04/04/2026
तेरा नाम…
लफ़्ज़ लिखूँ तो चिंगारी बन जाए, मैं चाहूँ तो किताबें राख कर दूँ। ये खेल नहीं मेरी ख़ामोशी का, मैं सच लिखूँ — तो शहर जला दूँ। क़लम उठे तो क़यामत उतर आए, हर हरफ़ में छुपा एक तूफ़ान है, तू देखता रह जाएगा खामोश, मैं लिख कर तेरा नाम… सब कुछ जला दूँ।