10/10/2026
यह फिल्म 90 के दशक की एक ऐसी कालजयी रचना है जो समाज में फैले भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और जनता की लाचारी पर करारा प्रहार करती है। नाना पाटेकर ने एक बेपरवाह लेकिन अंदर से आग से भरे इंसान का किरदार निभाकर अपने अभिनय का लोहा मनवाया है।
अदालत का वो आखरी सीन और इंसानियत को लेकर बोला गया उनका तीखा डायलॉग आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। डिंपल कपाड़िया का पत्रकार के रूप में सशक्त साथ और फिल्म की कड़क पटकथा इसे बेहद खास बनाती है। अगर आप दमदार संवाद, देशभक्ति की सच्ची भावना और बेबाक सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म हर दौर में देखी जाने वाली एक मास्टरपीस है।
#नानापटेकर