17/11/2022
ज़माना गुजर रहा है नफरत के दौर से
खुशियों के काफिले यहाँ सूने पड़े हैं
कोई जला भी दे इश्क़ मोहब्बत की मशाल
उसे रोकने वाले भी यहाँ हजारों खड़े हैं
- मुहम्मद आसिफ अली
#محمّدآصفالی Muhammad Asif Ali Poet