09/12/2023
यह जीवन सफर है! तुम चलते ही जाना ।
थम जो गया वो विस्मृत हुआ है,
क्या खोया? क्या पाया? वो जाना कहां है।
दृढ़ संकल्पित मन हो सदा मुस्कुराना,
यह जीवन सफर है! तुम चलते ही जाना।
कभी परेशानियां तुम्हें! घेर ले जो,
कभी जिन्दगी में निराशा दिखे तो।
मुख पे उदासी न तन पे थकन हो,
सहजता, सरलता से तुम पार पाना।
यह जीवन सफर है! तुम चलते ही जाना।
सहज है जो जग में वो पर्वत हुआ है,
हुई नदियां सहज तो सागर मिला है।
सागर की गहराई से तुम पार जाना,
यह जीवन सफर है, तुम चलते ही जाना।
कभी विवशता! पग में फंदा लगाए,
संबंधों की किट –किट तुम्हें जो सताए।
तुम रहना समादार न उदासीन होना।
संबंधों में जिरह सदा से रहा है,
मुख–बधीर को देखो! स्वर यहीं तो मिला है।
विष भरकर भुजंग क्या ही है पाता,
किट—पतंगों से क्षुधा है मिटाता।
चंदा है शीतल तो कितना भला है,
तानो के तारे न तुम तोड़ लाना।
नव चेतन की शाखा से फिर तुम मिलोगे,
बुद्धि की फिर तुम समीक्षा करोगे।
मौसम की तरह है संबंधी की बातें,
विवशता स्वयं में पलभर की रातें।
प्रभात उमंगों को फिर लायेगा,
मुस्कुराकर फिर तुम हृदय से लगाना।
यह जीवन सफर है, तुम चलते ही जाना।
दंभी हुआ जो पाया है किसको?
तृष्णा में खोकर न खुदको जलाना।
यह जीवन सफर है,तुम चलते ही जाना।
न हो कोई घृणा, न द्वेष समाए,
न लोभ के बादल तुम्हें घेर पाए।
चमकता सदा से चंदा गगन में,
निर्मल हो मन तो सदा गुनगुनाए।
तन -मन से निर्मल हो तुम जीत जाना।
यह जीवन सफर है तुम चलते ही जाना।
भला हो भला कर भलाई जगत है,
भला हो भलाई का भलमानस मिला है।
भलाई की चादर! तुम ओढ़ आना।
यह जीवन सफर है, तुम चलते ही जाना।
यह जीवन सफर है, सीख की डगर है।
तुम चलते ही जाना। तुम चलते ही जाना।
आदि 🙏