Kumar Sanju

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08/05/2025

मै भी एक दिन इस दुनिया से रुखसत हो जाऊंगा।
तुम मुझे ढूंढोगे पर मैं तुम्हें तस्वीर में नजर आऊंगा । इसलिए जब तक वक्त है ,
मेरे पास-मेरे मन में ठहर जाओ,
बस एक बार कह दो-
तुम मेरे हो, हमेशा मेरे रहोगे।😊👋💕🔥

इस दुनिया के लोग‌  # कुछ अजब - कुछ गजब # able  # Jaipur  #
26/01/2025

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12/01/2025
15/11/2024
05/07/2024

डर से -
डरने की कोई बात नहीं...

डर से डरो मत क्योंकि डरने की कोई वजह नहीं।
क्या डर को कभी देखा है तुमने ? क्या डर से कभी बातकी है तुमने?

डर एक भूत है , भूत से डरने की कोई वजह नहीं क्या भूत को कभी देखा है तुमने? क्या भूत से कभी बात की है तुमने ?
जिसे देखा नहीं, जिसे छुआ नहीं, उससे डरने की भी कोई वजह नहीं ।

डर सिर्फ़ और सिर्फ़ - शत्रु द्वारा तुम्हें परास्त करने की चाल है, इस चाल को समझो और निडर बनो।

--- 'कुमार संजू'

30/06/2024

~: बचपन और बारिश :~
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अल्हड़-सा बचपन और अल्हड़-सी बारिश ,
शैतानी बचपन और शैतान सा बारिश ।

पापा-मम्मी की डांट खाकर गुस्सा होना
और जैसे बारिश का गुस्सा होकर ताबड़तोड़ बरसाना ।

मासूम बनकर गलती को छुपाना और जैसे बारिश का मासुम बनकर रिमझिम बरसना ।

रूठकर पलंग के नीचे छिप जाना और जैसे रूठ कर बारिश का बादलों में छुप जाना ।

कभी मस्ती - कभी सुस्ती और जैसे रुक-रुक कर बारिश का बरसना ।

अल्हड़-सा बचपन और अल्हड़-सी बारिश ,
शैतानी बचपन और शैतान सा बारिश ।।

--- संजीत दासगुप्त ‘कुमार संजू’

16/06/2024

~: पापा जब भी आपकी याद आती है… :~
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पापा जब भी आपकी याद आती है
हृदय में बेचैनी सी जाती है
आसमां के लाखों झिलमिलाते सितारों में
मेरी निगाहें आपको ढूंढने लग जाती है।


पापा आपने जब साथ छोड़ा था,
तब मैं कक्षा सात का छात्र था।
इतनी जल्दी चले जाओगे मैंने ये सोचा न था
आपसे दूर होने के लिए उस वक्त मैं तैयार न था


पापा आपके जाने के बाद से अकेला महसूस करता हूं
हर पल तन्हाई के आलम में रहता हूं
कोई पुछता है – कैसे हो ?
“तो अच्छा हूं “ कह देता हूं
पर पापा अन्दर हि अन्दर टुटा रहता हूं मैं


आपकी याद आती है तो आपकी तस्वीर देख लेता हूं मैं;
छोड़कर तो चले गए हैं आप, फिर भी आपको हमेशा अपने इर्द गिर्द महसूस करता हूं मैं।


वैसे तो इस दुनिया के सारे गम
मै हंस कर यूं ही ढो लेता हूं
पर जब भी कभी बेबस हो जाता हूं
मै तन्हाई में रो देता हूं।


पापा जब भी आपकी कमी खलती है
यादों में आपसे मुलाकात कर लेता हूं
आपसे अब मिलना मुमकिन नहीं
इसलिए आपकी तस्वीर से बात कर लिया करता हूं।


“सादा जीवन उच्च विचार “
– ये थे आपके संस्कार,
आपके संस्कार को आगे बढ़ाना है ,
पापा आपने हमें जो सिखाया था,
वही अपने बच्चे को सिखाया है।
पापा मुझे भी एक दिन आपके पास आना है;
पापा मुझे भी एक दिन आपके पास आना है..

--- संजीत दासगुप्त ‘कुमार संजू’

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