29/04/2026
दिल्ली की रहने वाली 30 वर्षीय पूजा शर्मा ने समाज के उन नियमों को चुनौती दी है जो महिलाओं को श्मशान जाने से रोकते हैं। 2022 में अपने इकलौते भाई के मर्डर के बाद, पूजा ने लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने का प्रण लिया। इस काम के कारण उनका 7 साल पुराना रिश्ता टूट गया और ससुराल वालों ने उन्हें 'चांडाल' तक कह दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे 'ब्राइट द सोल' NGO के माध्यम से हर धर्म के लावारिस शवों का पूरे सम्मान के साथ दाह-संस्कार करती हैं। पूजा के इस निस्वार्थ कार्य ने न केवल उनके कोमा में गए पिता को नई जिंदगी दी, बल्कि आज वे 5 हजार से अधिक बेसहारा शवों की अंतिम विदाई का माध्यम बन चुकी हैं।
Source: Social Media