21/07/2026
दिल्ली में अपनी जायज़ मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे शिक्षित बेरोजगार युवाओं पर बल प्रयोग की घटना बेहद चिंताजनक है।
लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को लाठी के दम पर नहीं दबाया जा सकता। सरकार का दायित्व है कि वह युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुने, उनसे संवाद करे और रोजगार से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाले।
देश का युवा अवसर, सम्मान और न्याय की अपेक्षा रखता है। असहमति का जवाब दमन नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद होना चाहिए। युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी उम्मीदों को सुनिए, क्योंकि मजबूत भारत का भविष्य उसके युवाओं से ही तय होगा।
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