Adda Anant

Adda Anant खूबसूरत चीजों का एहसास रहे।

07/07/2026
27/06/2026

अजीब शख़्स है ……

01/06/2026

IPL RCB जीत रही है. ...

इससे एक शेर याद आया कि
सही जब सबकुछ चल रहा हो
बुरा वक्त जब ढल रहा हो
ठहर जा थोड़ा , सम्भल जा पगले
ये वक्त बदलने वाला है
जीवन इतना सरल नहीं है
कुछ गड़बड़ होने वाला है

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19/05/2026

बेकार होना, आदमी को खा जाता है Adda Anant यथार्थ अनंत आनंद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैंसो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैंफ़राज़
17/05/2026

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
फ़राज़

12/04/2026

सबकुछ अनंत है और हम पल भर के यात्री

मैं प्रेस में नहीं हूँ 😜
11/04/2026

मैं प्रेस में नहीं हूँ 😜

24/03/2026

कोई गरीब असहाय व्यक्ति अगर अपनी फ़रियाद लेकर थाना जाये तो उसको कुछ ही घंटे में एहसास होने लगता है कि गलती कर दिए थाना आकर । ऐसा तो सिस्टम बना हुआ । पूरी व्यवस्था डर पे टिका हुआ है ।

बदलते मौसमों ने जहाँ एक ओर लोगों को तपती गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं शहरों का मिज़ाज भी कुछ खुशनुमा सा हो गया है। ठं...
20/03/2026

बदलते मौसमों ने जहाँ एक ओर लोगों को तपती गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं शहरों का मिज़ाज भी कुछ खुशनुमा सा हो गया है। ठंडी हवाएँ, बादलों की हल्की छांव और बारिश की फुहारें शहरी जीवन में एक सुकून भर देती हैं। लोग इस मौसम का आनंद लेते हैं, चाय की चुस्कियों के साथ बारिश को निहारते हैं और इसे प्रकृति का उपहार मानते हैं।

लेकिन यही मौसम किसानों के लिए अक्सर चिंता और बेचैनी लेकर आता है। उनके लिए बरसात केवल पानी की बूंदें नहीं होतीं, बल्कि हर एक बूंद उनके महीनों के कठिन परिश्रम और संजोई हुई उम्मीदों पर प्रहार जैसी होती है। इस समय चैता की फसल—जैसे चना, मसूर, खेसारी और सरसों—लगभग पककर तैयार हो चुकी होती है और किसान उसे घर लाने की तैयारी में होते हैं। यही वह समय होता है जब उनकी मेहनत रंग लाने वाली होती है, जब उनके सपने साकार होने के करीब होते हैं।

परंतु अचानक होने वाली बारिश इन सारी उम्मीदों पर पानी फेर देती है। खेतों में खड़ी फसल भीगकर खराब हो जाती है, दाने झड़ने लगते हैं और कई बार पूरी उपज बर्बाद हो जाती है। एक किसान के लिए यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और हौसले पर भी गहरी चोट होती है।

फिर भी, किसान अपने धैर्य और विश्वास के सहारे आगे बढ़ता है। वह जानता है कि प्रकृति के आगे किसी का बस नहीं चलता। इसलिए वह मन को समझाकर यही कहता है—जो होना है, वह तो होकर ही रहेगा—और फिर से नई उम्मीदों के साथ अगली फसल की तैयारी में जुट जाता है।

पतझड़ का प्रभाव संपूर्ण प्रकृति पर पड़ता है, और मानव तो प्रकृति की अनोखी रचना है। 💚💚
18/03/2026

पतझड़ का प्रभाव संपूर्ण प्रकृति पर पड़ता है, और मानव तो प्रकृति की अनोखी रचना है। 💚💚

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