14/07/2026
डिस्क्लेमर: यह घटना कई मीडिया रिपोर्टों, संस्मरणों और सार्वजनिक बयानों में अलग-अलग विवरणों के साथ बताई गई है। कुछ दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अमिताभ बच्चन के लिए कैसे बने ‘मददगार फरिश्ता’ बालासाहेब ठाकरे?
साल 1982 में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे भयावह हादसा हुआ। बेंगलुरु यूनिवर्सिटी कैंपस में फिल्माए जा रहे एक एक्शन सीन में अभिनेता पुनीत इस्सर के साथ फाइट करते समय अमिताभ को टेबल पर गिरना था, लेकिन टाइमिंग में मामूली चूक हो गई। टेबल का नुकीला किनारा उनके पेट में इतनी जोर से लगा कि उनकी छोटी आंत गंभीर रूप से घायल हो गई और अंदरूनी रक्तस्राव शुरू हो गया।
शुरुआत में अमिताभ ने दर्द को सामान्य चोट समझकर शूटिंग जारी रखी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। डॉक्टरों की जांच में पता चला कि स्थिति बेहद गंभीर है और तुरंत ऑपरेशन की जरूरत है। बेंगलुरु में प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें विशेष विमान से मुंबई ले जाने का फैसला किया।
लेकिन मुंबई पहुंचते ही एक और मुश्किल सामने आ गई। उस दिन शहर में मूसलाधार बारिश हो रही थी। एयरपोर्ट से ब्रीच कैंडी अस्पताल तक ले जाने के लिए तुरंत उपयुक्त एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसी दौरान शिवसेना की एक शाखा की एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई, जिसने बिना समय गंवाए अमिताभ बच्चन को ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने कई घंटे तक जटिल सर्जरी की। इसके बाद भी कई दिनों तक उनकी हालत बेहद नाज़ुक बनी रही। देशभर में लोग उनके स्वस्थ होने की दुआ करने लगे। मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं हुईं। लाखों प्रशंसक अस्पताल के बाहर जमा हो गए और हर नई मेडिकल बुलेटिन का इंतजार करने लगे। एक समय ऐसा भी आया जब डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया, लेकिन लगातार इलाज, कई ऑपरेशन और उनकी इच्छाशक्ति के दम पर अमिताभ बच्चन धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगे।
इस घटना के बाद अमिताभ बच्चन ने कई मौकों पर बालासाहेब ठाकरे के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, वे मानते थे कि संकट की उस घड़ी में समय पर मिली एम्बुलेंस और सहायता उनके लिए किसी ‘जीवनदान’ से कम नहीं थी। इसी वजह से उन्होंने बालासाहेब ठाकरे को अपना ‘मददगार फरिश्ता’ भी कहा।
यह हादसा भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में गिना जाता है। बाद में फिल्म ‘कुली’ रिलीज़ हुई तो जिस दृश्य में अमिताभ बच्चन घायल हुए थे, उसे फिल्म से हटाया नहीं गया। बल्कि उस दृश्य को विशेष रूप से चिन्हित किया गया, ताकि दर्शकों को पता चल सके कि यही वह पल था जिसने पूरे देश को दुआ करने पर मजबूर कर दिया था।