29/03/2026
दोस्त होते तुम तो तुमको भूलना मुमकिन भी था,
एक दुश्मन को भला हम भूल जाते किस तरह ।
दिल में जो नक्से वफ़ा तुम छोड़कर यूँ चल दिये,
उन लकीरों को भला हम यूँ मिटाते किस तरह ।
तुम थे आदत की तरह ,साँसो में घुलकर बस गये,
खुद से खुद को इस कदर हम दूर करते किस तरह ।
जिंदगी बस नाम है एक ख़्वाब की ताबीर का,
ख़्वाब ही टूटे तो फिर ख़ुद को बचाते किस तरह ।
✍️तनुजा राय