LAMHE the moments

LAMHE the moments writer, urdu and hindi poetry, digital creator

कौन है जो मुझको भीतर रोकता हैख़ुद से ही जाने से बाहर रोकता हैकौन मुझको बाँधता यादों से उसकीकौन दिल पर हाथ रखकर रोकता हैक...
26/11/2025

कौन है जो मुझको भीतर रोकता है
ख़ुद से ही जाने से बाहर रोकता है

कौन मुझको बाँधता यादों से उसकी
कौन दिल पर हाथ रखकर रोकता है

कोई प्रतिमा रो रही इसमें छिपी-सी
हाथ देकर एक पत्थर रोकता है

मैं शहर जाता हूँ जब भी गाँव से तो
घर पुराना एक जर्जर रोकता है

खोजता था पहले नदियों को समंदर
आज नदियों को समंदर रोकता है

भावना से भावना कैसे मिले अब
सबके अंदर कोई एक डर रोकता है

रोकने से उसके रुकना चाहिए फिर
कोई जब आँखों को भरकर रोकता है

कोई जब हाथों से रोके लाज़िमी है
कोई तो आँखों से खंज़र रोकता है

झूठ के सैलाब में एक सत्य को वह
धार के विपरीत जाकर रोकता है
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पैसा देश का रोटी देश की खाता हैकहाँ है जो भारत की बात सुनाता हैकौन उगाकर चला गया है बारूदेंधरती का यह हाल न देखा जाता है...
26/11/2025

पैसा देश का रोटी देश की खाता है
कहाँ है जो भारत की बात सुनाता है

कौन उगाकर चला गया है बारूदें
धरती का यह हाल न देखा जाता है

जाने किस आधार पे पीड़ा आधारित
दर्द से जाने कैसा मेरा नाता है

सपनों के आकाश में बैठा चाँद कोई
बादल ओढ़े गीत नया इक गाता है

एक दिए को द्वारे रखकर सो जाओ
दूर कहीं से कोई 'मुसाफ़िर' आता है
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बातों के हेर-फेर में दिख जाएगी तुमकोसच्चाई थोड़ा देर में दिख जाएगी तुमकोजब ध्यान से पढ़ोगे ग़ज़ल कोई भी मेरीरोटी की शक़्...
24/11/2025

बातों के हेर-फेर में दिख जाएगी तुमको
सच्चाई थोड़ा देर में दिख जाएगी तुमको

जब ध्यान से पढ़ोगे ग़ज़ल कोई भी मेरी
रोटी की शक़्ल शेर में दिख जाएगी तुमको

निर्मल अगर है मन तो पूरी राम-कहानी
'शबरी' के जूठे बेर में दिख जाएगी तुमको

आँखों ने उम्र भर जो सजाकर रखी तस्वीर
यादों के किसी ढेर में दिख जाएगी तुमको

गठरी दुखों की लादे मेरी ज़िंदगी की पीठ
जीवन के इसी घेर में दिख जाएगी तुमको
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ख़ून सींची क्यारियाँ सूखी है डालीफूल कुम्हलाते गये सोया है मालीपेड़ कोई हँस रहा सामर्थ्य पाकरसिर्फ़ उसके ही लिए है खाद ड...
24/11/2025

ख़ून सींची क्यारियाँ सूखी है डाली
फूल कुम्हलाते गये सोया है माली

पेड़ कोई हँस रहा सामर्थ्य पाकर
सिर्फ़ उसके ही लिए है खाद डाली

हर तरफ बस झूठ का बाज़ार फैला
आजकल सच्चाई की हर बात गाली

प्रश्न के उत्तर यहाँ फिर प्रश्न ठहरे
लोग करते फिर रहे बौद्धिक जुगाली

हो रही पुनरुक्ति भावों की निरंतर
अर्थगौरव मर रहा है शब्द खाली
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ईंधन जुटा लिया गया है आग के लिएघर में नमक बचा नहीं है साग के लिएसीता तो छोड़कर के ये दुनिया है जा चुकीअब राम भी न है कोई...
23/11/2025

ईंधन जुटा लिया गया है आग के लिए
घर में नमक बचा नहीं है साग के लिए

सीता तो छोड़कर के ये दुनिया है जा चुकी
अब राम भी न है कोई परित्याग के लिए

सारे समीकरण वो गया तोड़कर अभी
कुछ भी नहीं बचा है गुणा भाग के लिए

अब आप भी जहान की रस्में निभाइए
कोई तो ज़ख्म दीजिए इस दाग के लिए

मीरा के पास कृष्ण तो आयेंगे ही ज़रूर
रैदास को बुलाओ किसी राग के लिए
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हाथों से छूटती नहीं शराब रात रातथककर बदन पे सो गया गुलाब रात रातपलकों के दरमियान समन्दर छिपे कईआँखों में तैरतें हैं मेरे...
23/11/2025

हाथों से छूटती नहीं शराब रात रात
थककर बदन पे सो गया गुलाब रात रात

पलकों के दरमियान समन्दर छिपे कई
आँखों में तैरतें हैं मेरे ख़्वाब रात रात

जब चुप्पियों में ढल गए सारे सवाल यार
होठों से छीनता कोई जवाब रात रात

मुझसे कभी न पूछना हालात-ए-ज़िंदगी
करबट बदलते रहते हैं जनाब रात रात

लिखते सदा रहेंगे मुहब्बत की दास्ताँ
पढ़ते रहेंगे हुस्न की किताब रात रात
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जब से माझी ने दुश्मनी कर लीहम ने नावों से दोस्ती कर लीभूख ख़्वाबों पे पड़ गई भारीघर से भागे तो नौकरी कर लीदेख कर उस की आ...
22/11/2025

जब से माझी ने दुश्मनी कर ली
हम ने नावों से दोस्ती कर ली

भूख ख़्वाबों पे पड़ गई भारी
घर से भागे तो नौकरी कर ली

देख कर उस की आँख में पानी
एक दरिया ने ख़ुदकुशी कर ली

बात रख कर के सामने सब के
बात अपनी ही फिर बुरी कर ली

अब न उठ सकते हम सुबह जल्दी
उसने ख़्वाबों में वापसी कर ली
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