06/07/2026
*फ़तेहपुर साहित्य का एक गुलाब: सैयद असग़र वजाहत*
( असग़र वजाहत के जन्मदिवस 05 जुलाई के अवसर पर विशेष लेख)
लेखक: शफीक जमा खान (फतेहपुर, यूपी)
गंगा और यमुना के दोआब में स्थित फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) का साहित्यिक इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। वैदिक काल और पुराणों से लेकर आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम तक, इस माटी ने कई महान साहित्यकारों, कवियों और विचारकों को जन्म दिया है, जिन्होंने उर्दू-हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।
बिंदकी (फतेहपुर) के निवासी सोहनलाल द्विवेदी हिंदी के प्रमुख ओजस्वी कवि थे। हथगाँव (फतेहपुर) से जुड़े गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक क्रांति का बिगुल फूंका था। आधुनिक साहित्यकारों, आलोचकों और उपन्यासकारों में आधुनिक हिंदी साहित्य और कला के एक प्रमुख हस्ताक्षर अशोक बाजपेयी एवं परसदेपुर की माटी से जुड़े कन्हैयालाल नंदन के साथ एक नाम बड़ी इज़्ज़त से लिया जाता है और वह नाम है हिंदी के जाने-माने साहित्यकार डॉ असग़र वजाहत का। डॉ असग़र वजाहत का जन्म 5 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में हुआ था।
डॉ असग़र वजाहत हिंदी साहित्य के समकालीन युग के प्रमुख कथाकार, उपन्यासकार और नाटककार हैं। उनके क़लम ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को बड़ी महारत से उकेरा है। सन् 1947 में देश के विभाजन के बाद आई त्रासदी को वैसे तो बहुत सारे साहित्यकारों एवं कवियों ने अपने अंदाज़ से प्रस्तुत किया है। लेकिन डॉ असग़र वजाहत 1947 के बंटवारे के दर्द को शब्दों के रूप में एक नई पहचान दिलाई है। विभाजन की त्रासदी पर आधारित नाटक 'जिस लाहौर नईं वेख्या ओ जम्याइ नईं' और उपन्यास 'सात आसमान' के रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से हिंदी में एम.ए. और पी-एच.डी. की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च भी पूरी की। 1971 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली के हिंदी विभाग में अध्यापन कार्य शुरू किया। वहाँ वे प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष (HOD) के पद तक पहुँचे और 2011 तक अपनी सेवाएँ दीं। इसके अलावा, उन्होंने हंगरी के बुडापेस्ट स्थित 'ओत्वोश लोरांड विश्वविद्यालय' में पाँच वर्षों तक हिंदी का अध्यापन किया और यूरोप-अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्याता (Guest Lecturer) के रूप में भी कार्य किया।साहित्य के अलावा असग़र वजाहत का फिल्मों, टीवी धारावाहिकों और चित्रकला में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कई डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) और फीचर फिल्मों के लिए उन्होंने पटकथा (Screenplay) लिखी है। इसके अतिरिक्त, एक चित्रकार के रूप में बुडापेस्ट में उनकी एकल चित्र प्रदर्शनियाँ भी आयोजित हो चुकी हैं।
डॉ असग़र वजाहत को आमतौर पर एक कहानीकार के रूप में जाना जाता है। कहानी के बाद उन्होंने गद्य साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन किया और अपने लिए हमेशा नए प्रतिमान बनाए। अपने लिए जिस भी विधा को उन्होंने चुना वहाँ हमेशा पहले दर्जे की रचना संभव हुई। डॉ असग़र वजाहत के लेखन में अनेक कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, आठ नाटक और कई अन्य रचनाएँ शामिल हैं। इनकी पहली कहानी 1964 के आसपास छपी थी तथा पहला कहानी संग्रह 'अंधेरे से' 1976 में आपातकाल के दौरान पंकज बिष्ट के साथ (संयुक्त रूप से) छपा था। इनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी, इतालवी, रूसी, फ्रेंच, ईरानी, उज्बेक, हंगेरियन, पोलिश आदि भाषाओं में हो चुके हैं।
डॉ असग़र वजाहत का पहला नाटक 'फिरंगी लौट आये' 1857 की पृष्ठभूमि पर आधारित था। आपातकाल के दौरान 'फरमान' नाम से इसे टेली प्ले के रूप में फिल्माया गया तथा इसके प्रसारण भी हुए थे। इनके नाटकों का देश भर में मंचन और प्रदर्शन हुआ है। इनके नाटकों का निर्देशन हबीब तनवीर, एम के रैना, दिनेश ठाकुर, राजेंद्र गुप्ता, वामन केंद्रे, शहीम किरमानी तथा टाम आल्टर जैसे निर्देशकों ने किया है। 'जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याइ नई' ने देश एवं देश के बाहर भी लोकप्रियता के नये मानदंड कायम किये। हबीब तनवीर ने इस नाटक का पहला शो 27 सितंबर 1990 को किया था। इसके बाद यह नाटक इतनी चर्चा में आ गया कि इसके प्रदर्शन कराची, दुबई, वाशिंगटन डीसी, सिडनी, लाहौर तथा अन्य शहरों में हुए। भारत की कई भाषाओं में इसके अनुवाद किये गये और इसका मंचन हुआ। हबीब तनवीर के अतिरिक्त इस नाटक को ख़ालिद अहमद, उमेश अग्निहोत्री, दिनेश ठाकुर, कुमुद मीरानी आदि निर्देशकों ने किया। इस नाटक के बीस वर्ष पूरे होने पर एक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन हुआ जिसके तहत विश्व के कई नगरों में अंतर्राष्ट्रीय आयोजन हुआ जिसके तहत विश्व के कई नगरों में इसके मंचन तथा गोष्ठियां आयोजित की गयीं। बुडापैस्ट, हंगरी में इनकी दो एकल चित्र प्रदर्शनियाँ भी हो चुकी हैं। ये टेलीविज़न व फ़िल्म लेखन और निर्देशन से भी जुड़े रहे हैं। कई वृत्ताचित्रों, धारावाहिकों और कुछ फीचर फ़िल्मों के लिए पटकथा लेखन भी इन्होंने किया है।
असगर वजाहत नियमित रूप से अखबारों और पत्रिकाओं के लिए भी लिखते रहे हैं। 2007 में उन्होंने अतिथि संपादक के रूप में बी०बी०सी० वेब पत्रिका का संपादन किया था। सुप्रसिद्ध हिंदी पत्रिका 'हंस' के 'भारतीय मुसलमान : वर्तमान और भविष्य' विशेषांक का तथा 'वर्तमान साहित्य' के 'प्रवासी साहित्य' विशेषांक का संपादन भी उन्होंने किया था।
डॉ असग़र वजाहत की मुख्य कृतियां
उपन्यास : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, बरखा रचाई, धरा अँकुराई, रात में जागने वाले, पहर-दोपहर, मन माटी
नाटक: जित लाहौर नई वेख्या वो जम्याइ नई, अकी, समिधा, चहारदर, फिरंगी लौट आये, इन्ना की आवाज, वीरगति, गोडसे @ गांधी. कॉम, महाबली
नुक्कड़ नाटक : सबसे सस्ता गोश्त
कहानी संग्रह: में हिंदू हूँ, दिल्ली पहुँचना है, स्वीमिंग पूल, सब कहाँ कुछ, डेमोक्रेसिया, भीड़तंत्र
संस्मरण: कथा से इतर
यात्रा संस्मरण : चलते तो अच्छा था, रास्ते की तलाश में, पाकिस्तान का मतलब क्या?, अतीत का दरवाजा, स्वर्ग में पाँच दिन
आख्यान : बाकरगंज के सैयद
निबंध : ताकि देश में नमक रहे, सफाई गंदा काम है
पत्र: इस पतझड़ में आना
आलोचना : हिंदी-उर्दू की प्रगतिशील कविता
सम्मान: संगीत नाटक अकादेमी सम्मान, कथा क्रम सम्मान, हिंदी अकादमी का सम्मान, इंदु शर्मा कथा सम्मान