06/06/2026
जमीन मेरी थी। मालिक मैं था।
लेकिन फैसला मेरा नहीं था।
जिस मिट्टी को मेरे पिता और दादा ने अपने खून-पसीने से सींचा, आज उसी पर किसी और का हक़ तय किया जा रहा है।
एक किसान के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं होती,
वह उसकी पहचान, उसकी रोज़ी-रोटी और उसके बच्चों का भविष्य होती है।
जब जमीन छिनती है, तब सिर्फ खेत नहीं जाता,
पूरी पीढ़ी का सहारा चला जाता है।
#किसान_की_आवाज़