07/09/2026
#किस्सागोई-5.39: राजकुमारी संगीता द्वारा अनाम योद्धा की #पहचान
#सुनो_कहानी
अब तक आपने पढ़ा कि देवराज इन्द्र से वरदान में मिले अमरफल को सेठ मथुरामल ने #मारवाड़ नरेश को दे दिया। मारवाड़ नरेश ने भी समस्त प्रजा के #कल्याण के लिए उस अमरफल को अपने शाही उद्यान में बो दिया। बार बार चोरी होने वाले उस अमरफल को राजकुमार विजय ने अपनी चतुराई से बचा लिया। अमरफल की सुरक्षा से प्रसन्न महाराज ने छोटे राजकुमार को राज्य का #युवराज बनाने का निर्णय ले लिया। दोनों बड़े राजकुमार अपमानित होकर राज्य छोड़कर चले तो राजकुमार #विजय भी उनके साथ चला गया। तीनों राजकुमार मिथिला नरेश रुद्रसिंह के राज्य में पहुंचकर बूढ़ी भटियारिन की सराय में ठहर गये। मिथिला की राजकुमारी के स्वयंवर की कठिन #चुनौती को पूर्ण करने की कोशिश में दो वीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हो गये। छोटे राजकुमार विजय ने अमरदेव की सहायता से रंगभूमि में बैठी राजकुमारी संगीता को तीन बार सफलतापूर्वक #बांसुरी स्पर्श करवाकर स्वयंवर की शर्त पूरी कर दी। मगर स्वयंवर की शर्त पूरी करने वाला यह योद्धा दो दिन तक सामूहिक भोज के बाद भी सार्वजनिक रूप से सामने आने से बचता रहा।अब आगे पढ़िये....
सारी जानकारी मिलने के बाद राजकर्मचारी राजकुमार विजय के भाइयों को रंगमैदान में ढूंढने लगे। राजकुमार संजय और अजय को साथ लेकर चारों सैनिक एक बार फिर बूढ़ी भटियारिन की सराय में पहुंचे और एक बार फिर राजकुमार विजय को भोज के लिए चलने के लिए कहा। राजकुमार विजय ने अपने भाइयों की अनुमति की बात की तो दोनों बड़े भाइयों ने राजकुमार विजय से कहा, "विजय, हमने तो तुम्हें सुबह ही अपने साथ चलने के लिए कहा था मगर तुमने ही सराय से बाहर जाने से मना कर दिया था। चलो, अब तो तुम्हारे ऊपर सराय से बाहर जाने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है। फिर देखो, ये #मिथिला राज्य के चार सैनिक भी तुम्हें लेने आए हैं।"
विजय ने कहा, "भैय्या, मैं तो अब इस सराय से बाहर जाना ही नहीं चाहता। पता नहीं, ये लोग मेरे पीछे क्यों पड़े हैं। न मुझे कहीं जाना और न ही मुझे कुछ खाना है। आप इनसे कह दो कि रंगमैदान में आने वाले अन्य नागरिकों पर ध्यान दें, मुझे ले जाने की जिद छोड़ दें। मैं कहीं नहीं जाऊंगा।"
राजकुमार संजय ने सैनिकों से कहा, "देख लिया आपने? बहुत जिद्दी है हमारा छोटा भाई। जो तय कर लिया सो कर लिया। आप इसे यहीं छोड़ दो और वापस लौट जाओ, यह कहीं नहीं जाना चाहता।"
सैनिकों ने उन्हें साफ साफ बता दिया कि महाराज की आज्ञा है कि कोई भी नगर निवासी या #प्रवासी रंगमैदान में आने से रह न जाए। वह कितना भी बीमार, कमजोर या बूढ़ा हो, स्त्री, पुरुष या फिर बच्चा ही क्यों न हो, सबको रंगमैदान में आना ही होगा और राजकुमारी संगीता के सामने से गुजरना ही होगा। यदि कोई अपनी मनमर्जी से नहीं आता तो हमें जबरदस्ती उसे उठाकर ले जाना पड़ेगा।
इस पर छोटे राजकुमार विजय ने कहा, "अगर ऐसी बात है और मुझे रंगमैदान में जाना ही पड़ेगा तो मैं ऐसे नहीं जाऊंगा। मेरे लिए #शाही सवारी लाओ, मैं उसमें बैठ कर ही रंगमैदान में जाऊंगा। महाराज मुझे रंगमैदान में देखना चाहते हैं तो खुद सवारी भेजें। नहीं तो, मैं नहीं जाता कहीं भी। चाहे जितनी जबरदस्ती कर लो।"
विजय के दोनों बड़े भाई घबरा गये। विजय ने यह क्या कह दिया? यदि महाराज रुद्रसिंह नाराज हो गए तो हम सबको सजा भी मिल सकती है। वे चुपचाप उन चारों सैनिकों की ओर देखने लगे। पता नहीं अब ये चारों विजय के साथ क्या करेंगे?
महाराज रुद्रसिंह के सैनिक भी पशोपेश में पड़ गए। प्रवासी रंगमैदान जाने से मना नहीं कर रहा था, बस उसे रंगमैदान जाने के लिए शाही सवारी चाहिए। ऐसे में वे उसके साथ जबरदस्ती भी नहीं कर सकते थे। उन्होंने तुरन्त अपने अधिकारियों को सूचित किया और अधिकारियों ने मिथिला नरेश को इसके बारे में बताया। सारी बातें सुनकर #महाराज रुद्रसिंह क्रोधित होने की बजाय जोर जोर से हंसने लगे। उन्होंने महामंत्री से शाही सवारी सजाकर उस प्रवासी को रंगमैदान में ले जाकर राजकुमारी संगीता के सामने से गुजारने के लिए कहा। स्पष्ट #आदेश थे कि प्रवासी के साथ पूरे आदर का व्यवहार किया जाये और उसे बेहतरीन भोजन करवाया जाये। क्या पता, यह प्रवासी ही वह योद्धा हो जिसकी हमें अनेक दिनों से तलाश है?
शाही सवारी बूढ़ी भटियारिन की सराय में पहुंची तो विजय के दोनों भाई हैरान रह गए। वे दोनों तो रंगमैदान में अजनबियों की तरह अपने घोड़ों पर गये थे और भीड़भाड़ में चुपचाप भोजन करके राजकुमारी संगीता के सामने से निकल आये। मगर यह विजय तो पूरे शाही सम्मान के साथ रंगमैदान में जायेगा और अपनी पसन्द के शाही #पकवान खायेगा। न चाहते हुए भी दोनों भाइयों को विजय से #जलन सी होने लगी।
विजय अपने सामान्य कपड़ों में ही शाही सवारी में बैठ गया। शाही सवारी चल पड़ी तो दोनों बड़े राजकुमार भी उसकी सवारी के साथ अपने घोड़ों पर चले। अब वे देखना चाहते थे कि राजकुमार विजय के साथ राजकर्मचारी और सैनिक कैसा व्यवहार करते हैं?
रंगमैदान में भोज के लिए आये हुए लोगों ने दो घुड़सवारों के साथ एक शाही सवारी को रंगमैदान आते देखा तो उन्होंने समझा कि महाराज रुद्रसिंह स्वयं रंगमैदान में आ गए हैं। सारे राजकर्मचारी और सैनिक सतर्क होकर शाही सवारी की प्रतीक्षा करने लगे।
सवारी पास में आई तो सभी चौंक गए। सवारी में तो बिल्कुल साधारण कपड़ों में एक #नौजवान बैठा था। सैनिक पूरे सम्मान के साथ उस नौजवान को लेकर रंगमैदान में पहले से सजी हुई एक सुन्दर मेज के पास पहुंचे। वहां शाही कुर्सी पर बिठाकर उस नौजवान को उसकी पसन्द पूछ पूछकर भरपेट भोजन करवाया गया।
रंगमैदान में सभी लोग खुसुर पुसुर कर रहे थे। सब अपने अपने अनुमान लगा रहे थे कि आखिर यह नौजवान है कौन, जिसे इतने आदर सम्मान के साथ रंगमैदान में लाकर शाही भोजन करवाया गया है। कुछ लोग कह रहे थे कि महाराज ने उस #अनाम योद्धा को पहचान लिया है और यह नौजवान वही है जिसने तीन बार राजकुमारी संगीता को बांसुरी से स्पर्श करवाकर स्वयंवर की शर्त पूरी की है। जबकि कुछ लोगों को इस बात में सन्देह था कि यह साधारण सा नौजवान मिथिला नरेश का #दामाद बन सकता है।
फिर एक मीठा पान खिलाकर उस नौजवान को पूरे सम्मान के साथ राजकुमारी संगीता के पास ले जाया गया। वह नौजवान वहां जाने से झिझक रहा था मगर राजकर्मचारियों के बार बार कहने पर उसे राजकुमारी संगीता के सामने जाना ही पड़ा।
राजकुमारी संगीता अपने सामने से हजारों लोगों को गुजरते हुए देख रही थी। यह क्रम उसके साथ पिछले तीन दिनों से दोहराया जा रहा था और अब तो उसे #निराशा सी भी होने लगी थी। बड़ी अनिच्छा से वह हर आगन्तुक को देखती और अपना मुंह फेर लेती। राजकुमारी संगीता झरोखे में इस प्रकार बैठी थी कि वह आने वाले हर व्यक्ति को देख सकती थी मगर उन्हें कोई नहीं देख सकता था।
जिस समय राजकुमार विजय को राजकुमारी संगीता के सामने लाया गया, वह वहां बैठे बैठे ऊब गई थी और उसे इस सबसे #उचाट सी होने लगी थी। इसलिये पहले तो उसने विजय को ढंग से देखा नहीं, मगर जब उसने विजय को कुछ लंगड़ाकर धीरे धीरे चलते देखा तो यह नौजवान कुछ पहचाना सा लगा। अब उसने उसे ध्यान से देखा और पहचान गई कि यही वह योद्धा है जिसने उसे तीन बार बाँसुरी से स्पर्श करवाकर यह असम्भव सा स्वयंवर जीत लिया था। अपनी पहचान को पुख्ता करने के लिए उसने अपनी एक सहेली के कानों में कुछ कहा। वह लड़की झरोखे से उतरकर विजय के सामने आई और उसने उसके बायें पैर का जूता निकालने को कहा।
पहले तो राजकुमार विजय ने जूता निकालने में आनाकानी की, मगर फिर उसने जूता उतारते हुए उस लड़की से हँसकर पूछ ही लिया, "राजकुमारी जी को बाँसुरी से अधिक #चोट तो नहीं लगी?" नौजवान की बात, उसकी हँसी और बायें पैर के अंगूठे में लगी चोट ने #निर्णय कर दिया और राजकुमारी के संकेत से सैनिकों ने उसे घेर लिया। राजकुमारी धीरे धीरे विजय के पास आई और उसके गले में #वरमाला डालकर उसके चरण छू लिये।
यह देखकर विजय के दोनों बड़े भाई, बूढ़ी भटियारिन और विजय को सराय से लाने वाले सभी सैनिक #हैरान रह गए। ऐसा कैसे हो सकता है??
©चन्द्र-लक्ष्मी
🌷 क्या मिथिला नरेश राजकुमारी संगीता का शुभ #विवाह राजकुमार विजय के साथ करने के लिए तैयार हो गये?? आखिर दोनों बड़े राजकुमारों का #अर्धनग्न अवस्था में निष्कासन का #रहस्य क्या था???
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