मुहल्ले के सब लोगों से त्योहार पर बकसीस चाही ।

लेकिन छोटी लड़की के बारे में उसने सोचा कि बच्ची से क्या उपहार मांगना पर गली में आया हूँ तो उससे मिल ही लूँ।

साथ ही साथ डाकिया ये भी सोंचने लगा कि त्योहार के समय छोटी बच्ची से खाली हाथ मिलना ठीक नहीं रहेगा।बहुत सोच विचार कर उसने लड़की के लिए पाँच रुपए के चॉकलेट ले लिए।

उसके बाद उसने लड़की के घर का दरवाजा खटखटाया।
अंदर से आवाज आई...." कौन?
" मैं हूं गुड़िया...तुम्हारा डाकिया चाचा ".. उत्तर मिला।

लड़की ने आकर दरवाजा खोला तो बूढ़े डाकिये ने उसे चॉकलेट थमा दी औऱ कहा.." ले बेटी अपने ग़रीब चाचा के तरफ़ से "....

लड़की बहुत खुश हो गई औऱ उसने कुछ देर डाकिये को वहीं इंतजार करने के लिए कहा..

उसके बाद उसने अपने घर के एक कमरे से एक बड़ा सा डब्बा लाया औऱ उसे डाकिये के हाथ में देते हुए कहा , " चाचा..मेरी तरफ से दीपावली पर आपको यह भेंट है।

डब्बा देखकर डाकिया बहुत आश्चर्य में पड़ गया।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।
कुछ देर सोचकर उसने कहा," तुम तो मेरे लिए बेटी के समान हो, तुमसे मैं कोई उपहार कैसे ले लूँ बिटिया रानी ?

"लड़की ने उससे आग्रह किया कि " चाचा मेरी इस गिफ्ट के लिए मना मत करना, नहीं तो मैं उदास हो जाऊंगी " ।

"ठीक है , कहते हुए बूढ़े डाकिये ने पैकेट ले लिया औऱ बड़े प्रेम से लड़की के सिर पर अपना हाथ फेरा मानो उसको आशीर्वाद दे रहा हो ।

बालिका ने कहा, " चाचा इस पैकेट को अपने घर ले जाकर खोलना।
घर जाकर जब उस डाकिये ने पैकेट खोला तो वह आश्चर्यचकित रह गया, क्योंकि उसमें एक जोड़ी जूते थे। उसकी आँखें डबडबा गई ।
डाकिये को यक़ीन नहीं हो रहा था कि एक छोटी सी लड़की उसके लिए इतना फ़िक्रमंद हो सकती है।

अगले दिन डाकिया अपने डाकघर पहुंचा और उसने पोस्टमास्टर से फरियाद की कि उसका तबादला फ़ौरन दूसरे इलाक़े में कर दिया जाए।

पोस्टमास्टर ने जब इसका कारण पूछा, तो डाकिये ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखों और रुंधे गले से कहा, " सर..आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूँगा। उस छोटी अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवों को तो जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊँगा ?"

इतना कहकर डाकिया फूटफूट कर रोने लगा ।

10/01/2024

------ आज की सच्चाई ---------
एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:- बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?
सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!

उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ? क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?

लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में छोड़कर चलती बनी।

थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया। फिर दोनों में झगड़ा हुआ।

एक दूसरे को लानतें भेजी। मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।

जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।

बिकास जी ने अपने जिगरी दोस्त पवन से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?

मनोज जी- फला दुकान में।
बिकास जी - कितनी तनख्वाह देता है मालिक?
मनोज जी-18 हजार।

बिकास जी-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?
मनोज जी- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।

मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद मनोज जी अब अपने काम से बेरूखा हो गया। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।

जिसे मालिक ने रद्द कर दिया। पवन ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।

एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही?

बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।

पहला आदमी बोला- वाह!!

यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है। तो यह ना मिलने का बहाना है

इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।

याद रखिए जुबान से निकले शब्द दूसरे पर बड़ा गहरा असर डाल देते हैं।। बेशक कुछ लोगों की जुबानों से शैतानी बोल निकलते हैं।

हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें बहुत मासूम लगते हैं।

जैसे-
तुमने यह क्यों नहीं खरीदा।
तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है।

तुम इस शख्स के साथ पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो।
तुम उसे कैसे मान सकते हो।
वगैरा वगैरा।।

इस तरह के बेमतलबी फिजूल के सवाल नादानी में या बिना मकसद के हम पूछ बैठते हैं।

जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में नफरत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं।।

आज के दौर में हमारे इर्द-गिर्द, समाज या घरों में जो टेंशन टाइट होती जा रही है, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है।

वो ये नहीं जानते कि नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं।

ऐसी हवा फैलाने वाले हम ना बनें।

18/06/2023

कहानी 100 रुपए की

बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर क्लास चल रही थी, तभी टीचर ने बच्चों से पूछा कि अगर तुम सभी को 100-100 रुपये दिए जाए तो तुम सब क्या क्या खरीदोगे? किसी ने कहा कि मैं वीडियो गेम खरीदुंगा। किसी ने कहा मैं क्रिकेट का बेट खरीदुंगा। किसी ने कहा कि मैं अपने लिए प्यारी सी गुड़िया खरीदुंगी, तो किसी ने कहा मैं बहुत सी चॉकलेट्स खरीदुंगी। एक बच्चा कुछ सोचने में डुबा हुआ था। टीचर ने उससे पुछा कि तुम क्या सोच रहे हो? तुम क्या खरीदोगे? बच्चा बोला कि टीचर जी, मेरी माँ को थोड़ा कम दिखाई देता हैं तो मैं अपनी माँ के लिए एक चश्मा खरीदूंगा। टीचर ने पूछा, तुम्हारी माँ के लिए चश्मा तो तुम्हारे पापा भी खरीद सकते हैं, तुम्हें अपने लिए कुछ नहीं खरीदना? बच्चे ने जो जवाब दिया उससे टीचर का भी गला भर आया। बच्चे ने कहा कि मेरे पापा अब इस दुनिया में नहीं है। मेरी माँ लोगों के कपड़े सिलकर मुझे पढ़ाती हैं और कम दिखाई देने की वजह से वो ठीक से कपड़े नहीं सिल पाती है इसीलिए मैं मेरी माँ को चश्मा देना चाहता हुँ ताकि मैं अच्छे से पढ़ सकूँ, बड़ा आदमी बन सकूँ और माँ को सारे सुख दे सकूँ। टीचर ने कहा, बेटा तेरी सोच ही तेरी कमाई है। ये 100 रूपये मेरे वादे के अनुसार और ये 100 रूपये और उधार दे रहा हूँ। जब कभी कमाओ तो लौटा देना। और मेरी इच्छा है तू इतना बड़ा आदमी बने कि तेरे सर पर हाथ फेरते वक्त मैं धन्य हो जाऊं। 15 वर्ष बाद। बाहर बारिश हो रही है। अंदर क्लास चल रही हैं। अचानक स्कूल के आगे जिला कलेक्टर की बत्ती वालीगाड़ी आकर रूकती है। स्कूल स्टाफ चौकन्ना हो जाता है। स्कूल में सन्नाटा छा जाता है। मगर ये क्या? जिला कलेक्टर एक वृद्ध टीचर के पैरों में गिर जाते है और कहते है " सर मैं दामोदर दास उर्फ़ झंडू। आपके उधार के 100 रूपये लौटाने आया हूँ "पूरा स्कूल स्टॉफ स्तब्ध। वृद्ध टीचर झुके हुए नौजवान कलेक्टर को उठाकर भुजाओं में कस लेता है और रो पड़ता है। हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देंगी l

04/05/2023
01/04/2023

------ क्रोध -----

*एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से। तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"*

🎯पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

🤦🏻‍♂धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

🙋🏻‍♂एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

🤷🏻‍♂उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"

👱‍♀️पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।

*पति उस पत्नी को बाड़े* *में लेकर गए और कीलों के छेद* *दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"*

🌿पत्नी ने कहा,"नहीं जी"

🌿पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"

*सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे ?*🌹🌹

11/01/2023

कौन सा पति खरीदूँ ?

शहर के बाज़ार में एक बड़ी दुकान खुली जिस पर लिखा था यहाँ आप पतियों को ख़रीद सकती है !
देखते ही देखते औरतों का एक हुजूम वहां जमा होने लगा. सभी दुकान में दाख़िल होने के लिए बेचैन थी, लंबी क़तारें लग गयी दुकान के मैन गेट पर लिखा था !
“पति ख़रीदने के लिए निम्न शर्ते लागू” 👇
इस दुकान में कोई भी औरत सिर्फ एक बार ही दाख़िल हो सकती है, आधार कार्ड लाना आवश्यक है !
दुकान की 6 मंज़िले है, और प्रत्येक मंजिल पर पतियों के प्रकार के बारे में लिखा है!
ख़रीदार औरत किसी भी मंजिल से अपना पति चुन सकती है !
लेकिन एक बार ऊपर जाने के बाद दोबारा नीचे नहीं आ सकती, सिवाय बाहर जाने के...
एक खुबसूरत लड़की को दूकान में दाख़िल होने का मौक़ा मिला !
पहली मंजिल के दरवाज़े पर लिखा था - “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है और नेक है."लड़की आगे बढ़ी !
दूसरी मंजिल !
पर लिखा था - “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है और बच्चों को पसंद करते है.”लड़की फिर आगे बढ़ी !
तीसरी मंजिल के दरवाजे पर लिखा था - “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है और खुबसूरत भी है.”यह पढ़कर लड़की कुछ देर के लिए रुक गयी मगर यह सोचकर कि चलो ऊपर की मंजिल पर भी जाकर देखते है, वह आगे बढ़ी !
चौथी मंजिल के दरवाज़े पर लिखा था “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है, खुबसूरत भी है और घर के कामों में मदद भी करते है.”
यह पढ़कर लड़की को चक्कर आने लगे और सोचने लगी “क्या ऐसे पति अब भी इस दुनिया में होते है ?
यहीं से एक पति ख़रीद लेती हूँ...लेकिन दिल ना माना तो एक और मंजिल ऊपर चली गयी !
पांचवीं मंजिल पर लिखा था - “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है , नेक है और खुबसूरत है , घर के कामों में मदद करते है और अपनी बीबियों से प्यार करते है.”
अब इसकी अक़ल जवाब देने लगी वो सोचने लगी इससे बेहतर और भला क्या हो सकता है ? मगर फिर भी उसका दिल नहीं माना और आखरी मंजिल की तरफ क़दम बढाने लगी...
आखरी मंजिल !
के दरवाज़े पर लिखा था !“आप इस मंजिल पर आने वाली 3339 वीं औरत है , इस मंजिल पर कोई भी पति नहीं है , ये मंजिल सिर्फ इसलिए बनाई गयी है ताकि इस बात का सबूत सुप्रीम कोर्ट को दिया जा सके कि महिलाओं को पूर्णत संतुष्ट करना नामुमकिन है !
हमारे स्टोर पर आने का धन्यवाद ! बांयी ओर 8सीढियाँ है जो बाहर की तरफ जाती है !!
🙏🙏 सांराश - आज समाज की सभी कन्याओं और वर पक्ष के माता पिता यह सब कर रहे है एवं 'अच्छा' और "अच्छा" ... के चक्कर में शादी की सही उम्र तो खत्म ही हो रही है !

08/11/2022

--- चित्रकार ---

एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था ।
चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनाई और उसे नगर के चौराहे में लगा दिया और नीचे लिख दिया कि जिस किसी को , जहाँ भी इस में कमी नजर आये वह वहाँ निशान लगा दे ।
जब उसने शाम को तस्वीर देखी उसकी पूरी तस्वीर पर निशानों से ख़राब हो चुकी थी ।
यह देख वह बहुत #दुखी हुआ ।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे वह दुःखी बैठा हुआ था ।
तभी उसका एक मित्र वहाँ से गुजरा उसने उस के दुःखी होने का कारण पूछा तो उसने उसे पूरी घटना बताई ।
उसने कहा एक काम करो कल दूसरी तस्वीर बनाना और उसमें लिखना कि जिस किसी को इस तस्वीर मे जहाँ कहीं भी कोई कमी नजर आये उसे सही कर दे ।
उसने अगले दिन यही किया । शाम को जब उसने अपनी तस्वीर देखी तो उसने देखा की तस्वीर पर किसी ने कुछ नहीं किया । वह संसार की #रीति समझ गया ।
"कमी निकालना , निंदा करना , बुराई करना आसान लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है, This is life........
जब दुनिया यह कहती है कि
‘हार मान लो’
तो आशा धीरे से कान में कहती है कि.,,,,
‘एक बार फिर प्रयास करो’
और यह ठीक भी है..,,,
"जिंदगी आईसक्रीम की तरह है, टेस्ट करो तो भी पिघलती है;.,,,
वेस्ट करो तो भी पिघलती है,,,,,,
इसलिए जिंदगी को टेस्ट करना सीखो,
वेस्ट तो हो ही रही है.,,,,
Life is very beautiful !!!🌹♥️♥️

24/12/2021

एक प्रेरक कथा
~~~~डाकिया चाचा~~~~
एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।"

आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ,ठहरिए ।"

लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ बहुत जगह जाना है , मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं कर सकता ।"

लड़की की फिर आवाज आई...," डाकिया चाचा , अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए,मैं आ रही हूँ कुछ देर औऱ लगेगा ।

" अब बूढ़े डाकिये ने झल्लाकर कहा,"नहीं,मैं खड़ा हूँ,रजिस्टर्ड चिट्ठी है,किसी का हस्ताक्षर भी चाहिये।"

तकरीबन दस मिनट बाद दरवाजा खुला।

डाकिया इस देरी के लिए ख़ूब झल्लाया हुआ तो था ही,अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन, दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया औऱ उसकी आँखें खुली की खुली रह गई।उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर्र हो गया।

उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या जिसके एक पैर नहीं थे, खड़ी थी।

लडक़ी ने बेहद मासूमियत से डाकिये की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया औऱ कहा...दो मेरी चिट्ठी...।

डाकिया चुपचाप डाक देकर और उसके हस्ताक्षर लेकर वहाँ से चला गया।

वो अपाहिज लड़की अक्सर अपने घर में अकेली ही रहती थी। उसकी माँ इस दुनिया में नहीं थी और पिता कहीं बाहर नौकरी के सिलसिले में आते जाते रहते थे।

उस लड़की की देखभाल के लिए एक कामवाली बाई सुबह शाम उसके साथ घर में रहती थी लेकिन परिस्थितिवश दिन के समय वह अपने घर में बिलकुल अकेली ही रहती थी।

समय निकलता गया।

महीने ,दो महीने में जब कभी उस लड़की के लिए कोई डाक आती, डाकिया एक आवाज देता और जब तक वह लड़की दरवाजे तक न आती तब तक इत्मीनान से डाकिया दरवाजे पर खड़ा रहता।

धीरे धीरे दिनों के बीच मेलजोल औऱ भावनात्मक लगाव बढ़ता गया।

एक दिन उस लड़की ने बहुत ग़ौर से डाकिये को देखा तो उसने पाया कि डाकिये के पैर में जूते नहीं हैं।वह हमेशा नंगे पैर ही डाक देने आता था ।

बरसात का मौसम आया।

फ़िर एक दिन जब डाकिया डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने,जहां गीली मिट्टी में डाकिये के पाँव के निशान बने थे,उन पर काग़ज़ रख कर उन पाँवों का चित्र उतार लिया।

अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाई से उस नाप के जूते मंगवाकर घर में रख लिए ।

जब दीपावली आने वाली थी उससे पहले डाकिये ने मुहल्ले के सब लोगों से त्योहार पर बख्शीश चाही ।

लेकिन छोटी लड़की के बारे में उसने सोचा कि बच्ची से क्या उपहार मांगना पर गली में आया हूँ तो उससे मिल ही लूँ।

साथ - ही - साथ डाकिया ये भी सोंचने लगा कि त्योहार के समय छोटी बच्ची से खाली हाथ मिलना ठीक नहीं रहेगा। बहुत सोच विचार कर उसने लड़की के लिए पाँच रुपए के चॉकलेट ले लिए।

उसके बाद उसने लड़की के घर का दरवाजा खटखटाया।

अंदर से आवाज आई...." कौन?

" मैं हूं गुड़िया...तुम्हारा डाकिया चाचा ".. उत्तर मिला।

लड़की ने आकर दरवाजा खोला तो बूढ़े डाकिये ने उसे चॉकलेट थमा दी औऱ कहा.." ले बेटी अपने ग़रीब चाचा के तरफ़ से "।

लड़की बहुत खुश हो गई औऱ उसने कुछ देर डाकिये को वहीं इंतजार करने के लिए कहा..

उसके बाद उसने अपने घर के एक कमरे से एक बड़ा सा डब्बा लाया औऱ उसे डाकिये के हाथ में देते हुए कहा , " चाचा..मेरी तरफ से दीपावली पर आपको यह भेंट है।

डब्बा देखकर डाकिया बहुत आश्चर्य में पड़ गया।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।

कुछ देर सोचकर उसने कहा," तुम तो मेरे लिए बेटी के समान हो, तुमसे मैं कोई उपहार कैसे ले लूँ बिटिया रानी ?

"लड़की ने उससे आग्रह किया कि " चाचा मेरी इस गिफ्ट के लिए मना मत करना, नहीं तो मैं उदास हो जाऊंगी " ।

"ठीक है , कहते हुए बूढ़े डाकिये ने पैकेट ले लिया औऱ बड़े प्रेम से लड़की के सिर पर अपना हाथ फेरा मानो उसको आशीर्वाद दे रहा हो ।

बालिका ने कहा, " चाचा इस पैकेट को अपने घर ले जाकर खोलना।

घर जाकर जब उस डाकिये ने पैकेट खोला तो वह आश्चर्यचकित रह गया, क्योंकि उसमें एक जोड़ी जूते थे। उसकी आँखें डबडबा गई ।

डाकिये को यक़ीन नहीं हो रहा था कि एक छोटी सी लड़की उसके लिए इतना फ़िक्रमंद हो सकती है।

अगले दिन डाकिया अपने डाकघर पहुंचा और उसने पोस्टमास्टर से फरियाद की कि उसका तबादला फ़ौरन दूसरे इलाक़े में कर दिया जाए।

पोस्टमास्टर ने जब इसका कारण पूछा, तो डाकिये ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखों और रुंधे गले से कहा, " सर..आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूँगा। उस छोटी अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवों को तो जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊँगा ?"

इतना कहकर डाकिया फूटफूट कर रोने लगा ।
........

दोस्तों....संवेदनशीलता का यह एक बेहद मामूली सा दृष्टांत मात्र है। दूसरों के दुःख-दर्द को महसूस करना , उसे ख़ुद गंभीरता से अनुभव करना और उसके तकलीफ़ में शरीक होना ...यह एक ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना शायद मनुष्य अधूरा है। ऊपरवाले से प्रार्थना है कि वह हम सबको संवेदनशीलता रूपी बहुमूल्य आभूषण प्रदान करें ताकि हम दूसरों के तकलीफ़ों को कम करने में अपना सहयोग कर सकें।संकट की इस विकराल परिस्थिति में कोई ये नहीं समझे कि वह अकेला है,बल्कि उसे महसूस हो कि सारी मानवता व इंसानियत उसके साथ है।यकीन मानिए... सच्चाई औऱ अच्छाई की तलाश में भले ही आप पूरी दुनिया घूम लें...लेकिन अगर वो आपमें नहीं है तो फ़िर कहीं नहीं है।याद रखिए...मानवता औऱ इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

06/12/2021

-----पिता और बेटा----

पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है

5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था
कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर
गोदी में उठाकर एक किलो मीटर की दूरी पर क्लिनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए

दुकान कैश काउंटर सब नौकर के भरोसे छोड़ आये

सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हुए डॉक्टर को बोले
देखिये देखिये डॉक्टर
मेरे बेटे को क्या हो गया

डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा
अरे भाई साहब घबराने की कोई बात
है मामूली चोट है.... ड्रेसिंग कर दी है
ठीक हो जायेगी।

डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते दर्द कम हो जाता । अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि
जल्दी ठीक हो जाये घाव भर जाये
*डाक्टर* अरे भाई साहब क्यों इतने परेशान हो रहे हो कुछ नहीं हुआ है
3-4दिन में ठीक हो जायेगा

पर डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आजायेगी ना ।
*डॉक्टर* अरे हाँ भाई हाँ आप चिंता मत करो। बच्चे को लेकर लौटे तो नौकर बोला सेठ जी आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट खराब हो गया खून लग गया अब
ये दाग नही निकलेंगे

*भाई साहब* कोई नहीं
ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है कमजोर नहीं हो जाये । तू जा एक काम कर थोड़े सूखे मेवे फ्रूट ले आ इसे खिलाना पड़ेगा और मैं चलता हूँ घर पर

*40 साल बाद*

दुकान शोरूम में तब्दील हो गई है

भाई साहब का बेटा बिज़नस बखूबी संभाल रहा है
भाई साहब रिटायर्ड हो चुके हैं घर पर ही रहते है
तभी घर से बेटे की बीवी का फोन आता है

*बीवी*📞अजी सुनते हो ये आपके पापा पलंग से गिर गए हैं
सर पर से खून आ रहा है

*लड़का*📱 अरे यार ये पापा भी न
इनको बोला ह जमीन पर सो जाया करो पर मानते हीे नही पलंग पर ही सोते है

अरे रामु काका जाओ तो घर पर पापा को डॉक्टर अंकल के पास ले कर आओ मैं मिलता हूँ वहीँ पर।

बूढ़े हो चुके रामु काका चल कर धीरे धीरे घर जाते है
तब तक सेठजी का काफी खून बह चुका था

बहु मुँह चढ़ा कर बोली
ले जाओ जल्दी पूरा महंगा कालीन खराब हो गया है

काका जैसे तैसे जल्दी से रिक्शा में सेठजी को डाल कर
क्लीनिक ले गए

बेटा अब तक नही पंहुचा था
काका ने फोन किया तो बोला
अरे यार वो कार की चाबी नही मिल रही थी अभी मिली है
थोड़े कस्टमर भी है आप बैठो लेकर मैं आता हूँ

जो दूरी 40 साल पहले एक बाप ने
बेटे के सर पर खून देखकर 10 मिनट में बेटे को गोदी में उठा कर भाग कर तय कर ली थी

बेटा 1घन्टा 10 मिनट में कार से भी तय नही कर पाया था

डाक्टर ने जैसे ही भाई साहब को देखा उनको अंदर ले गए इलाज चालू किया
तब तक बेटा भी पहुँच गया
डॉक्टर अंकल बोले
बेटे खून बहुत बह गया है
एडमिट कर देते तो ठीक रहता

*बेटा* अरे कुछ नही डाक्टर साहब
आप ड्रेसिंग कर दो ठीक हो जायेगा
2-4 दिन में ।

डाक्टर अंकल बोले ठीक है कुछ दवाईया लिख देता हूँ थोड़ी महंगी है लेकिन आराम जल्दी हो जायेगा

*लड़का* अरे डॉक्टर अंकल चलेगा 4-5 दिन ज्यादा लगेंगे तो अब इतनी महंगी दवाइयो की क्या जरूरत । चलो मुझे निकलना पड़ेगा शोरूम पर कोई नहीं है ।

ये सुनते ही डॉक्टर अंकल के सब्र का बांध टूट गया
और 40 साल पहले की घटना पूरी सुनाई

बेटे की आँखों आंसू बहने लगे उसे बहुत पस्च्याताप हुआ।

तभी बहू का फोन आया
वो महंगा कालीन खराब हो गया है
क्या करूँ ।

बेटा बोला कालीन ही खराब हुआ है ना .....
नया आजायेगा
तुम पलंग पर नया चद्दर और गद्दा डालो मैँ पापा को ले कर आ रहा हूँ

भाई साहब के आँखों में आँसू थे
और ये ख़ुशी के थे

चोट का दर्द गायब था बेटे
के अपनेपन ने सब भुला दिया।

बस अब तो मौत भी आ जाये तो
मंजूर है ।

दोस्तों ये आज की सच्चाई है
आज हमारे अंदर का इंसान मर चुका है ।

माँ बाप अकेलेपन का जीवन जी
रहे हैं

और

बेटा कामयाबी और दौलत
की चकाचौंध में खो कर सब कुछ भूल चुका है ।
==========================
*```कहानी दिल को छुए तो दोस्तों को जरुर शेयर करे ।*और नहीं छुवा तो डिलीट कर देना

30/10/2021

*एक माँ* अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने *विदेश में रहने वाले बेटे* से विडियो चैट करते वक्त *पूछ बैठी-*

*"बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?"*

*बेटा बोला-*

*"माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम* कर रहा हूँ। *विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके बारे में सुना भी है?"*

*उसकी माँ मुस्कुराई*
और *बोली.....*
*"मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ बेटा.. उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है।"*

“हो सकता है माँ!” बेटे ने भी *व्यंग्यपूर्वक* कहा।

*“यदि तुम कुछ समझदार हो, तो इसे सुनो..” उसकी माँ ने प्रतिकार किया।*
*“क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है?*
*विष्णु के दस अवतार ?”*
बेटे ने सहमति में कहा...
*"हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?"*

*माँ फिर बोली-*
*"लेना-देना है..*
*मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हो ?"*

*“पहला अवतार था 'मत्स्य', यानि मछली।* ऐसा इसलिए कि
*जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है या नहीं?”*

बेटा अब ध्यानपूर्वक सुनने लगा..

“उसके बाद आया *दूसरा अवतार 'कूर्म', अर्थात् कछुआ*
क्योंकि
*जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. 'उभयचर (Amphibian)',*
तो *कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।”*

*“तीसरा था 'वराह' अवतार, यानी सूअर।* जिसका मतलब *वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है*। *तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।”*
बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई..

*“चौथा अवतार था 'नृसिंह', आधा मानव, आधा पशु*। जिसने दर्शाया *जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।”*

*“पांचवें 'वामन' हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था*।
क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? *क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव),* और
*होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।”*

बेटा दशावतार की प्रासंगिकता सुन के स्तब्ध रह गया..

माँ ने बोलना जारी रखा-
*“छठा अवतार था 'परशुराम', जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी*। वे दर्शाते हैं उस *मानव* को, *जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।”*

*“सातवां अवतार थे 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम', सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति।* जिन्होंने *समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।”*

*“आठवां अवतार थे 'भगवान श्री कृष्ण', राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी।* जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि *सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है?*”
बेटा सुनता रहा, चकित और विस्मित..

*माँ ने ज्ञान की गंगा प्रवाहित रखी -*
*“नवां * थे 'महात्मा बुद्ध', वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।”*

“..और अंत में *दसवां अवतार 'कल्कि' आएगा।* *वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।”*

*बेटा अपनी माँ को अवाक् होकर देखता रह गया..*

*अंत में वह बोल पड़ा-*
*“ ... यह अद्भुत है माँ.. हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है!”*

*मित्रों..*
*वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का दृष्टिकोण होना चाहिए। फिर चाहे वह धार्मिक हो या वैज्ञानिकता...🙏

14/05/2021

---- कोरोना और पैसा ---

सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा।

"बीबी जी ! सब्जी ले लो ।" बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने सब्जी नहीं खरीदी मुझसे, कोई और देकर जा रहा है क्या ? सब्जी वाले ने कहा।

"रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।"

महिला नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली - "भैया ! तुम हमारे घर की घंटी मत बजाया करो। हमें सब्जी की जरूरत नहीं है।"

"कैसी बात कर रही हैं बीबी जी ! सब्जी खाना तो सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। किसी और से लेती हो क्या सब्जी ?" सब्जीवाले ने कहा।

"नहीं भैया ! उनके पास अब कोई काम नहीं है। किसी तरह से हम लोग अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं। जब सब ठीक हो जाएगा, घर में कुछ पैसे आएंगे, तो तुमसे ही सब्जी लिया करूंगी। मैं किसी और से सब्जी नहीं खरीदती हूँ। तुम घंटी बजाते हो तो उन्हें बहुत बुरा लगता है ! उन्हें अपनी मजबूरी पर गुस्सा आने लगता है। इसलिए भैया अब तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।" ईतना कहकर महिला अपने घर में वापिस जाने लगी।

"बहन जी ! तनिक रुक जाओ। हम इतने बरस से आपको सब्जी दे रहे हैं । जब तुम्हारे अच्छे दिन थे, तब तुमने हमसे खूब सब्जी और फल लिए थे। अब अगर थोड़ी-सी परेशानी आ गई है, तो क्या हम तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे ?
सब्जी वाले हैं ! कोई नेता जी तो है नहीं कि वादा करके छोड़ दें। रुके रहो दो मिनिट।"

और सब्जी वाले ने एक थैली के अंदर टमाटर , आलू, प्याज, घीया, कद्दू और करेले डालने के बाद धनिया और मिर्च भी उसमें डाल दिया ।
महिला हैरान थी... उसने तुरंत कहा – "भैया ! तुम मुझे उधार सब्जी दे रहे हो, कम से कम तोल तो लेते और मुझे पैसे भी बता दो। मैं तुम्हारा हिसाब लिख लूंगी। जब सब ठीक हो जाएगा तो तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस कर दूंगी।" महिला ने कहा।

"वाह ! ये क्या बात हुई भला ? तोला तो इसलिए नहीं है कि कोई मामा अपने भांजी -भाँजे से पैसे नहीं लेता हैं और बहिन ! मैं कोई अहसान भी नहीं कर रहा हूँ । ये सब तो यहीं से कमाया है, इसमें तुम्हारा हिस्सा भी है। गुड़िया के लिए ये आम रख रहा हूँ, और भाँजे के लिए मौसमी ।
बच्चों का खूब ख्याल रखना, ये बीमारी बहुत बुरी है और आखिरी बात भी सुन लो !
"घंटी तो मैं जब भी आऊँगा, जरूर बजाऊँगा।" ईतना कहकर सब्जी वाले ने मुस्कुराते हुए दोनों थैलियाँ महिला के हाथ में थमा दीं।
महिला की आँखें मजबूरी की जगह स्नेह के आंसुओं से भरी हुईं थीं।

*सेवा का दिखावा करने के बजाय कहीं और न जाकर अपने आसपास के लोगों की सेवा यदि प्रत्येक व्यक्ति कर ले तो यह मुश्किल घड़ी भी आसानी से गुजर जाएगी और आत्मा आनंद अमृत से तृप्त होगी।*

😷 *केवल अपना ही नहीं... अपने परिजनों का भी ध्यान रखें !*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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