Shafiq Zama

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ज़िंदगी तेरी यूही अपनी मनमानी रही ।   एक परेशानी गई तो एकपरेशानी रही ।।      ( स्व0=संत शरण करुणेश )     यह शेर देवरिया क...
23/09/2026

ज़िंदगी तेरी यूही अपनी
मनमानी रही ।
एक परेशानी गई तो एक
परेशानी रही ।।
( स्व0=संत शरण करुणेश )

यह शेर देवरिया के हिंदी उर्दू के मशहूर शायर कायस्थ खानदान की तहज़ीबी पुरानी र वायत के पासबान कौमी एकता के अलमदार मुशायरा कविसम्मेलन के कुशल आयोजक
जनाब संत शरण करुणेश जी ने 5 जून 2016 को जब मेदांता गुड़गांव में मैं बाई पास सर्जरी के बाद स्वस्थ लाभ कर रहा था तो मेरी मिजाज़ पुरसी करते
वक्त मुझे नज़र किया था
आज भी जब मुसीबत परेशानी में घिरता हु तो उनका यह शेर मेरे दुख
तकलीफ को हल्का कर देता हे
ज़िंदगी की मनमानी को सहन करने
की शक्ति प्रदान करता हे
ईश्वर उनकी रुह को सुकून अता फरमाए
अमीन,
शफीक जमा शफीक
लखनऊ फतेहपुर

22/09/2026
*ग़ज़ल - शफ़ीक-उज़-ज़मां शफ़ीक*सफ़र तमाम हुआ हम-सफ़र नहीं आएमैं ज़ख्म खाता रहा चारा-गर नहीं आएतमाम उम्र किया दश्त का सफ़...
21/09/2026

*ग़ज़ल - शफ़ीक-उज़-ज़मां शफ़ीक*

सफ़र तमाम हुआ हम-सफ़र नहीं आए
मैं ज़ख्म खाता रहा चारा-गर नहीं आए

तमाम उम्र किया दश्त का सफ़र मैं ने
कभी भी राह में मेरे शजर नहीं आए

जो तेरी ज़ुल्फ़ के साये में रह के गुज़रे थे
फिर उस के बाद वो मंज़र नज़र नहीं आए

वो अपने साथ सभी रौनक़ें गया ले कर
फिर उस के बाद वो शाम-ओ-सहर नहीं आए

तमाम ज़िंदगी परदेस में कटी है शफ़ीक
जो घर से निकले तो फिर लौट कर नहीं आए

उपरोक्त गजल मेरेकाव्य संग्रह
उम्मीदों का सफर में उर्दू शैली में छपी हे इस गजल को मैने आज फेस बुक में पोस्ट की जिसे मेरे अति
प्रिय छोटे भाई अभिषेक मिश्रा ग्राम दोघड़ा विकास खंड सलेमपुर जहां में बहुत पहले BDO था उन्होंने हिंदी शैली में परिवर्तित कर भेजिए
उनकामेरे प्रति यह प्यार स्नेह का दिल से आभारी हु
देवरिया के लोगो बुजुर्गों और युवाओं ने मुझे हमेश असीम प्यार मोहब्बत से नवाजते रहते
प्रिय अभिषेक का बहुत शुक्र गुज़ार हु

देवरिया के अपने मोहन          *****************     समाज वादी चिंतक जनप्रिय नेता स्व0 मोहन सिंह जी की पुण्य तिथि परदिल क...
21/09/2026

देवरिया के अपने मोहन
*****************
समाज वादी चिंतक जनप्रिय नेता स्व0 मोहन सिंह जी की पुण्य तिथि पर
दिल की गहराइयों से नजराने अकीदत पेश करता हूं।
मोहन सिंह जी के बारे में उदयन शर्मा जी की पत्रिका रविवार में पढ़ा था तब से उनसे मिलने की बात करने की ललक मेरे दिल में पैदा हुई ,अल्लाह का करना ऐसा हुआ कि मेरी पोस्टिंग
1999 में देवरिया मे होई तब अचानक तत्कालीन जिलाधिकारी श्री सभा राज सिंह के आवास पर उनसे भेट हुई
इतने बड़े नेता इतनी बड़ी शख्सियत और इतनी सादगी देख कर मैं हैरान रह गया, फिर क्या
था मैने उनसे मिलना जुलना अपने विभागीय कार्यक्रमों खेल आयोजन जंग आजादी की सालगिरह शहीद स्थल (राम लाला मैदान ) कार्यकर्मो में आमंत्रित करता उनके विचार से खुद भी और युवाओं को बहुत सीखने को मिलता बरहज
के नई तहसील के उद्घाटन समारोह
में जिसमें तत्कालीन राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी आए थे उक्त गोष्ठी का संचालन मुझसे कराया था,इसी तरह राजकीय इंटर कालेज में तत्कालीन केबिनेट मंत्री श्री शिव पाल सिंह यादव की सभा का संचालन भी मुझे ही कराया , और बहुत प्रशंसा भी की थी
वह अक्सर कहा करते थे कि जमा साहेब आप बोलते बहुत अच्छा हो समा बांध देते हो , मैं जब तक देवरिया में रहा श्रद्धेय बाबू जी के संपर्क में और उनसे बहुत कुछ सीखता रहा
खुशी की बात हे आज उनके बताए हुवे रस्ते पर बहन कनक लता जी गामज़न और उनके अधूरे सपने को पूरा करने में लगी है
सब के अपने मोहन हे राधा के अपने मोहन सोनिया के अपने मोहन और देवरिया वासियों के अपने मोहन

प्रोफेसर डॉ0 अतिकुर रहमान फ़ारूक़ी साहेब पूर्व प्रिसिपल मुमताज पी जी कालेज की किताब नई रौशनी की।रस्म इजरा पर खूबसूरत लम्...
19/09/2026

प्रोफेसर डॉ0 अतिकुर रहमान फ़ारूक़ी साहेब पूर्व प्रिसिपल मुमताज पी जी कालेज की किताब नई रौशनी की।रस्म इजरा पर खूबसूरत लम्हा ।
आओ मिलजुल कर कोई काम
नुमाया कर दे ।
बज़्म मेें अखलाक मोहब्बत से
चिराग़ा कर दे ।।

चंद कातात  पेश खिदमत     ***********************      ज़र्फ़ उसका आज़माना चाहिए       हाथ दुश्मन से मिलना  चाहिए ज़पत का...
14/09/2026

चंद कातात पेश खिदमत
***********************
ज़र्फ़ उसका आज़माना चाहिए
हाथ दुश्मन से मिलना चाहिए
ज़पत का यारा दिया अल्लाह ने
ज़ख्म खा करमुस्कुराना चाहिए

ज़िन्दगी कैसी संभाली जा रही हे
अपनी पगड़ी खुद उछाली जा रही है
बस्ती बस्ती हे लहू इंसान का बहता
दिल से कब नफ़रत निकली जा रही हे

14/09/2026
उसके लबो रुखसार  की बाते करे।मौसम ए गुल गुलज़ार की बाते करे जिसकी निगाहों में समा जाती हेसारी बहार ।शफीक उसी निगाहे यार ...
14/09/2026

उसके लबो रुखसार की बाते करे।
मौसम ए गुल गुलज़ार की बाते करे
जिसकी निगाहों में समा जाती हे
सारी बहार ।
शफीक उसी निगाहे यार की बाते
करे ।।

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Lucknow
226010

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