16/03/2026
ए मां तुझे सलाम ।
16 मार्च 2019 की सुबह में फैजाबाद में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शरीक होकर लखनऊ के लिए रवाना हुआ और फिर वहां से 3 बजे A،C बस से फतेहपुर के लिए चल दिया,लेकिन इस बार अजीब सी उलझन थी,कुछ भी खाने पीने को दिल नहीं कर रहा था
बछरावा पहुंचने पर मेरे बहनोई अशफाक भाई का फोन आए कि कहा पहुंचे मैने कहा इंशा अल्लाह 6 बजे के आस पास पहुंच जाऊंगा,मगर
मन में कुछ घबराहट हुई लेकिन रोटीन
काल समझ कर नज़र अंदाज़ कर दिया, फतेहपुर पहुंचा तो मगरिब की अज़ान हो रही थी,में जैसे घर में दाखिल हुआ तो कुछ रिश्तेदार मोहल्ले की औरते अम्मा के कमरे में खड़ी थी
जब से अम्मा की तबियत खराब रहती थी कोई न कोई मोहल्ले वाली हमेशा अम्मा के पास मौजूद रही थी मै यही समझ कर सीधे वाश रूप वज़ू करने चला गया मेरी आदत हे सफर में जाने और वापस आने पर दो रकात हाजत व शुक्राने की अदा करता हु तब ही मेरे छोटी बहन दौड़ते हुई आई की अच्छे भैया अम्मा कुछ नहीं बोल रही हे आंखे बंद का ली हे,में फौरन अम्मा के कमरे पे पहुंचा उनको पुकारा अम्मा आंखे खोलो और अम्मा ने आंखे खोली देखा और बस,फिर जिंदगी का सफर खत्म
चुकी मेरे बड़े भाई डा के खान उम्मन में थे उनके आने पर 17 मार्च को बाद नमाज असर मुरादशाह मैदान में अब्बा के पास हमेशा के लिए सो गई बड़े भाई हकीम हाजी अहमद जमा ने नमाज जानाज़ा पढ़ाई
हम सभी भाई बहन बचपन में ही यतीम हो गए थे,बहुत ही तकलीफ देह
कठिन दौर से गुज़रे थे उस वक्त तो अम्मा सहारा बनकर खड़ी हुई,हौसल दिया, खुद्दारी से कभी समझौता नहीं किया,परेशानी के दौरान
वह यह शेर पढ़ा करती थी
, तेरा तारीक अमीरी नहीं फकीरी हे
खुदी न बेज गरीबी में नाम पैदा कर
अपने पैदा किए सूरज की दुवाएं मांगो,
भीख मांगी हुई किरणों का भरोसा किया हे ।
अल्लाह ताला से दुआ हे कि
अम्मा को जन्नत में आला मकाम आता फरमाए अमीन