Vaidik Suprabhat

Vaidik Suprabhat वैदिक सुप्रभात

26/10/2024

राह दिखाने के लिए
खुद को जलाना पड़ता है।

24/10/2024

ध्यान रहे, आंखें खुद को नहीं देख पाती।

10/05/2024

रेलवे बंद कर दें। देश में कोई बेरोजगार नहीं बचेगा।

02/05/2024

#1947 #1857 vs 1947 Of India of india

http://vaidicsuprabhat.blogspot.com/2023/05/blog-post.html
03/06/2023

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नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण, बिहार, भारत में स्थित वैदिक सुप्रभात एक एनजीओ है इसका मूल उद्देश्य भारतीय सभ्यता संस्....

आपके मन में यह सवाल उत्पन्न होता होगा कि अगर भारतीय समाज जातिगत व्यवस्था में नहीं बटी हुई है तो वर्तमान में विभिन्न अलग-...
30/03/2022

आपके मन में यह सवाल उत्पन्न होता होगा कि अगर भारतीय समाज जातिगत व्यवस्था में नहीं बटी हुई है तो वर्तमान में विभिन्न अलग-अलग प्रकार के सरनेम क्यों लगाए जाते हैं किसी के नाम के पीछे चौधरी, ठाकुर, मिश्रा, तिवारी, चौरसिया, बरनवाल, सिंह,ओझा,झा,उपाध्याय,शर्मा, अग्रवाल, राय, सोनी, कादयान, साहनी,पटेल, राणा आदि अलग-अलग प्रकार के सरनेम क्यों लगाए जाते हैं ।
किसी भी सभ्यता संस्कृति के बहुत लंबे समय तक टिके रहने के दल दो कारण हो सकते है । उसका अपना आर्थिक तंत्र और उस उसका अपना दर्शन जो न्याय पर आधारित हो ।
यहां हम आर्थिक तंत्र पर विचार करेंगे ।
भारतीय आर्थिक व्यवस्था बिल्कुल सहज , सरल और .........

नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण, बिहार, भारत में स्थित वैदिक सुप्रभात एक एनजीओ है इसका मूल उद्देश्य भारतीय सभ्यता संस्....

बहुत लोगों का यह आरोप होता है कि महाभारत काल में द्रोणाचार्य एकलव्य को केवल इसलिए उन्होंने अपना धनुर्विद्या नहीं सिखाया ...
12/03/2022

बहुत लोगों का यह आरोप होता है कि महाभारत काल में द्रोणाचार्य एकलव्य को केवल इसलिए उन्होंने अपना धनुर्विद्या नहीं सिखाया ताकि अर्जुन का कोई प्रतिद्वंदी खड़ा न हो सके। दूसरा एकलव्य स्वयं शूद्र जाति के थे और आचार्यद्रोण एकलव्य को शूद्र..................

नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण, बिहार, भारत में स्थित वैदिक सुप्रभात एक एनजीओ है इसका मूल उद्देश्य भारतीय सभ्यता संस्....

भारतीय समाज को तोड़ने के जो प्रमुख कारण थे वह मैं पूर्व के लेखों में बता चुका हुँ ।        ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज ...
11/01/2022

भारतीय समाज को तोड़ने के जो प्रमुख कारण थे वह मैं पूर्व के लेखों में बता चुका हुँ ।
ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज को तोड़ने का मुख आधार वर्ण व्यवस्था को बनाया । बाद में भारत सरकार ने विभिन्न प्रकार की जातिगत प्रमाण पत्र एवं आरक्षण आदि चीजों से उसे मजबूत किया ।
अब बारी है भारतीय परिवारिक व्यवस्था को कैसे विभक्त की जाए । इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न आयामों को खड़ा किया जिससे एक ही परिवार के विभिन्न अलग-अलग सदस्यों में विवाद उत्पन्न हो सके । युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सके, आपस में मारपीट हो सके और वे एक न हो सके इसकी व्यवस्था की गई ।

नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण, बिहार, भारत में स्थित वैदिक सुप्रभात एक एनजीओ है इसका मूल उद्देश्य भारतीय सभ्यता संस्....

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