अल्फाज़ ऐ आरज़ू

अल्फाज़ ऐ आरज़ू मैं मोहब्बत हूँ, तकल्लुफ़ या दस्तूर नहीं,

इतना आसान नहीं हर कोई निभा ले मुझको...!!

वो गहनों, कपड़ों के संग, दो चार किताबें लाई थी,भूल गई है बक्सों में रख, कहीं किसी तहखाने में।उसको इतना वक्त कहां था, अपन...
23/07/2025

वो गहनों, कपड़ों के संग, दो चार किताबें लाई थी,
भूल गई है बक्सों में रख, कहीं किसी तहखाने में।

उसको इतना वक्त कहां था, अपने सपने देखे वो,
उसने खुद के ख्वाब जलाए, चूल्हे रोज जलाने में।

समझौता कर लेती वो भी, बातें झूठी होती तो,
उसकी जंग रही है केवल , सच को सच मनवाने में।

साथ बैठते कभी अगर तुम, तो तुमने देखा होता
उसका हाथ जला था उस दिन, खाना गर्म खिलाने में।

खुल कर लड़ लेती वो भी, दुश्मन बाहर के होते तो,
उसकी सारी शक्ति लगी है, अपनों को समझाने में।

मिलते अवसर उसे अगर भूगोल बदल सकती थी वो,
जिसकी सारी उम्र चली गई रोटी गोल बनाने में।

मृत्यु से लड़ नियति-पत्र पर, लिखती जो नित नवजीवन,
उसको कितना वक्त लगा है, खुद को लिखने गाने मे।
: Swarika Kirti ✍️

06/07/2025

बचपन में खाना मनपसन्द न होतो माँ कई और ऑप्‍शन देतीं...अच्‍छा घी लगा केगुड़ के साथ रोटी खा लो.अच्‍छा आलू की भुजिया बना दे...
26/05/2025

बचपन में
खाना मनपसन्द न हो
तो माँ कई और ऑप्‍शन देतीं...

अच्‍छा घी लगा के
गुड़ के साथ रोटी खा लो.

अच्‍छा आलू की
भुजिया बना देती हूँ चलो.

अच्छा चलो
दूध के साथ चावल खा लो...

माँ नखरे सहती थी,
इसलिए उनसे लड़ियाते भी थे.

लेकिन
बाद में किसी ने
इस तरह लाड़ नहीं दिखाया.

मैं भी अपने आप
सारी सब्जियाँ खाने लगीं.

मेरे जीवन में
माँ केवल एक ही है,
दोबारा कभी कोई माँ नहीं आई.

पति कब
छोटा बच्‍चा हो जाता है,
कब उस पर मुहब्‍बत से ज्‍यादा दुलार बरसने लगता है... पता ही नहीं चलता.

उनके सिर में
तेल भी लग जाता है,
ये परवाह भी होने लगती है कि उसका पसन्दीदा (फेवरेट) खाना बनाऊँ, उसके नखरे भी उठाए जाने लगते हैं.

लड़कों के
जीवन में कई माँएँ आती हैं,

बहन भी माँ हो जाती है,

पत्‍नी तो होती ही है....

बेटियाँ भी
एक उम्र के बाद
बूढ़े पिता की माँ ही बन जाती हैं.

लेकिन
लड़कियों के पास
जीवन में केवल एक ही माँ होती है.

बड़े होने के बाद
उसे दोबारा कोई माँ नहीं मिलती, वो लाड़-दुलार, नखरे, दोबारा कभी नहीं आते.

लड़कियों को
जीवन में केवल और केवल
एक बार हाँ एक ही बार मिलती है माँ.

द्वंद्व कहां तक पाला जाए । युद्ध कहाँ तक टाला जाए ।।तू भी है  #राणा का  #वंशज फेंक जहां तक भाला जाए ।दोनों ओर लिखा हो  #...
09/05/2025

द्वंद्व कहां तक पाला जाए ।
युद्ध कहाँ तक टाला जाए ।।
तू भी है #राणा का #वंशज फेंक जहां तक भाला जाए ।

दोनों ओर लिखा हो #भारत सिक्का वही उछाला जाए ।।
इस #बिगड़ैल_पड़ोसी को तो फिर #शीशे में ढाला जाए ।
तू भी है राणा का वंशज फेंक जहां तक भाला जाए ।।

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