20/06/2022
पिता जी को समर्पित मेरी एक कविता,
पिता वो शब्द है,जिसे व्याकरण न समझ पाया,
पिता वो भावनाएं है, जिसे हर दिल ने अपनाया,।
पिता वो ही है ,शक्ति ,जिससे हमारे पैर चलते है,
पिता वो ऑक्सीजन है,जिससे परिवार पलते है,
पिता भोजन है जीवन है पिता वो ऑक्सीजन है,
वो पिता ही है,जिससे सुरक्षित हम परिवार जन है,
पिता प्यार है, दुलार है अनमोल है,
पिता से ही तो जीवन का आज मोल है,
पिता वो सुरीली गीत है , गान है,
पिता है तो जीवन में सारे अरमान है,
जो अपने गम को नहीं जताता है,
दर्द होने पर भी जो मुस्कुराता है,
वो पिता ही है,साहब
जो बीमार होने पर भी काम को जाता है।
अगर संघर्ष कही भी है,
मुझे बस एक में सूझता,
पिता के बाद , दूजा कोई संघर्ष ना दिखता।
कवि - अंकित कुमार (अर्पण)