18/08/2026
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
"अल्लाह तआला ख़यानत से हासिल किए गए माल का सदक़ा क़बूल नहीं फ़रमाता और न ही बग़ैर वुज़ू के नमाज़ क़बूल फ़रमाता है।"
हवाला: सुनन अबी दाऊद, हदीस नंबर: 59
इस हदीस में रसूल अल्लाह ﷺ ने इबादत की क़बूलियत के लिए पाकीज़गी और हलाल माल की अहमियत बयान फ़रमाई है। यानी जिस तरह नमाज़ के लिए शरई तहारत ज़रूरी है, उसी तरह अल्लाह तआला की राह में ख़र्च किया जाने वाला माल भी पाकीज़ा और जायज़ तरीक़े से हासिल किया हुआ होना चाहिए।
ख़यानत और नाहक़ तरीक़े से हासिल किए गए माल को सदक़ा कर देना उस गुनाह को नेकी में तब्दील नहीं करता। इससे यह सबक़ मिलता है कि मोमिन को नेकी करने के साथ यह भी देखना चाहिए कि नेकी का ज़रिया दुरुस्त और हलाल है।
मिसाल के तौर पर अगर कोई शख़्स किसी दूसरे का माल नाहक़ ले कर उसमें से कुछ रक़म सदक़ा कर दे, तो इस सदक़े से असल ख़यानत का अज़ाला नहीं होगा। बल्कि ज़रूरी है कि हक़दार का माल उसे वापस किया जाए और अल्लाह तआला से सच्ची तौबा की जाए।
इसी तरह नमाज़ के लिए वुज़ू ज़रूरी होने की सूरत में तहारत का एहतिमाम किया जाए। यह हदीस हमें याद दिलाती है कि अल्लाह तआला की इबादत सिर्फ़ ज़ाहिरी अमल का नाम नहीं, बल्कि पाकीज़गी, दयानत और हलाल कमाई भी दीन का अहम हिस्सा हैं।
इसलिए हमें अपने माल, मामलात और इबादात को शरीअत के मुताबिक़ पाकीज़ा रखने की कोशिश करनी चाहिए।