Dil Ki Baat Dil Tak - Sahil Kumar Upadhyay

Dil Ki Baat Dil Tak - Sahil Kumar Upadhyay
“साहिल कुमार उपाध्याय की कलम से �
दिल की बातों को शब्दों में ढालकर,
सीधे आपके दिल तक �
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16/06/2026

👉पिता की विनम्रता
अपने से सीख लेके, अपने ज्ञानी बनल बा।
कह ता बबुआ की निक तोहार दहल बा।।😭😭
✍️ साहिल कुमार उपाध्याय

14/04/2026

गज़बे नू सुनात बा
ए जी गज़बे नू सुनात बा, जिनीगिया के मेला में, खुश रहे के झमेला में।
लोग विशरात बा, ए जी गज़बे नू सुनात बा।।
दिन दुपहरिया में, रात के अनहरिया में।
केहू ना चिनात बा, ए जी गज़बे नू सुनात बा।।
काम बढ़ुए त हित बाटे, काम खत्म त ठीक बाटे।
इहे कहके गईल ऊहो, आ हमरा प खीस बाटे।।
दिन दुपहरिया में, धावल उहो आवेला।
आइके भईया भईया कहे, आ नींद से जगावेला,
कमवा ओकर हो गईला पर, चाय भी फूरमावेला।।
हमरा से खिसी आईल रहे, काम पड़ल त आईल रहे।
भईया भईया कहे, लेकिन भीतरा से शकुचाईल रहे।।
निक तनका लागल हमके, फ़ेनू ओहके समझईनी हम।
ए बबुआ, खिसी आईल ना जाला, ई हे बतिया समझवनी हम।।
✍️ साहिल कुमार उपाध्याय
Dil Ki Baat Dil Tak - Sahil Kumar Upadhyay

Dil Ki Baat Dil Tak - Sahil Kumar Upadhyay👉  सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।
23/03/2026

Dil Ki Baat Dil Tak - Sahil Kumar Upadhyay
👉 सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।

👉 सुनो कहानी रीत पुरानी 👈
सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।
अपने प्रीत का अपने मीत का गीत सुनाने आया हूँ।।

चलो बन्दे उस काल गली में, जहां प्रीत अकाल पड़ी है।
ज़र्र- ज़र्र हुआ साकार भली है, रीत बताने आया हूँ।। सुनो...

पहुँचा जब उस काल गली में, नज़र ना आया पार नली में।
देखा भू- सायी पड़ा है, मन मारे चित चोर बेचारे।।

हम भी अब कुछ समझ न पाए, चितवन से चित चोर चुराये।
कहाँ हूँ मैं, कुछ समझ न पाऊँ, प्रीत अमर की कैसे गाऊँ।।

हुआ भला है या मन मैला है, गीत मैं गाता जाऊँ।
सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ...

जब प्रीत नगरियां चला मैं अपने, मीत मिले छूटे सब सपने।
हुआ देर पर हुआ सबेरा, बसने लगा फिर अपना बसेरा।।

चलने लगा जब तू है मेरे, लगे प्रीत के होड़ है तेरे।
लक्ष्य साधने आया हूँ, लक्ष्य साधने आया हूँ।

सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।
अपने प्रीत का अपने मीत का गीत सुनाने आया हूँ।।
👉 साहिल कुमार उपाध्याय

👉 सुनो कहानी रीत पुरानी 👈सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।अपने प्रीत का अपने मीत का गीत सुनाने आया हूँ।।चलो बन्...
23/03/2026

👉 सुनो कहानी रीत पुरानी 👈
सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।
अपने प्रीत का अपने मीत का गीत सुनाने आया हूँ।।

चलो बन्दे उस काल गली में, जहां प्रीत अकाल पड़ी है।
ज़र्र- ज़र्र हुआ साकार भली है, रीत बताने आया हूँ।। सुनो...

पहुँचा जब उस काल गली में, नज़र ना आया पार नली में।
देखा भू- सायी पड़ा है, मन मारे चित चोर बेचारे।।

हम भी अब कुछ समझ न पाए, चितवन से चित चोर चुराये।
कहाँ हूँ मैं, कुछ समझ न पाऊँ, प्रीत अमर की कैसे गाऊँ।।

हुआ भला है या मन मैला है, गीत मैं गाता जाऊँ।
सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ...

जब प्रीत नगरियां चला मैं अपने, मीत मिले छूटे सब सपने।
हुआ देर पर हुआ सबेरा, बसने लगा फिर अपना बसेरा।।

चलने लगा जब तू है मेरे, लगे प्रीत के होड़ है तेरे।
लक्ष्य साधने आया हूँ, लक्ष्य साधने आया हूँ।

सुनो कहानी रीत पुरानी, गीत सुनाने आया हूँ।
अपने प्रीत का अपने मीत का गीत सुनाने आया हूँ।।
👉 साहिल कुमार उपाध्याय

👉अजबे नू कमाई बा अपनो जिनीगिया में👈ए जी सुनीना, अजबे नू कमाई बा अपनो जिनीगिया में,करम के लेख देखीं, धरम के करम करी, केहू...
21/03/2026

👉अजबे नू कमाई बा अपनो जिनीगिया में👈
ए जी सुनीना, अजबे नू कमाई बा अपनो जिनीगिया में,
करम के लेख देखीं, धरम के करम करी, केहू खुश नईखे आजो ई दुनियां में।।

कहेला सभे, मन मारी तबे, तहरे त कटअ ता जिनीगिया मजे-मजे।।

का कहीं ओकरा से, मन बा, त दोसरा के।
जिनीगिया कटेला, तनी मुनी सजे।।

आ कह देम ओकरा से, दरद बडूए हमरा त।
कह दीही जाके उ सूझ नाही बुझे।।

जिनीगिया के साहिल पर, मन मारे बईठ के।
दरदिया के नदियां में, सोझा उहो कूदे।।

केतनो समझाय लिह, मन के मनाय लिह।
अपनो से बचल रहीह, सुखवा से सटल रहीह।।
👉 साहिल कुमार उपाध्याय

20/03/2026

👉 समय का पहिया 👈
था आता नहीं चलना तो चलना सीखा दिया,
बीच मझधार में वो छोड़कर पलना सीखा दिया।
दर बदर मैं भटका पर संभल सा गया,
न जाने कौन से मुसीबत से मैं निकल गया।

था सिसक रहा था मैं और खिसक रहा था मैं,
अपनी मंजिल को पाने में हिचक रहा था मैं।
चंद पल ने मुझको ये एहसास करा दिया,कौन हो तुम ? किसके हो तुम ? ये सब बतला दिया।

तब जाकर एक रोज इस मंदबुद्धि को समझ आई,
इस धरा पर कोई न तेरा 'समय' ने समय पर बतलाई।
भूत और वर्तमान में धीरे - धीरे सबको बतलाया,
किसी को अपना पराया न समझो 'समय' ने मुझको है सिखलाया।
👉साहिल कुमार उपाध्याय

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Gopalganj
Gopalganj
841405

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