कुछ शब्द अंतर्मन को छूते हुए

  • Home
  • India
  • Jodhpur
  • कुछ शब्द अंतर्मन को छूते हुए

कुछ शब्द अंतर्मन को छूते हुए "कुछ शब्द जो सीधा अंतर्मन को छू जाए
दिल से निकले एहसास, कविताओं की शक्ल में ।
जुड़िए मेरे सफर में ...भावनाओं की कलम से"

20/07/2026

तुम्हारे कदमों की थाप उनके दिलों को दहका रही है...
दहकने दो कुछ उन्हें भी...
क्योंकि ये आग तुमने भी तो अपने सीने पर खाई है....

Geetika ke gagar se

जय हिंद.... जय भारत मेरे देश की वीर सेना....भारत मां के सच्चे लाल......आपको बारंम्बार नमन....और कोटि-कोटि वंदन.....     ...
07/05/2025

जय हिंद.... जय भारत
मेरे देश की वीर सेना....
भारत मां के सच्चे लाल......
आपको बारंम्बार नमन....
और कोटि-कोटि वंदन.....
armstrong #कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए #

रांची से प्रकाशित झारखंड प्रहरी दैनिक में मेरी कविता
04/05/2025

रांची से प्रकाशित झारखंड प्रहरी दैनिक में मेरी कविता

03/05/2025

यहां भी ट्रोलिंग.....
#कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए #

29/04/2025

परिवर्तन की बयार को बहाने दें.... #कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए

27/04/2025

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा........

पहलगाम हमला दिल को तोड़ देने वाला, झकझोर देने वाली वो घटना जो आसानी से अपने स्मृति पटल से हटाई नहीं जा सकती ।कितने ही लोगों के घर टूटे, कितनों के ही सुहाग उजड़ गए और सब कुछ तहस -नहस हो गया ।जिनकी नई जिंदगी अभी शुरू भी ना हुई थी उससे पहले ही उसका अंत हो गया। सब कुछ बहुत ही भयानक और बहुत ही वीभत्स और एक डरा देने वाला एहसास ।जब हम सब यह सोचकर ही कॉप रहे हैं तो जिनके ऊपर बीती, उनके दर्द की तो कोई इंतहा ही नहीं है, लेकिन इन सब के बीच में भी हम में से ही कुछ लोग जो उस घटना के अगले दिन कश्मीर घूमने पहुंचते हैं तो जब एक पत्रकार द्वारा पूछने पर कि कैसा लगा... तो बड़ी ही संवेदनहीनता से उनका जवाब आता है कि..... बहुत खूब ....बहुत अच्छा .. ।यहां कोई डर नहीं है ...हमारा होटल बहुत अच्छा है ...यहां का खाना बहुत अच्छा है.... यहां सब कुछ बहुत शांत है और अपनी कश्मीर आने की खुशी को बयां करते दिख रहे हैं ।कहीं से भी उनके चेहरे पर ना कोई दर्द और ना कोई पीड़ा दिख रही है उस एक दिन पहले हुए घटनाक्रम के लिए ।क्या यह लोग निर्लज्जता और संवेदनहीनता की सारी हदे पार कर चुके हैं, क्या इनको किसी का दुख दुख नजर नहीं आता ,क्या इनको उन पहलगाम के पीड़ितों का दुख नजर नहीं आता ।धिक्कार है ऐसे लोगों पर जो सिर्फ अपनी खुशी देखते हैं और दूसरों की पीड़ा को क्षणिक मात्र भी महसूस नहीं कर पाते।
Those people should be ashamed of themselves.
#कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए
# pehlgam # kashmir

25/04/2025

त्याग की मूरत ना बने.....

#कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए

23/04/2025

खिलखिलाते चेहरो में जो छिप कर बैठी है......
वो मुस्कुराहटें अक्सर झूठी होती हैं.......
लेकिन मुस्कुराहटें झूठी ही सही.....
पर रोते हुए चेहरों से.....
हमेशा अच्छी होती है.....
इनमें वो अदा होती है......
कि हर गम को अपने आगोश़ में ले ले।

'गीतिका के गागर से'

#कुछ_शब्द_अंतर्मन_को_छूते_हुए

16/04/2025

Address

Jodhpur

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when कुछ शब्द अंतर्मन को छूते हुए posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category