10/10/2025
सभी को करवा चौथ की ढेर सारी शुभकामनाएं व बधाई भगवान आप सब की जोड़ी सलामत रखे
Many best wishes and congratulations to everyone on Karva Chauth. May God keep all of you safe.
हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ मनाया जाता है। यह पर्व करवा माता को समर्पित होता है। कहते हैं कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा माता की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है। साथ ही व्रती के सुख-सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है
करवा चौथ से जुड़ी कई कहानियाँ प्रचलित हैं, जिनमें से तीन प्रमुख कहानियाँ नीचे दी गई हैं:।
1. साहूकार के सात बेटे और वीरावती की कहानी
यह करवा चौथ की सबसे लोकप्रिय कथाओं में से एक है।
एक साहूकार की वीरावती नाम की एक इकलौती बेटी थी, जिसके सात भाई थे।
वीरावती ने अपनी शादी के बाद पहला करवा चौथ का व्रत रखा, लेकिन पूरे दिन के निर्जला व्रत से वह बहुत व्याकुल हो गई।
उसकी हालत देखकर भाइयों को बहुत दुख हुआ। उन्होंने बहन का व्रत तुड़वाने के लिए एक पीपल के पेड़ पर नकली चाँद की रोशनी दिखाकर वीरावती से कहा कि चाँद निकल आया है।
वीरावती ने भाइयों की बात मानकर व्रत तोड़ दिया। जैसे ही उसने भोजन किया, उसे अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला।
वीरावती का दुख देखकर इंद्राणी (इंद्र की पत्नी) ने उसे विधि-पूर्वक व्रत करने का सुझाव दिया। वीरावती ने पूरे साल व्रत किया और अगले करवा चौथ पर सही विधि से व्रत पूरा किया। इससे उसका पति पुनः जीवित हो गया।
2. करवा और यमराज की कहानी
यह कथा एक ऐसी महिला की है, जिसने अपने पति के प्राण यमराज से वापस माँगे थे।
करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी। एक बार जब उसके पति मगरमच्छ के मगरमच्छ के चुंगल में फंस गए, तो करवा ने यमराज को बुलाया।
उसने यमराज से मगरमच्छ को नरक भेजने और उसके पति को वापस देने की विनती की। जब यमराज ने उसकी बात नहीं मानी, तो करवा ने अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से यमराज को श्राप देने की धमकी दी।
करवा की भक्ति और दृढ़ता से प्रभावित होकर यमराज ने उसके पति को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया और मगरमच्छ को नरक भेज दिया। उसी दिन से करवा चौथ का व्रत मनाया जाने लगा।
3. द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कहानी
महाभारत काल में भी करवा चौथ के व्रत का उल्लेख मिलता है।
जब पांडव वनवास में थे, तो अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गए थे।
उनके पीछे उनकी पत्नी द्रौपदी को कई कष्टों का सामना करना पड़ा। उन्होंने श्रीकृष्ण से मदद माँगी।
श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को करवा चौथ का व्रत करने की सलाह दी और उन्हें इस व्रत का महत्व समझाया।
व्रत के प्रभाव से अर्जुन अपनी तपस्या पूरी करके सुरक्षित लौट आए, और द्रौपदी के कष्ट दूर हो गए।
व्रत का महत्व
ये सभी कहानियाँ पत्नी के अपने पति के प्रति गहरे प्रेम, भक्ति और समर्पण को दर्शाती हैं। करवा चौथ का व्रत इसी प्रेम का प्रतीक है, जहाँ महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
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