08/06/2026
“कवि और कलम” शायरों का साँझा मंच का पहला ओपन माइक शो सफलतापूर्वक संपन्न
*मासूम चेहरा,शरबती आँखें,गुलाबी होंठ,मस्त अदाएं।अब इससे बढ़कर कातिल की क्या पहचान बताऊँ?*
कुरुक्षेत्र
( प्रेस नोट फ़ोटो सहित 08-06-2026)
कुरुक्षेत्र जिले के गांव मथाना स्थित विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शायरों के साँझा मंच “कवि और कलम” के तत्वावधान में पहला ओपन माइक शो का भव्य आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता दिलीप खरेरा जी ने की,जबकि मुख्य अतिथि के रूप में कृष्ण कुमार निर्माण रहे जबकि विशिष्ट अतिथि करमचंद केसर रहे व श्रीमती नीलम नरेश जी रहे।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रिंसिपल श्री विक्रम शर्मा जी, संयोजक एवं मंच संचालक ओमबीर काजल, सह-संयोजक प्रदीप गागट, तथा सहयोगी के रूप में सुरेंद्र कल्याण बुटाना,अनाम आलोक, रजत राज एवं करणजीत मान मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सह संयोजक गायक श्री प्रदीप गागट जी ने सरस्वती वंदना गाकर किया। प्रिंसिपल विक्रम शर्मा जी ने अपनी शानदार कविताओं एवं हास्य-चुटकुलों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। इसके पश्चात हरियाणवी गजलकार श्री करमचंद केसर जी,कानपुर से रजत राज़ एवं दिल्ली से आए अनाम आलोक,संजय कुमार,सक्षम कुमार ,सुखचैन मुनियारपुर,शीशवती गागट और नन्हे कवि वैभव काजल ने अपनी बेहतरीन रचनाओं की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
श्री विक्रम शर्मा जी ने कहा कि---देख तेरे संसार की हालत,क्या हो गई भगवान।कॉकरोच बन गया इंसान।राम ना बना, श्याम ना बना, ना बना हनुमान।कॉकरोच बन गया इंसान।
करमचंद केसर ने कहा कि “दीवा मनैं चस्या राख्या सै,बाळ तै कती बचा राख्या सै,केसर हमनैं अपणे दिल पै,तेरा नाम लिख्या राख्या सै।
कार्यक्रम अध्यक्ष दलीप खरेरा जी ने कहा कि लफ़्ज़ों का श्रृंगार है,भावों का इज़हार है,
बोलते अहसास हैं ,अगर कलम में धार है।
मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार निर्माण जी ने कहा कि मासूम चेहरा,शरबती आँखें,गुलाबी होंठ,मस्त अदाएं।
अब इससे बढ़कर कातिल की क्या पहचान बताऊँ?
श्रीमती नीलम नरेश जी ने कहा कि भरी महफिल क्या कह दूं,मेरे ज़ज्बात रूठे हैं।
मन के भाव ऊभे हैं,कलम के ताव रूठे हैं।
कानपुर से आए गजलकार रजत राज ने कहा कि हम अपने इश्क़ के जुनूँ तक आ गए,जिस्मानी सफर से रूह तक आ गए।
दिल्ली से आए हुए गजलकार अनाम आलोक जी ने कहा कि -
फ़िक्र का देकर हवाला बंदिशों में मत रखो,औरतें खुद ढूँढ लेंगी आदमी अपने लिए।
संयोजक ओमबीर काजल ने फरमाया कि---
पैसे तो भाई थामनेै भी रै,खूब उड़ाए होंगे।
कदे सोच्ची क्युकर बाब्बू नै वें,नोट कमाए होंगे।
आयोजन सहायक सुरेंद्र कल्याण बुटाना ने कहा कि दिल में दर्द है,दर्द है इस बात का दर्द नहीं।
दर्द सिर्फ इस बात का है कि बेदर्दी समझा दर्द नहीं।
करणजीत सिंह मान ने कहा कि-
बगावत की किसी घर से,अगर कुछ भांप उठती है,बुझाओ आग कहती है,ये दिल्ली कांप उठती है।
सुखचैन सिंह मनियारपुर ने कहा कि -आप रखो सोरी अपने पास ही,दी हुई चीजें हम वापिस लिया नही करते,यार ऐसे बेकद्री तो ना करते,बोल देते एक बार की बात नहीं करनी,तुमसे हम बात ही नहीं करते।
संजय दादूपुर ने कहा कि-क्या मैं इश्क में हूँ,कोई मुझे बताएगा,मेरी नींद,चैन और होश सब उड़ गई है,क्या कोई इसे वापस देकर जाएगा।
सोलह वर्षीय सक्षम कुमार जिन्हें हॉल में 'चेतन दिशा' किताब लिखकर हरियाणा साहित्य अकादमी से प्रशस्ति पत्र मिला है,ने कहा कि--
धुआं धुआं है आसमान,संकट में है धरती हमारी।जिसने दिया जन्म हमको,आज रोती, वही बेचारी।
दस वर्षीय नन्हें कवि वैभव काजल ने कहा कि--
जैसा इंसान वैसी ही तहजीब अपनाता हूँ,मैं रोज हंसकर जीने की तरकीब बनाता हूँ।
मंच पर कवियों,शायरों एवं साहित्य प्रेमियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्य,कविता एवं अभिव्यक्ति की कला को बढ़ावा देना तथा नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना था।उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की।
अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।