Kavya Chaupal

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✨ काव्य चौपाल ✨
🎙️ कविता | 🎶 गीत | 💫 ग़ज़ल | 😄 मनोरंजन
📚 यहाँ मिलेगी साहित्य की मिठास और 🎼 संगीत का रंग

👉 कला और मनोरंजन का अनोखा संगम 🎉

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वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहतेकि दिल रह गया मुद्दआ कहते कहतेमिरा इश्क़ भी ख़ुद-ग़रज़ हो चला हैतिरे हुस्न को बेवफ़ा क...
24/07/2026

वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहते
कि दिल रह गया मुद्दआ कहते कहते

मिरा इश्क़ भी ख़ुद-ग़रज़ हो चला है
तिरे हुस्न को बेवफ़ा कहते कहते

शब-ए-ग़म किस आराम से सो गए हैं
फ़साना तिरी याद का कहते कहते

ये क्या पड़ गई ख़ू-ए-दुश्नाम तुम को
मुझे ना-सज़ा बरमला कहते कहते

ख़बर उन को अब तक नहीं मर मिटे हम
दिल-ए-ज़ार का माजरा कहते कहते

अजब क्या जो है बद-गुमाँ सब से वाइज़
बुरा सुनते सुनते बुरा कहते कहते

वो आए मगर आए किस वक़्त 'हसरत'
कि हम चल बसे मरहबा कहते कहते

-- हसरत मोहानी
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#काव्यचौपाल

📢 महत्वपूर्ण घोषणा | काव्य चौपाल : चौपाल कार्यशाला 📢काव्य चौपाल द्वारा प्रत्येक शनिवार प्रातः 8:00 बजे से रविवार रात्रि ...
24/07/2026

📢 महत्वपूर्ण घोषणा | काव्य चौपाल : चौपाल कार्यशाला 📢

काव्य चौपाल द्वारा प्रत्येक शनिवार प्रातः 8:00 बजे से रविवार रात्रि 8:00 बजे तक आयोजित होने वाली "चौपाल कार्यशाला" के संचालन हेतु दो प्रतिष्ठित साहित्यकारों की घोषणा करते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

🌸 संचालक 🔹 स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह' जी 🔹 आद० निभा राजीव 'निर्वी' जी

आप दोनों के अनुभव, साहित्यिक दृष्टि एवं सृजनात्मक मार्गदर्शन से यह कार्यशाला निश्चित ही सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगी।

✍️ यदि आप कविता, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, छंद अथवा अन्य साहित्यिक विधाओं में रुचि रखते हैं और अपने लेखन को नई दिशा देना चाहते हैं, तो इस कार्यशाला से अवश्य जुड़ें।

🌿 आइए, सीखें... 🌿 सृजन करें... 🌿 संवाद करें... 🌿 और साहित्य की इस सुंदर यात्रा के सहभागी बनें।

आप सभी का काव्य चौपाल परिवार में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।

#काव्य_चौपाल #चौपाल_कार्यशाला #साहित्य #कविता #लेखन #सृजन

Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 अधूरे ख़्वाब, Sneh Lata Pandey Sneh, Bri...
24/07/2026

Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 अधूरे ख़्वाब, Sneh Lata Pandey Sneh, Brijesh Vishwakarma, महेश जैन 'ज्योति', Savita Saxena, Neha Saxena, Ashok Thakur, प्रत्यूष गौतम, Kumkum Thakur, Sangeet Pandey, सुनीता चतुर्वेदी आजमगढ़ी, MD Javed, Dhananjay Gudakesh, Virender Tailor, Bipin Kumar, Satish Anand, Manoj Singh, Bobby Chauhan, Babita Garg, व्यंजना पाण्डेय, मुन्ना शेख, Shikha Asthana, Aatish Pancholi, Neeraj Shukla, Dhanendera Kumar Mishra, Ram Babu Rastogi, दिनेश कुशभुवनपुरी, अजय श्रीवास्तव 'मदहोश', राजेश परदेशी, Balaprasad Darak, Satendra Thakur, Anamika Mishra, Pratibha Gupta, Kavyitri Antrika S. Navodayan, Wajid Ali, Deepti Rajora, Daman Bhalla, Nilam Srivastava, SyedMohd Aslam, Dori Lal, Basant Mastar, Sandeep Kumar Singh, Vivek Srivastava, Gaurav Shah, Mradul Khale, Jitendra Saini, Vikram Singh Chouhan, Anish Khan, Bahiru Gamne, Tamanna Jafri

सर्वदा सुखमय है संसार,प्रेम है जीवन का आधार।नयन से नयन महा छविमान,अधर से अधर सुधा-रस-खान,हृदय से हृदय प्रमोद-निधान,प्राण...
24/07/2026

सर्वदा सुखमय है संसार,
प्रेम है जीवन का आधार।

नयन से नयन महा छविमान,
अधर से अधर सुधा-रस-खान,
हृदय से हृदय प्रमोद-निधान,
प्राण से प्राण विभुग्ध महान,

यही कहते हैं बारंबार,
प्रेम है जीवन का आधार।

रवि-मुखी उषा अनंत-सुहाग,
शशि-मुखी संध्या शुचि-अनुराग,
प्रफुल्लित-शतदल-वदन तड़ाग,
भव्यता से भूषित भू-भाग,

कर रहे नित्य पुकार-पुकार,
प्रेम है जीवन का आधार।

ललित लतिकाओं से पवमान,
पादपों से वल्लरी-वितान,
कलित कलियों से अलि-गुण-गान,
विहंगम से विहगी का मान,

बता देते हैं सभी प्रकार,
प्रेम है जीवन का आधार।

वारिधर से चपला का प्यार,
सिंधु से सरिता का व्यवहार,
चंद्र से रजनी का अबिसार,
वायु से लत-अंग-व्यापार,

प्रकट करते हैं यही विचार,
प्रेम है जीवन का आधार।

लोक-लोचन का दिव्य प्रकाश,
मनुज-जीवन का विमल विकास,
चिरस्थायी उर का उल्लास,
विश्वपति का अनंत आभास,

जगत के यौवन का उपहार,
प्रेम है जीवन का आधार।

मनोहर सुरपुर का आख्यान,
गगन में सूर्य-चंद्र-आह्वान,
मही की सुषमा का सम्मान,
विश्व को अमरों का वरदान,

कवि-जनों का पवित्र उद्गार,
प्रेम है जीवन का आधार।

-- गोपालशरण सिंह
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#काव्यचौपाल #प्रेमगीत

बहुत देर से सोकर जागीदिशा-वधू मौसम के गाँवअत: डरी लज्जित-सी पहुँचीछूने दिवस-पिया के पाँवआँखों वाली क्षितिज-रेख परकाला-सू...
24/07/2026

बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव
अत: डरी लज्जित-सी पहुँची
छूने दिवस-पिया के पाँव

आँखों वाली क्षितिज-रेख पर
काला-सूरज उदित हुआ
धरती का कर निज-दुहिता के
पाँव परस कर मुदित हुआ
कंपित शब्द-गोट ने सहसा
चला एक ध्वनिवाही दाँव
बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव।

मौन-शीत पसरा घर-आँगन
की गतिविधियाँ सिमट गईं,
किरणों की दासियाँ कुहासे
के अनुसर से लिपट गईं
दृष्टि अराजक हुई, छा गई
नभ से आपदकाली छाँव
बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव।

-- कुमार विश्वास
Dr. Kumar Vishwas
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#काव्यचौपाल

किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभीमुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभीमेरे रुकते ही मिरी साँसें भी रुक जाए...
24/07/2026

किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

मेरे रुकते ही मिरी साँसें भी रुक जाएँगी
फ़ासले और बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालो
अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

चलती राहों में यूँही आँख लगी है 'फ़ाकिर'
भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

-- सुदर्शन फ़ाकिर
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#काव्यचौपाल #सुदर्शनफ़ाकिर

तीरो-तलवार से नहीं होताकाम हथियार से नहीं होताघाव भरता है धीरे-धीरे हीकुछ भी रफ़्तार से नहीं होताखेल में भावना है ज़िंदा...
24/07/2026

तीरो-तलवार से नहीं होता
काम हथियार से नहीं होता

घाव भरता है धीरे-धीरे ही
कुछ भी रफ़्तार से नहीं होता

खेल में भावना है ज़िंदा तो
फ़र्क कुछ हार से नहीं होता

सिर्फ़ नुक्सान होता है यारो
लाभ तकरार से नहीं होता

उसपे कल रोटियाँ लपेटे सब
कुछ भी अख़बार से नहीं होता

-- महावीर उत्तरांचली
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#काव्यचौपाल

स्वप्न में मुझसे मिला कोईनींद मेरी रात भर रोईकौन था वह कह नहीं पाताबिन कहे भी रह नहीं पातासैकड़ों में एक था मुखड़ालह रहा...
23/07/2026

स्वप्न में मुझसे मिला कोई
नींद मेरी रात भर रोई

कौन था वह कह नहीं पाता
बिन कहे भी रह नहीं पाता
सैकड़ों में एक था मुखड़ा
लह रहा था चाँद का टुकड़ा

दृष्टि उसकी थी कहीं खोई!
स्वप्न में मुझसे मिला कोई।
नींद मेरी रात भर रोई।

आरती की गंध-सी पावन
लग रही थी शून्य का गायन
रूप क्या था एक टोना था
हो गया जो कुछ न होना था
आँसुओं से आँख जब धोई!
स्वप्न में मुझसे मिला कोई
नींद मेरी रात भर रोई।

वह नहीं बोली बुलाया भी
उठ नहीं पाई उठाया भी
चूमकर मैंने कहा गाओ
चाँद बोला, मर गई जाओ

वक्ष में भर आग वह सोई!
स्वप्न में मुझसे मिला कोई
नींद मेरी रात भर रोई।

-- रमानाथ अवस्थी
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#काव्यचौपाल

सावन झड़ियों के जैसे झम झम बोलेंगेधीरे धीरे नहीं लगाकर .......दम बोलेंगेमौन करेगा जब धारण यह देश समूचासच्चे कवि हैं कंठ ख...
23/07/2026

सावन झड़ियों के जैसे झम झम बोलेंगे
धीरे धीरे नहीं लगाकर .......दम बोलेंगे
मौन करेगा जब धारण यह देश समूचा
सच्चे कवि हैं कंठ खोलकर हम बोलेंगे !!!

-- आलोकेश्वर चबडाल
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#काव्यचौपाल

स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता | संस्करण 02 | अंक ०९  : छायाचित्र👇
23/07/2026

स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता | संस्करण 02 | अंक ०९ : छायाचित्र👇

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