26/03/2023
मजदूर की दुर्दशा
देश हो विदेश हो या कहें संसार में मजदूर के बिना कोई कार्य संभव नहीं है. मनुष्य के जन्म से लेकर मनुष्य क़ी मृत्यु तक का कार्य मजदूर ही करता है. रहने के लिए झौपड़ी, मकान और कोठियां बनाना, खाने के लिए अनाज पैदा करना, सब्जी, दूध और फल मजदूरों के द्वारा ही पैदा किए जाते हैं.
देश में कोई भी प्रोजेक्ट लगाना हो जैसे सड़क बनाना, सीवर बनाना और औद्योगिक यूनिट लगाना, पानी पीने के लिए कुआं खोदना, बिल्डिंग बनाना ये सब काम मजदूर ही तो करता है.
आज मजदूरों को शूद्र के नाम से, अति शूद्र के नाम, अछूत क़े नाम से और छोटी जाति के नाम से अपमानित किया जाता है. यह भारत देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. सरकार बनाने के लिए वोट चाहिए तो मजदूरो के वोट चाहिए. जब मजदूरों के वोट से सरकार बन जाती हैं तो सबसे ज्यादा शोषन मजदूरों का होता हैं.
सरकार ने बड़े बड़े जमीदारों, उद्योगपतियों और व्यापारियों के फायदे क़े लिए अच्छे-अच्छे कानून बना के मजदूरों को दबाने का काम किया जाता रहा है. मजदूरों का समाज के नाम पर जाति के नाम पर गरीबी के नाम से शोषण किया जाता है.
जो भी औद्योगिक इकाई गठित की जाती हैं उसमें शुरू से लें कर जो उसने प्रोडक्ट तैयार होता है और उससे जो आमदनी होती है उसमें अहम हिस्सा मजदूर का ही होता है. इसके विपरीत विडंबना है जब कोई औद्योगिक इकाई किसी भी कारण से बर्बाद हो जाती है तो सरकार उसका मुआवजा देती है और मालिक को कोई फर्क नहीं पड़ता. सरकार किसी भी रूप में उस औद्योगिक मालिक के नुकसान की भरपाई सरकार करती है. परंतु मजदूरों को उस औद्योगिक इकाई से निकाल दिया जाता है और दूसरी जगह काम न मिलने के कारण भुखमरी के शिकार होने लगते हैं.
इसी प्रकार जमीदारों को अच्छी फसल पैदा करने में मजदूरों का अहम् भाग होता हैं. इन मजदूरों क़े कारण उनकी इनकम बढ़ती है. जमीदारो क़े परिवार का गुजारा बढ़िया तरिके से चलता हैं. हर साल वो अपनी आमदनी बढ़ाता है और इनकी पीढ़ी दर पीढ़ी आराम से अपना जीवन यापन करती हैं.
परंतु मजदूर की वजह से उस मजदूर को प्यार से सम्मान भी नहीं मिलता. मजदूरी भी सम्मान जनक नहीं मिलती. जाति और मजदूर के नाम पर उन पर शोषण किया जाता है.
दूसरी तरफ यदि प्रकृति की तरफ से कोई फसल को नुकसान हो जाता है तो सरकार उनका मुआवजा देकर उनके नुक्सान की क्षतिपूर्ति करती है. अर्थात जमीदार को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होता है. परंतु मजदूरों को फसल बर्बाद होने पर सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिलती है.
मैं सरकार क़े सामने सुझाव रखता हूं तथा मांग करता हूं कि जिस प्रकार औद्योगिक इकाई में घाटा होने से या किसी प्रकार नुकसान होने से सरकार उसकी भरपाई करती है. जमीदारो की फसल बर्बाद होने पर जमीदारो को आर्थिक सहायता देती हैं उसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र व जमीदारों के यहां पर काम करने वाले मजदूरों को सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता में से मजदूरों को उसी अनुपात में आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए.
जो लोग इस बात से सहमत हैं वह अपने कमेंट जरूर करें.
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जय मूलनिवासी जय किसान जय जवान
लिखी राम जदवंशी