📜 Classical Hindi Poet ✒️ Shayar 🧠 Philosopher🎭 Creator of Anubandh Epilogue 🎬 Founder & Director, Sagar Suman Studio✨ Where Poetry Meets Storytelling, Music & Cinematic Visuals 🌌 A Cinematic Poetry Universe🕊️ Poetry Beyond Liftimes🔗 Pustakvani.com अनुबन्ध: पूर्ण यात्रा का दर्शन
प्रेम से योग तक: यह 'समिधा' और 'सागर' के दैहिक आकर्षण से शुरू होकर उस 'ट्विन फ्लेम' योग की यात्रा है, जहाँ दो आत्माएँ एक हो जाती हैं।
योग से ज्ञान तक: यह वह अवस्था है जहाँ मिलन की छटपटाहट 'अनुभव' में बदलने लगती है। जब दो आत्माओं का योग (जुड़ाव) होता है, तब संसार की नश्वरता और रूहानी सत्य का बोध होता है। यहाँ 'योग' केवल जुड़ना नहीं, बल्कि यह जानना है कि जिसे हम खो रहे हैं, वह कभी हमारा था ही नहीं, और जो हमारा है, उसे कोई छीन नहीं सकता। यही वह बिंदु है जहाँ प्रेम 'अंधा' नहीं, बल्कि 'दृष्टा' (ज्ञानी) बन जाता है।
ज्ञान से मोक्ष तक: यह वियोग की पीड़ा से उपजे उस 'ज्ञान' की बात है, जो अंततः मोह-माया के बंधनों से मुक्त कर 'मोक्ष' की ओर ले जाता है। यहाँ मोक्ष का अर्थ मृत्यु नहीं, बल्कि जीते-जी स्मृतियों और आसक्तियों के बोझ से आज़ाद हो जाना है।
एक छंदीय यात्रा: यहाँ आपका 'स्रग्विणी छंद' केवल एक मीटर नहीं, बल्कि उस यात्रा का 'वाहन' है।