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यह रिवायत जन्नत की अज़मत, उसकी नेमतों की विशालता और अल्लाह तआला की बेपनाह रहमत को बयान करती है। "तूबा" जन्नत का एक मुबार...
16/06/2026

यह रिवायत जन्नत की अज़मत, उसकी नेमतों की विशालता और अल्लाह तआला की बेपनाह रहमत को बयान करती है। "तूबा" जन्नत का एक मुबारक और अज़ीम दरख़्त है, जिसका ज़िक्र अहादीस में बड़ी फ़ज़ीलत के साथ आया है। उसका इतना बड़ा होना कि एक तेज़ रफ़्तार घुड़सवार सौ साल तक उसके साये में चलता रहे और फिर भी उसका साया खत्म न हो, यह इस बात की तरफ़ इशारा है कि जन्नत की नेमतें हमारी दुनिया की समझ और कल्पना से कहीं बढ़कर हैं।
कुछ रिवायतों में यह भी आया है कि जन्नतियों के लिबास इस दरख़्त की कलियों से निकलेंगे। इससे मालूम होता है कि जन्नत में हर नेमत बिना किसी मेहनत और तकलीफ़ के हासिल होगी, और वहाँ की हर चीज़ इंसान की ख़्वाहिश के मुताबिक़ होगी।
यह रिवायत हमें जन्नत की चाहत पैदा करने, नेक आमाल करने और अल्लाह तआला की फ़रमाँबरदारी में ज़िंदगी गुज़ारने की तरग़ीब देती है, ताकि हम भी उन खुशकिस्मत लोगों में शामिल हों जिन्हें जन्नत और उसकी बेशुमार नेमतें नसीब हों।
दुआ:
अल्लाह तआला हमें जन्नतुल-फ़िरदौस अता फ़रमाए और जन्नत की तमाम नेमतों का हक़दार बनाए। आमीन।



















फ़रमान-ए-मुस्तफ़ा ﷺ"बेशक अल्लाह तआला, उसके फ़रिश्ते, आसमानों और ज़मीन की तमाम मख़लूक़ात, यहाँ तक कि अपने बिल में रहने वा...
16/06/2026

फ़रमान-ए-मुस्तफ़ा ﷺ

"बेशक अल्लाह तआला, उसके फ़रिश्ते, आसमानों और ज़मीन की तमाम मख़लूक़ात, यहाँ तक कि अपने बिल में रहने वाली चींटी और पानी में रहने वाली मछलियाँ भी उस शख़्स के लिए दुआ-ए-ख़ैर करती हैं जो लोगों को भलाई और अच्छी बातें सिखाता है।"

हवाला: जामे तिर्मिज़ी, जिल्द 2, सफ़्हा 93

तशरीह: यह हदीस इल्म-ए-दीन सिखाने और लोगों को नेकियों की तरफ़ बुलाने की फ़ज़ीलत बयान करती है। जो व्यक्ति लोगों को भलाई, नेक अख़लाक़ और दीन की सही बातें सिखाता है, वह अल्लाह तआला की ख़ास रहमत का हक़दार बनता है। उसकी यह खिदमत इतनी अज़ीम है कि फ़रिश्ते और तमाम मख़लूक़ उसके लिए दुआ करती हैं। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि जो भलाई उसे मालूम हो, उसे दूसरों तक भी पहुँचाए।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:"दुनिया की मिसाल आख़िरत के मुक़ाबले में ऐसी है जैसे तुम में से कोई अपनी उंगली समुद्र में डुबोए, ...
16/06/2026

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

"दुनिया की मिसाल आख़िरत के मुक़ाबले में ऐसी है जैसे तुम में से कोई अपनी उंगली समुद्र में डुबोए, फिर देखे कि उसकी उंगली समुद्र का कितना पानी अपने साथ लेकर आई है।"

हवाला: Jami' at-Tirmidhi, हदीस नंबर: 2323

तशरीह: इस हदीस में रसूलुल्लाह ﷺ ने दुनिया और आख़िरत के फ़र्क़ को बहुत ख़ूबसूरत अंदाज़ में समझाया है। जिस तरह समुद्र के मुक़ाबले में उंगली पर लगा पानी बहुत मामूली और नगण्य होता है, उसी तरह आख़िरत की हमेशा रहने वाली ज़िंदगी के सामने दुनिया की पूरी ज़िंदगी बहुत छोटी और अस्थायी है। इसलिए मोमिन को दुनिया की चमक-दमक में खोने के बजाय आख़िरत की तैयारी पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।

15/06/2026

कमेंट में "الحمد لله" लिखिए अगर आप चाहते हैं कि अल्लाह आपकी परेशानियाँ आसान फ़रमा दे।

Allahu akbar
15/06/2026

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15/06/2026

जो दूसरों पर रहम करता है, अल्लाह उस पर रहम करता है।

15/06/2026

मौत अचानक आती है, इसलिए तौबा को कल पर मत छोड़ो।

15/06/2026

सच बोलने वाला अल्लाह और लोगों के नज़दीक इज़्ज़त पाता है।

15/06/2026

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14/06/2026

गुनाह छोटा हो या बड़ा, अल्लाह से माफ़ी मांगने में देर न करो।

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