13/02/2026
एक सूखा-सा पेड़, टेढ़ा-मेढ़ा तना, झुकी हुई शाखाएँ।
देखकर लगा — अब ये ज़्यादा दिन नहीं टिकेगा।
लेकिन जब कैमरा पास गया,
तो उस पर इतने मीठे फल लगे थे
कि आसपास के नए-नवेले पेड़ भी फीके लग रहे थे।
तभी दिल में ख्याल आया…
ये पेड़ बिल्कुल हमारे घर के बुजुर्गों जैसा है।
सफेद बाल, धीमी चाल, कांपते हाथ…
ऊपर से भले कमजोर दिखें,
पर उनके अनुभव की मिठास,
उनकी दुआओं की ताकत,
और उनके आशीर्वाद की छाँव
हमारी सबसे बड़ी पूँजी है।
हम अक्सर उनकी उम्र देखते हैं,
लेकिन उनके भीतर छुपा “जीवन का खजाना” नहीं देखते।
जिस घर में बुजुर्ग होते हैं,
वहाँ सिर्फ लोग नहीं रहते —
वहाँ संस्कार रहते हैं, इतिहास रहता है,
और हर मुश्किल के लिए एक शांत सलाह रहती है।
घर का वो “पुराना पेड़”
चाहे सूखा लगे,
पर फल वही देता है
जो समय की धूप-बारिश सह चुका हो।
अगर आपके घर में भी कोई बुजुर्ग हैं,
तो आज ही उनके पास बैठिए,
दो बातें कीजिए,
और उनका हाथ थाम लीजिए। 😊😊🙏🙏