23/09/2026
ज़िंदगी तेरी यूही अपनी
मनमानी रही ।
एक परेशानी गई तो एक
परेशानी रही ।।
( स्व0=संत शरण करुणेश )
यह शेर देवरिया के हिंदी उर्दू के मशहूर शायर कायस्थ खानदान की तहज़ीबी पुरानी र वायत के पासबान कौमी एकता के अलमदार मुशायरा कविसम्मेलन के कुशल आयोजक
जनाब संत शरण करुणेश जी ने 5 जून 2016 को जब मेदांता गुड़गांव में मैं बाई पास सर्जरी के बाद स्वस्थ लाभ कर रहा था तो मेरी मिजाज़ पुरसी करते
वक्त मुझे नज़र किया था
आज भी जब मुसीबत परेशानी में घिरता हु तो उनका यह शेर मेरे दुख
तकलीफ को हल्का कर देता हे
ज़िंदगी की मनमानी को सहन करने
की शक्ति प्रदान करता हे
ईश्वर उनकी रुह को सुकून अता फरमाए
अमीन,
शफीक जमा शफीक
लखनऊ फतेहपुर