11/05/2026
सआदत हसन मंटो उर्दू साहित्य के सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद लेखकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 11 मई 1912 को समराला, पंजाब (अब भारत में) में हुआ था। मंटो ने अपने लेखन में समाज की कड़वी सच्चाइयों, इंसानी मनोविज्ञान, विभाजन की त्रासदी, वेश्यावृत्ति, गरीबी और पाखंड को बेबाकी से प्रस्तुत किया। उन्होंने लगभग 250 से अधिक कहानियाँ, अनेक रेडियो नाटक, लेख और फिल्मी पटकथाएँ लिखीं। उनकी प्रसिद्ध कहानियों में टोबा टेक सिंह, खोल दो, ठंडा गोश्त, बू और काली सलवार शामिल हैं। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए, जहाँ उनकी लेखनी पर कई बार अश्लीलता के मुकदमे भी चले। मंटो का मानना था, “अगर आपको मेरी कहानियाँ बर्दाश्त नहीं होतीं, तो इसका मतलब है कि यह ज़माना ही नाक़ाबिले-बर्दाश्त है।” 18 जनवरी 1955 को लाहौर में उनका निधन हो गया। आज मंटो को सच बोलने वाले निर्भीक लेखक और मानवीय संवेदनाओं के महान कथाकार के रूप में याद किया जाता है।