29/07/2026
#गुरु_बिना_ज्ञान_कहाँ
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गुरु बिना ज्ञान कहाँ, ज्ञान बिना सम्मान कहाँ।
मिलता है गुरु उपदेश जहाँ, दूर हो जाता तिमिर वहाँ॥
माँ होती है प्रथम गुरु, पल-पल संस्कार सिखाती।
आँखें दिखा कभी डाँट डपट कर, नेक इन्सान बनाती॥
सिखा जाती एक चींटी भी, गिर-गिर कर ऊपर चढ़ना।
मन में उम्मीद जगा देती, मत हो निराश-नित आगे बढ़ना॥
ठोक-ठोक कर कुम्हार, सब दोष घड़े के दूर करता।
रहकर गुरु शरण में, मिलता ज्ञान जीवन सुधरता॥
गुरु से शिष्य को मिलती रही है एक सुखद पहचान।
मिलता सदैव है इसीलिए गोबिंद से पहले गुरु को सम्मान॥
जिस से सीख मिले कभी, गुरु मान उसे करो सदा सत्कार।
गुरु बिना ज्ञान कहाँ, ज्ञान बिना जीवन है निराधार॥
✍🏼 कुसुम धीमान ‘कलिका’