31/07/2025
*अजीब खेल है परमात्मा का,*
*लिखता भी वही है*
*मिटाता भी वही है।*
*भटकाता है राह तो,*
*दिखाता भी वही है।*
*उलझाता भी वही है,*
*सुलझाता भी वही है।*
*जिंदगी की मुश्किल घड़ी में*
*दिखता तो नहीं, मगर*
*साथ निभाता भी वही है..!!*
*🌹🙏 !!🙏🌹*