Swadesh India Book Of Records

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 #स्वदेश_भारत_गौरव_सम्मान 2026- 27 हेतु स्वदेश भारत स्मारिका (Swadesh India Book of Records) में अपनी आत्मकथा, उपलब्धियो...
27/08/2026

#स्वदेश_भारत_गौरव_सम्मान 2026- 27 हेतु स्वदेश भारत स्मारिका (Swadesh India Book of Records) में अपनी आत्मकथा, उपलब्धियों की सूची, रिज्यूम या बायो डाटा, सामाजिक गतिविधियों या कलात्मक ज्ञानवर्धक लेख ( Arts & Motivational Article) शोध पत्र, रचना, काव्य, पेटिंग आदि प्रकाशित करा कर स्वदेश भारत गौरव सम्मान के साथ पुरस्कृत हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करके Swadesh India Book Of Records के फेसबुक पेज को लाइक फॉलो करके देखें। Please follow like this page for more information and benefits
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स्वदेश भारत स्मारिका ( Swadesh India Book of records ) 2026-27 में प्रकाशन एवं सम्मानित होने वाले चयनित कलाकारों व लेखकों की सूची*

*स्वदेश भारत गौरव सम्मान हेतु चयनित कलाकृति के कलाकार*
1 - 5821 - DR. HEMANTKUMAR S. PANDYA
Senior artist - AHMEDABAD, GUJARAT , INDIA 🇮🇳
2 - 5822 - ARTI CHOUDHARY - MADHUBANI ARTIST
DARBHANGA, BIHAR
3 - 5823 - DR. ZAHEDA KHANAM
MULTI-TALENTED ARTIST & DESIGNER
DIRECTOR OF KHANAM ART GALLERY
PRAYAGRAJ, UTTAR PRADESH
4 - REG. NO. 5824 - A. K. AZAD
SENIOR ARTIST, POET, KALA SHIROMANI,
KALA RATAN, OASIS WORLD RECORD HOLDER.
GHAZIABAD, UTTAR PRADESH
5 -

*स्वदेश भारत गौरव सम्मान हेतु चयनित विशिष्ट प्रतिभाएं, कला समीक्षक / लेखक / कवि*
1 - 5801 - JASPREET MOHAN SINGH
( RETD. PRINCIPAL / ARTIST)
LUDHIANA, PUNJAB
2 - 5802 - VIDYASAGAR - PRASADARAO JAMI
SENIOR HINDI PANDIT, LITTERATEUR & EDITOR
MANCHERIAL, TELANGANA, INDIA
3 - 5803 - Dr. Ramakrishna Rao Muthyala
(Author, researcher, legendary scientist )
Melbourne, Victoria, Australia
4 - 5804 - DR. RAJNISH KUMAR - RESEARCHER
& AUTHOR - GODDA, JHARKHAND
5 - 5805 - ANJALI KUMARI - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
6 - 5806 - SANTOSH KUMAR - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
7 - 5807 - ANKITA KUMARI - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
8 - 5808 - DR. DATTATRAY D. DESAI
LECTURER - COLLEGE OF EDUCATION,
DAKSHIN BHARAT HINDI PRACHAR SABHA,
ANDHRA TELANGANA
9 - 5809 - RAM ABHISEK MISHRA
TEACHER & POET
RAJ-SUNAKHALA, NAYAGHARH, ODISHA
10 - 5810 - KALESHWAR SAHU
ASSISTANT TEACHER
BILASPUR CHHATTISGARH
11 - 5811 - ANCHAL SINGH - AUTHOR
VARANASI, UTTAR PRADESH
12 - 5812 - DR. VIBHA KUMARI
ASSISTANT PROFESSOR, AUTHOR,
NUMISMATIST
GODDA COLLEGE, GODDA, JHARKHAND
13 - 5813 - DR. PRITI SRIVASTAVA
MADHUBANI PAINTER, AUTHOR, POET, FOLK
SINGER, BLOGGER, SOCIAL ACTIVIST,FASHION
DESIGNER - LUCKNOW, UTTAR PRADESH
14 - 5814 - DR HARDIKKUMAR D. MEHTA
WORLD RECORD HOLDER, PROFESSOR & HEAD
TRANSWAD M.ED COLLEGE TRANSWAD,
GUJARAT
15 - 5815 - MR.SUNIL MARUTI BHOIR - TEACHER
ABHYANKAR KULKARNI COLLEGE RATNAGIRI,
RATNAGIRI. MAHARASHTRA
16 - 5816 - MADHUKAR GYANOBA KAMBLE
ALLIAS MADHU BAWALKAR
POET, WRITER & SOCIAL WORKER
ADILABAD, TELANGANA
17 - 5817 - DR. MOPIDEVI RAJYALAXMI
SA HINDI, WRITER & POETESS
WARANGAL, TELANGANA
18 - 5818 - V. N. V. PADMAVATHI
WRITER & POETESS
HYDERABAD, TELANGANA
19 - REG. NO. 5820 - JYOTI H. SHARMA
ARTIST & ARTS TEACHER
AHMEDABAD, GUJARAT
20 - REG. NO. 5821 - VANDANA SHAH
ASSISTANT TEACHER
K.S.R. INTER COLLEGE, KAMPIL,
FARRUKHABAD, UTTAR PRADESH
21 - REG. NO. 5822 - DR. KUMKUM SRIVASTAVA
ASSISTANT PROFESSOR -AMITY LAW SCHOOL
AMITY UNIVERSITY UTTAR PRADESH LUCKNOW
22 - REG. NO. 5823 - SH.SURENDER SINGH
JBT SCHOOL INCHARGE
GOVT PRIMARY SCHOOL GHAROTI UC
BARUNA EDUCATION, NALAGARH, SOLAN,
HIMACHAL PRADESH
23 - REG. NO. 5824 - NAGNATH SHRIPATI DOLARE
AUTHOR, POET - RAIGAD, MAHARASHTRA
24 - REG. NO. 5825 - RAM SURAT TIWARI
"GUNJAN AVADHVASI" - POET & FOLK SINGER
AYODHYA, UTTAR PRADESH
25 - REG. NO. 5826 SHASHI - (TGT ART & CRAFT)
SHRMODHAY AWASIYA VIDHYALA
GWALIOR, MADHYA PRADESH
26 - REG. NO. 5827 - DAYARAM SAROLIYA
KABIR LOK GAYAK REDIO & T.V.
DEWAS, MADHYA PRADESH
27 -

Invite all types of artists, writers, Social worker. Please send your photo, Name, address with your best Fine Arts Work Painting, Croft, Sculpture photo, title, medium, size, Arts Motivational Articles, Resume with Achievements, Bio data or Poem on whatsapp 8874478080. Last date - 30.08.2026.
All participants will get an Swadesh India Glories Award certificate, lifetime membership, Momento / Trophy or Gold Medal and Publish your Autobiography, Photo, Name & address with your Article, poem or Arts Work in Swadesh India Book of Records 2026-27.

*स्वदेश भारत स्मारिका में प्रकाशन हेतु आप अपने एनजीओ, ट्रस्ट, फाउंडेशन या संस्थान का नाम, पता, संक्षिप्त मुख्य उद्देश्य, मोबाइल नंबर आदि व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजें। जिसे जनहित में प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कलाकार अपनी कलाकृतियों, लेख, शोध पत्र आदि कला व संस्कृति से सम्बन्धित प्रकाशित करा सकते हैं।
भारत सरकार नीति आयोग द्वारा रजिस्टर्ड स्वदेश संस्थान द्वारा स्वदेश भारत स्मारिका ( स्वदेश इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ) 2026- 27 का सातवां वार्षिक अंक का प्रकाशन होने जा रहा है जिसका ISBN ( INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER ) भी प्राप्त हो गया है। इस पत्रिका का वितरण देश - विदेश में भी होता है। इस अंक में प्रकाशन या सक्रिय सदस्यता हेतु लेखक व कलाकार पुस्तक का सहयोग राशि के साथ कला व संस्कृति से सम्बंधित अपना लेख, शोध, कविताएं, जीवन परिचय उपलब्धियां, कलाकृतियों की फ़ोटो, कला संस्थाओं विज्ञापन आदि एवं मुख्य आवरण पेज के लिए स्वदेश भारत विषय पर आधारित पेन्टिंग, अपनी फोटो व पूर्ण विवरण के साथ व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजें। कलाकृतियों एवं रचनाओं को प्रकाशित कराने वाले सभी प्रतिभागियों को सम्मान समारोह में स्वदेश भारत स्मारिका तथा स्वदेश भारत गौरव सम्मान, मोमेंटो ट्राफी, अंगवस्त्र, आजीवन सदस्यता आदि के साथ सम्मानित किया जाएगा या डाक द्वारा भी भेजा जाएगा।

🎁 सम्मान के साथ आपको मिलेगा:
✅ Lifetime membership certificate
✅ award ID Card – आपके नाम से मान्यता प्राप्त
✅ Social Media Recognition Post
✅ Mentorship व मार्गदर्शन
✅ Legal व Motivation Support (Lifetime)
✅ Public Image और Branding में सहयोग
✅ Lifetime Free Membership with Swadesh India book of Records

🎯 प्रतिभागियों को मिल सकता है-*
1- स्वदेश भारत गौरव सम्मान 2026
2- स्वदेश संस्थान, भारत का आजीवन सदस्यता प्रमाण पत्र
3- मोमेंटो ट्राफी, अंगवस्त्र पट्टिका, स्वदेश भारत स्मारिका आदि
4- राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका *स्वदेश भारत स्मारिका* में आपकी रचना लेख आत्मकथा उपलब्धियों के साथ फोटो, नाम, पता आदि का प्रकाशन एवं विश्व स्तर पर वितरण
5- कलाकार के रूप राष्ट्रीय पहचान
6- सरकारी या गैरसरकारी योजनाओं का लाभ
7- कलाकारों का सहयोग व सम्पर्क
8- उचित मार्गदर्शन एवं कैरियर
9- कला कौशल व नाइस पर्सनालिटी का अवसर
10- आपके कार्यों का मूल्य एवं मूल्यांकन
11- साहित्यकारों व कलाकारों का एक राष्ट्रीय मंच
12- मीडिया में एक अलग पहचान
13- लीडरशिप का अवसर
14- रोजगार / जॉब की संभावना
15- अनेक समस्याओं का समाधान आदि
और भी बहुत कुछ............

*रजिस्ट्रेशन / सदस्यता / सहयोग अनुदान राशि जमा करने हेतु फोन पे 8874478080 या *Bank details*
Name - SWHDES INSTITUTE
A/C NO. 4181000100091854
BANK - PUNJAB NATIONAL BANK
BRANCH- NAVEEN MANDI FAIZABAD
IFSC CODE- PUNB0418100

*सहयोग /आजीवन सदस्यता*
रचना, लेख, आत्मकथा, उपलब्धियों की सूची सहित रिज्यूम या बायो डाटा, शोध आदि प्रति पेज
कलर पेटिंग या कलाकृति की फोटो
संस्था विज्ञापन

नोट - कृपया कुछ भी भेजने से पहले एक बार व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजकर सूचित अवश्य करें ।

शीर्षक
आज के संदर्भ में समाज को दिशा प्रदान करते है कबीर के दोहे

आज के युग में भक्ति आस्था धर्म का स्वरूप मानव की सोच के साथ बदलता जा रहा है हमने भले ही ईश्वर की प्रार्थना को प्रत्येक धर्म के साथ उसके अनुसार बांट दिया
है परंतु उसके पीछे छुपी हुई भावना को हम नहीं बदल सकते वह भावना और आस्था इतनी प्रबल है कि युगों युगों तक अपनी निव कायम रखने का मादा रखती है हमारे देश में अनाचार अत्याचार या स्वार्थ परता चरम सीमा पर पहुंची है लोगों की सहनशीलता में कमी आई है मनुष्य को परिस्थितियों से उबारने के लिए किसी न किसी पथ प्रदर्शक का आगमन होता रहा है जिसने देश को समाज को आम नागरिक को एक नई दिशा बतलाई है जिसका अनुसरण करते हुए लोग सच्चाई की राह पर बढे और उसे पथ प्रदर्शक समाज सुधारक या देवता के रूप में मान्यता मिली इसी श्रेणी में राम कृष्ण गौतम ईसा मसीह मोहम्मद पैगंबर तथा संतों की श्रेणी में तुलसीदास गुरु नानक देव के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं इसी कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण नाम संत कबीर का आता है मध्यकाल में यदि कोई निर्भय फक्कड़ बैखोब व दार्शनिक कवि हुए थे तो वह हैं संत कबीर कबीर के कुछ दोहो को संज्ञान में लिया जाए तो उनके परम महत्व के दर्शन किए जा सकते हैं कबीर कहते हैं ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोय औरन को शीतल करें आपो ही शीतल होय संत कबीर के इस दोहे के भावार्थ के अनुसार जिस दिन समाज और देश में मीठे बोलने वालों का बाहुल्य हो जाएगा और इस प्रकार की सोच विकसित हो जाएगी उसी दिन समाज का स्वरूप दूसरों के लिए आदर्श होगा प्रेम रस की ऐसी बयार बहेगी की लोग जाति धर्म भाषा हो भूलकर एक ऐसे स्नेहिल वातावरण में जीवन जीने के आदी हो जाएंगे जो सबके लिए आदर्श होगा आज हमें कबीर की आवश्यकता है जो समाज को जातियों के कुचक्र और चाटुकार्यता को छोड़कर सच कहने की क्षमता रखते हैं निजी स्वार्थ की तिलांजलि देकर समाज को नई दिसा दिखा सके और उनकी वाणी में स्पष्ट वादीता है करनी कसनी में समानता है तथा जीवन का लक्ष्य व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति न होकर सर्वजनि हिताय के लिए तथा आज कबीर की आवस्यकता सबसे अधिक है कबीर की वाणी व्यक्ति के ज्ञान चक्षुओं को खोलकर पुनः उसको देखने लायक बना सकती हैं आवश्यकता इस बात की है हम उनकी वाणी को अपने कर्मों और आचरण में उतार कर उसका अनुसरण करें तो हमें जीवन में सही मार्ग मिल जाएगा कबीर कहते हैं कागा काको धन हरे कोयल काको दे मीठे शब्द सुनाई के जग अपना करीले कबीर की सखी के कहे हुए यह शब्द आज के संदर्भ में कितने उपयुक्त हैं यह हर आदमी समझ रहा है आज जब समाज में अपनापन प्रेम और मीठे शब्दों की बातें कम होती जा रही है और समाज में ईर्ष्या द्वेष और कटु शब्दों का बाहुल्य बढ़ रहा है तथा निश्चित रूप से इन शब्दों के महत्व का पता चलता है प्रेम में कितनी ताकत है यह कबीर ने बड़े सुंदर दृष्टांत से लोगों को समझाया है आज समाज में यह आवश्यक हो गया है कि एक दूसरे के प्रति भाईचारा बढ़ाने समाज में सुखद वातावरण बनाने के लिए जाति धर्म के आधार पर समाज को एक दूसरे से दूर करने से बचने के लिए हम ऐसे शब्दों से ऐसी सोच का इस्तेमाल करें जिससे भाईचारा बड़े स्नेह बड़े और धर्म जाति को भेदभाव दूर करके मानवता और अपनापन का बंधन सबसे अधिक मजबूत हो यह तभी संभव है जब हमारा हृदय निर्मल हो और हमारे उधर अंदर हृदय से निकले हुए हो और हृदय से हम दूसरों को मित्र या भाई यह स्नेही स्वीकार करते हुए उसके प्रति मीठे शब्द बोले वाणी में बहुत बड़ी शक्ति होती है हम वाणी की शक्ति के आगे बड़े-बड़े राष्ट्र भी झुके हैं हमारी चाहे जो भी हो भाषा हो लेकिन प्रेम की भाषा सब समझते हैं और जो शब्द प्रेम के होते हैं उनका बंधन बहुत मजबूत होता है वर्तमान परिपेक्ष में जब समाज में अशांति व अराजकता का माहौल उत्पन्न हो रहा है तो लोगों को चाहिए कि वह मुख दर्शक न बनकर कबीर के सिद्धांतों का पालन करें आज तो समझ में यह स्थिति है कि यदि लोगों को अच्छी शिक्षा देने की अच्छे कार्यों को करने की या कर सार्वजनिक सर्वजन हिताय की बात की जाती हैं तो लोग उस पर ध्यान ही नहीं देते हैं आज अच्छी बातें कहने वालों से लोग दूर रहना चाहते हैं पहले जैसे बुराइयों और दुष्कर्म से व्यक्ति दूर भागता था आज वह सत्कर्मों तथा अच्छे आचरण से भाग रहा है उसे लगता है की कहानी सत्य विचार अच्छे कार्य हमें इस भौतिकतावादी भोग से दूर न कर दे क्योंकि आज यही भौतिक सुख ही उसके जीवन का लक्ष्य बन चुका है इन परिस्थितियों में आज चरित्रवान और ज्ञानवान चुप बैठा हुआ है कबीर जी ने इस संदर्भ में कहा है ज्ञान रत्न की कोठारी चुप कर दीजिए ताल पारीख आगे खोलिए शीतल वचन रिशाल जब समाज में आज अच्छे कार्यों का मूल्यांकन ही नहीं है लोग उनकी बात सुनने और मानने को ही तैयार नहीं है तो निश्चित रूप से ज्ञानी अपने आप को चुप ही रखेंगे लेकिन समाज में आज उसे माहौल को बदलने की आवश्यकता है लेकिन यह परखी लोगों के द्वारा ही संभव है आज यह नितांत आवश्यक है की ज्ञानी लोग चुप ना बैठे और परखी भी आगे आकर इन ज्ञानियों के सहयोग से समाज में इस प्रकार का वातावरण दे जिससे समाज में नई जागृति आए लोगों में सचरित्र देश प्रेम की भावना पनपे तथा मनुष्य के विचार शरीर के ऊपर उठकर के इस तरह से पूरे विश्व में फेले की बुराइयों की जड़ उखड़ जाए सतगुरु कबीर साहब ने पक्षपात के संदर्भ में इस प्रकार से कहा है सब काहू का लीजिए सांचा शब्द निहार
पक्षपात न कीजिए कहे कबीर विचार सतगुरु कबीर साहब कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की सच्चाई वह ईमानदारी अच्छी तरह से रखने के बाद सोच विचार करके पक्षपातहीन सही निर्णय लिया जाना चाहिए सभी को सुनने के बाद यदि आपने निष्पक्ष रूप से निर्णय लिया है तो सबको स्वीकार होगा और कभी भी गलत नहीं हो सकता परंतु अफसोस की बात है कि आप आज ऐसा कुछ नहीं हो रहा है आज ऐसे व्यक्तियों की संख्या नगण्य होती जा रही हे ईस धारणा को लेकर चल रहे हैं इस धारणा को नहीं मानने के कारण ही उच्च सत्ता पर बैठे हुए लोगों के प्रति हमेशा जनता का सम्मान घटा है यदि कबीर के कहे हुए शब्दों का अनुसरण करते हुए लोग आचरण करने लगे तो स्वाभिमान स्वाभाविक ही समझ में एक नया परिवर्तन होगा जिससे सामाजिक और शांति और लोगों में शत्रुता की भावना समाप्त होगी तथा ऊंचे शिखर पर बैठे हुए व्यक्तियों के प्रति भी लोगों में सम्मान बढ़ेगा कबीर की दूरदर्शिता कबीर कहते हैं मासी कागज छुओ नहीं कलम गई नहीं हाथ चारों ही युग की मातम मुख ही जाना ही बात कबीर साहब ने अपने छोटे से समाज को विकास के पद पर अग्रसर होने की एक नई रहा प्रदान की थी यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम है की मध्यकाल में लिखी गई उनकी रचनाएं कलयुग में भी अक्षरात चरित्राथ हो रही है आज समाज में जब चारों ओर से सत्य कहने में परहेज किया जाता है तथा यह जानते हुए भी कोई सचेत करने का प्रयास नहीं करता ऐसे क्षणों में कबीर की स्पष्ट वादी था सच्चाई के प्रति उनका आग्रह तथा बिना लाख लपेट के सच बात करने की उनकी दृष्टि सबसे महत्वपूर्ण है संत कबीर ने जो सच कहने की एक क्षमता थी वह यदि आज के समय के लोगों में आ जाए तो स्वार्थ लाॅलुप्त अराजकता गलत कार्यों को करने की मानसिकता में बहुत कुछ नियंत्रण हो सकता है कबीर संत कबीर मूर्ति पूजा के सख्त खिलाफ थे उन्होंने हिंदुओं के तीर्थ व्रत मठ मंदिर आदि की आलोचना की तो दूसरी ओर मुसलमान के रोजा नमाज और मस्जिद की भी खूब निंदा की माला फेरने वालों का पंडितों का पुजारी के विषय में उन्होंने कहा माला फेरत झुक गया गया ना मां का फेर कर का मन का दरी दे मां का मन का फेर यदि समाज में व्यक्ति अपने सेहत कर इस शरीर से हटकर सभी मनुष्य को एक दृष्टि से देखने लगे तो पता है कि सभी उसे ईश्वर के ही अंश हैं इस सकारात्मक नजरिए से संसार में सभी प्रकार के कासन का निवारण हो जाएगा और इस प्रकार भाईचारे की भावना विकसित होगी जिससे समाज में व्याप्त कठौता दूर होगी इसी कारण से कबीर मैं हमेशा मूर्ति पूजा या ईश्वरी आराधना को मनुष्य की इस संस्कृति का ढाकोल साल बताया और समाज पर निरंतर प्रहार किया आज जब समाज में मनुष्य जाति और वर्गों में बांटा हुआ है उसे अपने और अपनी जाति के अलावा किसी दूसरे के कल्याण के विषय में सोचना ही कठिन हो रहा है और जाति भेद दंगों को जन्म दे रहा है ऐसे विवाद जिन्हें हम शांति के मार्ग पर चलते हुए भी सुलझा सकते हैं एक छोटी सी चिंगारी से उग्र रूप धारण कर रहे हैं यह चिंगारी जातिवाद की ही है ऐसे में यदि हम कबीर की सीख अपनाते हैं तो समाज को एक नई दिशा देने में कामयाब हो सकते हैं जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान मोल करो तलवार का पड़ी रहने दो म्यान जातिगत आधारों पर लोगों ने जन सेवा के नाम से पार्टियां बनाई और समाज को छोटे-छोटे जातिगत टुकड़ों में बांट दिया जिससे आपस में वैमनस्य बड़ा कटुता बड़ी एक दूसरे से प्रति स्पर्धा बड़ी अपने को दूसरों से ज्यादा बड़ा और शक्तिशाली सिद्ध करने के लिए आपस में नीचा दिखाने की भावना बलवती हुई और इस प्रकार से समाज में एक नया वर्ग विकसित हुआ यदि समाज में ज्ञान बुद्धि विवेक और आचरण के आधार पर जातिगत भावनाओं से दूर रहकर लोगों का मूल्यांकन किया जाता है तो लोगों को सम्मान दिया जा सकता है आज समाज का एक दूसरा स्वरूप देखने को मिलता है उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से दोहों के संदेश के माध्यम से ईश्वर की महिमा धर्म से परे होकर बताइए कबीर जी कि ईश्वर पर श्रद्धा अलग-अलग धर्म से परे होकर सभी धर्म का समन्वय थी उन्होंने ना तो पूर्ण रूप से हिंदुत्व का अनुसरण किया ना ही मुस्लिम संप्रदाय का उन्होंने हमेशा सर्व धर्म समभाव को बढ़ावा दिया संत कबीर कहते हैं ना मंदिर में नाम मस्जिद में ना काशी प्रयाग में ना में क्रिया कर्म में रहता ना योग सन्यास में मुझको कहां ढूंढे बंदे मैं तो तेरे पास में आज उच्च शिखर पर बैठे हुए व्यक्ति अव्यवस्था भ्रष्टाचार व्यक्तिगत स्वार्थ की प्रतिमूर्ति बन चुके हैं और समाज में उनके प्रति किसी भी मात्रा में श्रद्धा या संभव या सम्मान नहीं रह गया है ऐसी परिस्थितियों में सबसे अधिक याद कबीर जी की आती है क्योंकि जो उन्होंने आज से करीब 650 वर्ष पूर्व कहा था वह सब कुछ आज चरित्राथ हो रहा है कबीर साहब के जीवन चरित्र के बारे में तथ्यो की बाते बहुत कम ज्ञान है यहां तक की उनकेे जन्म ओर मरण के संबंधों के विषय में भी अब तक कोई निश्चित बात ज्ञात नहीं हुई है किवदंती के अनुसार कबीर रामानंद जी के आशीर्वाद के फल स्वरुप किसी विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे लोक लाज के कारण वह इन्हें लहरतारा नमक तालाब के किनारे छोड़ गई वहां से नीमा और नीरू नमक जुलाहा दंपति इन्हें ले आए जिनके द्वारा ईनका पालन पोषण हुआ मध्यकाल के अधिकांश कवि शिक्षित रहे परंतु कबीर इसका अपवाद थे कबीर अशिक्षित होते हुए भी एक अद्भुत विद्धवान थे उनकी साखियां सारगर्भित हैं उनकी उलट वासिया तो लाजवाब रही है अपनी शिक्षा के बारे में वे स्वयं कहते हैं चारिहू युग माहात्म्य थते
कहीं के जनायो नाथ
मसी कागज छुयो नहीं कलम गहीं नहीं हाथ हमने कबीर द्वारा वर्णित जीवन के कई पक्षो की बात की है उनका ज्ञान आधार और असीम है जिसमें कुछ ही बिंदुओं पर हम अपने क्षमता अनुसार बात कर सकते हैं
मालवा के संदर्भ में बात करें तो कबीर जैसे संत के भाव उन छोटे-छोटे गांव तक पहुंचे हैं जहां के लोग सिर्फ कर्मकांड और पूजा पाठ को ही सब कुछ समझ रहे थे उनका अच्छा अध्यात्म लोगों के हृदय में उत्तरा सामाजिक तौर पर भी एक बदलाव की बयार संत कबीर के कारण आई हिंदी भाषा देश सहित अंग्रेजी बोलने वाले देशों में भी कबीर का प्रभाव हुआ उनकी बात में हर किसी को झकझोंर कर दिया सत्य की चोट से सपनों के महल टूटे हैं उनकी बात बहुत गहरी होने के साथ ही प्रभावकारी भी है यदि क्षेत्रीय बोलियां की बात करें तो हमारे मालवा ही नहीं बल्कि कई प्रदेशों की बालियां में कबीर आत्मसात हुए हैं वह गुजरात में भी सुने जाते हैं महाराष्ट्र में भी सुने जाते हैं राजस्थान में भी सुने जाते हैं तो छत्तीसगढ़ में भी सुने जाते हैं संत कबीर को गाने के मामले में मालवी में तो क्रांतिकारी कार्य हुआ है साथ ही छत्तीसगढ़ी राजस्थानी में भी कबीर को गाया गया है काशी नगर में भी उन्हें अपने तरीके से गाया और सुना जाता है सत्य एक है लेकिन कहीं-कहीं ढंग से प्रकट हुआ है उसकी चोट सर्वव्यापक है इस मामले में संत कबीर की अभिव्यक्ति अनूठी है वे बहुत शहज ढंग से लोगों के हृदय में उतर जाते हैं संत कबीर की खासियत है कि व्यक्ति उन्हें गातेगाते ही शांत होने लगता है उनकी वाणी शब्दों में उतरकर असर कारक होती जाती है वह रोम-रोम में बस जाते हैं जब उन्हें गांव चौपाल पर गाया जाता है तो छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उनका प्रभाव देखा गया है व्यक्ति जहां और जिस हाल में खड़ा है वहां जाकर कबीर उसे पुकारते हैं संत कबीर ने करुणावस भूले भटके लोगों को कड़े शब्दों में फटकारा भी है ताकि वे सत्य की ओर आए उन्होंने मनुष्य के प्रति मनुष्य के प्रेम को महत्व दिया हर जगह पर उन्हें उस एक का हवाला देकर मनुष्य को जोड़ने का प्रयास किया है सत्य का उद्घाटन करते हुए सामाजिक बदलाव का उद्घोष किया है साइ इतना दीजिए जा में कुटुम समाय
में भी भूखा ना रहूं साधु न भूखा जाए
मैं सीख देते हुए बाहरी सुविधा के लिए दुविधा में पड़े मनुष्य को चेताया है आम व्यक्ति की कठिनाइयों की बात की है मनुष्य जहां खड़ा है वहां से रास्ते दिखाए हैं उन्होंने बार-बार अपनी तरफ आने के लिए इशारा किया है गुरु के महत्व को बताया है जिसके लिए अपने गुरु के माध्यम से कहा है
भक्ति द्रविड़ उपजी लाए रामानंद
प्रगट करी कबीर ने चार जुग नव खंड
कबीर के प्रभाव की बात करें तो गांव-गांव में जो लोग संत कबीर को सुनते हैं वह सात्विकता की और बड़े हैं लोगों ने अपने वृत्तियों से छुटकारा पाया है यह कबीर का रंग चढ़ने के कारण संभव हुआ कुछ समूह में बड़ा बदलाव महसूस किया गया कुछ लोग बाहर के आडंबरों में जकड़े हुए थे तो कुछ गलत खान-पान के शिकार थे कबीर को सुनकर उन लोगों ने सात्विक जीवन की ओर रुख किया है उन्होंने अंतर की बात करते हुए बाहरी बुराइयों पर भी चोट करते हुए लोगों को जागृत किया है जैसा कि कबीर ने पंचतत्व से बने इस शरीर को तंबूरे की उपमा देकर समझाया की खास बात यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग भी उनकी गहरी बातों को समझ पाते हैं कारण है प्रतीक बहुत सरल और हमारे आसपास के हैं जो सीधा असर करते हैं उन्होंने अंतर ज्ञान रूपी लालिमा को आम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सार्थक और प्रायोगिक स्तर के प्रयासों पर ध्यान दिया है
संत कबीर ने जन्म से लेकर मृत्यु तक के रहस्य को अपने शब्दों में
पिरोया है और मालवी भजनों में भी उनकी लगभग सारी आधारभूत बाजे आई हैं मृत्यु की ओर इशारा करते हुए उन्होंने मनुष्य को चेताया है और कहा की जो जीते जी मर जाता है वह भवसागर तर जाता है उन्होंने आत्मा को शिव की उपमा देकर कहा है कि शव होने के बाद यह शरीर किसी काम का नहीं है साधना का महत्व बताते हुए आंतरिक अनुभूति पर जोर दिया है इसके कारण लोगों का झुकाव साधना जगत की ओर बढ़ा है कबीर जो भी कहते हैं डंके की चोट कहते हैं वह उनके अंतर की भाषा है जिसमें पूरी धृडता है जो संदेह से रहित हैं सत्य कहने के लिए जो दृढ़ता होना चाहिए वह संत कबीर की भाषा में है उनकी आवाज में है वह अपने माध्यम से बातों को समझाते हैं और कहते हैं कि
जामरने से जग डरे मेरे मन आनंद
कब मरी हूं कब पाई हूं पूर्ण परमानंद यह बात चोट करती हैं जगती है इस माध्यम से उन्होंने कह दिया है कि जिस व्यक्ति ने मृत्यु को समझ लिया उसने अध्यात्म को समझ लिया वर्तमान में बहुत अच्छी बात यह है कि संत कबीर की वाणी के प्रचार प्रसार में सरकार मदद कर रही हैं कलाकारों को भी प्रोत्साहित किया जा रह है कालिदास अकादमी उज्जैन टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव भोपाल में संत कबीर के वाणी को गाने वाले कलाकारों को प्रोत्साहित किया गया है संत कबीर को सरलता के साथ जन-जन तक पहुंचाने वाला हर प्रयास सार्थक है वंदनीय है
दयाराम सारोलिया कबीर लोक गायक आकाशवाणी एवं दुरदर्शन मध्यप्रदेश

 #स्वदेश_भारत_गौरव_सम्मान 2026- 27 हेतु स्वदेश भारत स्मारिका (Swadesh India Book of Records) में अपनी आत्मकथा, उपलब्धियो...
26/08/2026

#स्वदेश_भारत_गौरव_सम्मान 2026- 27 हेतु स्वदेश भारत स्मारिका (Swadesh India Book of Records) में अपनी आत्मकथा, उपलब्धियों की सूची, रिज्यूम या बायो डाटा, सामाजिक गतिविधियों या कलात्मक ज्ञानवर्धक लेख ( Arts & Motivational Article) शोध पत्र, रचना, काव्य, पेटिंग आदि प्रकाशित करा कर स्वदेश भारत गौरव सम्मान के साथ पुरस्कृत हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करके Swadesh India Book Of Records के फेसबुक पेज को लाइक फॉलो करके देखें। Please follow like this page for more information and benefits
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स्वदेश भारत स्मारिका ( Swadesh India Book of records ) 2026-27 में प्रकाशन एवं सम्मानित होने वाले चयनित कलाकारों व लेखकों की सूची*

*स्वदेश भारत गौरव सम्मान हेतु चयनित कलाकृति के कलाकार*
1 - 5821 - DR. HEMANTKUMAR S. PANDYA
Senior artist - AHMEDABAD, GUJARAT , INDIA 🇮🇳
2 - 5822 - ARTI CHOUDHARY - MADHUBANI ARTIST
DARBHANGA, BIHAR
3 - 5823 - DR. ZAHEDA KHANAM
MULTI-TALENTED ARTIST & DESIGNER
DIRECTOR OF KHANAM ART GALLERY
PRAYAGRAJ, UTTAR PRADESH
4 - REG. NO. 5824 - A. K. AZAD
SENIOR ARTIST, POET, KALA SHIROMANI,
KALA RATAN, OASIS WORLD RECORD HOLDER.
GHAZIABAD, UTTAR PRADESH
5 -

*स्वदेश भारत गौरव सम्मान हेतु चयनित विशिष्ट प्रतिभाएं, कला समीक्षक / लेखक / कवि*
1 - 5801 - JASPREET MOHAN SINGH
( RETD. PRINCIPAL / ARTIST)
LUDHIANA, PUNJAB
2 - 5802 - VIDYASAGAR - PRASADARAO JAMI
SENIOR HINDI PANDIT, LITTERATEUR & EDITOR
MANCHERIAL, TELANGANA, INDIA
3 - 5803 - Dr. Ramakrishna Rao Muthyala
(Author, researcher, legendary scientist )
Melbourne, Victoria, Australia
4 - 5804 - DR. RAJNISH KUMAR - RESEARCHER
& AUTHOR - GODDA, JHARKHAND
5 - 5805 - ANJALI KUMARI - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
6 - 5806 - SANTOSH KUMAR - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
7 - 5807 - ANKITA KUMARI - RESEARCHER
& AUTHOR - BHAGALPUR, BIHAR
8 - 5808 - DR. DATTATRAY D. DESAI
LECTURER - COLLEGE OF EDUCATION,
DAKSHIN BHARAT HINDI PRACHAR SABHA,
ANDHRA TELANGANA
9 - 5809 - RAM ABHISEK MISHRA
TEACHER & POET
RAJ-SUNAKHALA, NAYAGHARH, ODISHA
10 - 5810 - KALESHWAR SAHU
ASSISTANT TEACHER
BILASPUR CHHATTISGARH
11 - 5811 - ANCHAL SINGH - AUTHOR
VARANASI, UTTAR PRADESH
12 - 5812 - DR. VIBHA KUMARI
ASSISTANT PROFESSOR, AUTHOR,
NUMISMATIST
GODDA COLLEGE, GODDA, JHARKHAND
13 - 5813 - DR. PRITI SRIVASTAVA
MADHUBANI PAINTER, AUTHOR, POET, FOLK
SINGER, BLOGGER, SOCIAL ACTIVIST,FASHION
DESIGNER - LUCKNOW, UTTAR PRADESH
14 - 5814 - DR HARDIKKUMAR D. MEHTA
WORLD RECORD HOLDER, PROFESSOR & HEAD
TRANSWAD M.ED COLLEGE TRANSWAD,
GUJARAT
15 - 5815 - MR.SUNIL MARUTI BHOIR - TEACHER
ABHYANKAR KULKARNI COLLEGE RATNAGIRI,
RATNAGIRI. MAHARASHTRA
16 - 5816 - MADHUKAR GYANOBA KAMBLE
ALLIAS MADHU BAWALKAR
POET, WRITER & SOCIAL WORKER
ADILABAD, TELANGANA
17 - 5817 - DR. MOPIDEVI RAJYALAXMI
SA HINDI, WRITER & POETESS
WARANGAL, TELANGANA
18 - 5818 - V. N. V. PADMAVATHI
WRITER & POETESS
HYDERABAD, TELANGANA
19 - REG. NO. 5820 - JYOTI H. SHARMA
ARTIST & ARTS TEACHER
AHMEDABAD, GUJARAT
20 - REG. NO. 5821 - VANDANA SHAH
ASSISTANT TEACHER
K.S.R. INTER COLLEGE, KAMPIL,
FARRUKHABAD, UTTAR PRADESH
21 - REG. NO. 5822 - DR. KUMKUM SRIVASTAVA
ASSISTANT PROFESSOR -AMITY LAW SCHOOL
AMITY UNIVERSITY UTTAR PRADESH LUCKNOW
22 - REG. NO. 5823 - SH.SURENDER SINGH
JBT SCHOOL INCHARGE
GOVT PRIMARY SCHOOL GHAROTI UC
BARUNA EDUCATION, NALAGARH, SOLAN,
HIMACHAL PRADESH
23 - REG. NO. 5824 - NAGNATH SHRIPATI DOLARE
AUTHOR, POET - RAIGAD, MAHARASHTRA
24 - REG. NO. 5825 - RAM SURAT TIWARI
"GUNJAN AVADHVASI" - POET & FOLK SINGER
AYODHYA, UTTAR PRADESH
25 - REG. NO. 5826 SHASHI - (TGT ART & CRAFT)
SHRMODHAY AWASIYA VIDHYALA
GWALIOR, MADHYA PRADESH
26 -

Invite all types of artists, writers, Social worker. Please send your photo, Name, address with your best Fine Arts Work Painting, Croft, Sculpture photo, title, medium, size, Arts Motivational Articles, Resume with Achievements, Bio data or Poem on whatsapp 8874478080. Last date - 30.08.2026.
All participants will get an Swadesh India Glories Award certificate, lifetime membership, Momento / Trophy or Gold Medal and Publish your Autobiography, Photo, Name & address with your Article, poem or Arts Work in Swadesh India Book of Records 2026-27.

*स्वदेश भारत स्मारिका में प्रकाशन हेतु आप अपने एनजीओ, ट्रस्ट, फाउंडेशन या संस्थान का नाम, पता, संक्षिप्त मुख्य उद्देश्य, मोबाइल नंबर आदि व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजें। जिसे जनहित में प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कलाकार अपनी कलाकृतियों, लेख, शोध पत्र आदि कला व संस्कृति से सम्बन्धित प्रकाशित करा सकते हैं।
भारत सरकार नीति आयोग द्वारा रजिस्टर्ड स्वदेश संस्थान द्वारा स्वदेश भारत स्मारिका ( स्वदेश इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ) 2026- 27 का सातवां वार्षिक अंक का प्रकाशन होने जा रहा है जिसका ISBN ( INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER ) भी प्राप्त हो गया है। इस पत्रिका का वितरण देश - विदेश में भी होता है। इस अंक में प्रकाशन या सक्रिय सदस्यता हेतु लेखक व कलाकार पुस्तक का सहयोग राशि के साथ कला व संस्कृति से सम्बंधित अपना लेख, शोध, कविताएं, जीवन परिचय उपलब्धियां, कलाकृतियों की फ़ोटो, कला संस्थाओं विज्ञापन आदि एवं मुख्य आवरण पेज के लिए स्वदेश भारत विषय पर आधारित पेन्टिंग, अपनी फोटो व पूर्ण विवरण के साथ व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजें। कलाकृतियों एवं रचनाओं को प्रकाशित कराने वाले सभी प्रतिभागियों को सम्मान समारोह में स्वदेश भारत स्मारिका तथा स्वदेश भारत गौरव सम्मान, मोमेंटो ट्राफी, अंगवस्त्र, आजीवन सदस्यता आदि के साथ सम्मानित किया जाएगा या डाक द्वारा भी भेजा जाएगा।

🎁 सम्मान के साथ आपको मिलेगा:
✅ Lifetime membership certificate
✅ award ID Card – आपके नाम से मान्यता प्राप्त
✅ Social Media Recognition Post
✅ Mentorship व मार्गदर्शन
✅ Legal व Motivation Support (Lifetime)
✅ Public Image और Branding में सहयोग
✅ Lifetime Free Membership with Swadesh India book of Records

🎯 प्रतिभागियों को मिल सकता है-*
1- स्वदेश भारत गौरव सम्मान 2026
2- स्वदेश संस्थान, भारत का आजीवन सदस्यता प्रमाण पत्र
3- मोमेंटो ट्राफी, अंगवस्त्र पट्टिका, स्वदेश भारत स्मारिका आदि
4- राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका *स्वदेश भारत स्मारिका* में आपकी रचना लेख आत्मकथा उपलब्धियों के साथ फोटो, नाम, पता आदि का प्रकाशन एवं विश्व स्तर पर वितरण
5- कलाकार के रूप राष्ट्रीय पहचान
6- सरकारी या गैरसरकारी योजनाओं का लाभ
7- कलाकारों का सहयोग व सम्पर्क
8- उचित मार्गदर्शन एवं कैरियर
9- कला कौशल व नाइस पर्सनालिटी का अवसर
10- आपके कार्यों का मूल्य एवं मूल्यांकन
11- साहित्यकारों व कलाकारों का एक राष्ट्रीय मंच
12- मीडिया में एक अलग पहचान
13- लीडरशिप का अवसर
14- रोजगार / जॉब की संभावना
15- अनेक समस्याओं का समाधान आदि
और भी बहुत कुछ............

*रजिस्ट्रेशन / सदस्यता / सहयोग अनुदान राशि जमा करने हेतु फोन पे 8874478080 या *Bank details*
Name - SWHDES INSTITUTE
A/C NO. 4181000100091854
BANK - PUNJAB NATIONAL BANK
BRANCH- NAVEEN MANDI FAIZABAD
IFSC CODE- PUNB0418100

*सहयोग /आजीवन सदस्यता*
रचना, लेख, आत्मकथा, उपलब्धियों की सूची सहित रिज्यूम या बायो डाटा, शोध आदि प्रति पेज
कलर पेटिंग या कलाकृति की फोटो
संस्था विज्ञापन

नोट - कृपया कुछ भी भेजने से पहले एक बार व्हाट्सएप 8874478080 पर भेजकर सूचित अवश्य करें ।

इस लेख के साथ दो पेंटिंग फोटो भी लगनी है
शोधार्थी शशि
टीजीटी ( श्रमोदय आवासीय विद्यालय ग्वालियर)
निर्देशिका डॉ अरुण- (विभागाध्यक्ष ) चित्रकला विभाग शासकीय मांनकुंवर बाई कला एवं वाणिज्य स्वशासीय महिला महाविद्यालय नेपियर टाउन जबलपुर (मध्य प्रदेश)

*भारतीय चित्रकला एवं संस्कृति में नाथद्वारा की पिछवाई कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने के लिए चित्रकार कपिल शर्मा का योगदान एवं सम्पूर्ण परिचय*

कपिल शर्मा नाथद्वारा की प्रसिद्ध पारंपरिक पिछवाई चित्रकला से जुड़े प्रतिभाशाली चित्रकार एवं कलाकार हैं। वे ऐसे कलात्मक परिवार से आते हैं, जिसकी कई पीढ़ियाँ नाथद्वारा की चित्रकला एवं पिछवाई कला परंपरा को आगे बढ़ाती रही हैं। उनके पिता, दादा तथा पूर्वज भी इसी कला से जुड़े रहे हैं। पारिवारिक वातावरण के कारण उन्हें बचपन से ही चित्रकला एवं पिछवाई कला को देखने, समझने और सीखने का अवसर मिला।

कपिल शर्मा की आयु 35 वर्ष है। लगभग 4 से 5 वर्ष की आयु में ही उनमें चित्रकला के प्रति रुचि विकसित हुई और उन्होंने पिछवाई चित्रकला का अभ्यास प्रारंभ कर दिया। लगभग 31 वर्षों के अनुभव, निरंतर अभ्यास और पारिवारिक संस्कारों ने उनकी कला को मजबूत आधार दिया है।

उन्होंने फाइन आर्ट्स विषय का अध्ययन किया तथा रेखांकन, रंग संयोजन, चित्रांकन और पारंपरिक तकनीकों का ज्ञान प्राप्त किया। उनकी कला में नाथद्वारा की परंपरा, सूक्ष्म रेखांकन, रंगों की सुंदरता और धार्मिक विषयों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

पिछवाई चित्रकला — सिद्धांत, दर्शन एवं विशेषताएँ

पिछवाई चित्रकला भारत की समृद्ध, प्राचीन और पारंपरिक चित्रकला शैलियों में से एक है। इसका प्रमुख केंद्र राजस्थान का नाथद्वारा है और यह भगवान कृष्ण के स्वरूप श्रीनाथजी की भक्ति से गहराई से जुड़ी हुई है।

‘पिछवाई’ शब्द ‘पिछ’ अर्थात पीछे और ‘वाई’ अर्थात लटकना से बना माना जाता है। इसका आशय उस कलाकृति से है जो मंदिर में श्रीनाथजी के स्वरूप के पीछे लगाई जाती है।
1. *मुख्य विषय और दर्शन*
पिछवाई कला का केंद्र श्रीनाथजी और भगवान कृष्ण की लीलाएँ हैं। यह केवल सजावटी चित्रकला नहीं, बल्कि पुष्टिमार्ग की सेवा-पद्धति से जुड़ी धार्मिक एवं सांस्कृतिक कला परंपरा है।

*श्रीनाथजी का स्वरूप:*
चित्रों में सामान्यतः श्रीनाथजी को बाल कृष्ण के रूप में गोवर्धन पर्वत धारण किए हुए दर्शाया जाता है। उनका बायाँ हाथ ऊपर उठा हुआ तथा दाहिना हाथ आशीर्वाद की मुद्रा अथवा कमर के समीप दर्शाया जाता है।
*त्योहार और ऋतुएँ:*
अवसर एवं ऋतु के अनुसार पिछवाई के विषय बदलते हैं। शरद पूर्णिमा में रासलीला, अन्नकूट में छप्पन भोग, कमल पिछवाई में कमलों से सुसज्जित दृश्य तथा गोपाष्टमी में गायों और कृष्ण के प्रेम से जुड़े दृश्य प्रमुख हैं।
1. तकनीकी और निर्माण सिद्धांत
*कपड़ा*: पारंपरिक पिछवाई सूती या खादी के कपड़े पर बनाई जाती है। कपड़े को मांड/स्टार्च आदि से तैयार करके चित्रांकन के लिए उपयुक्त बनाया जाता है।
*प्राकृतिक एवं खनिज रंग:* पारंपरिक पद्धति में खड़िया, काजल/कोयला, नील, मिट्टी तथा अन्य प्राकृतिक एवं खनिज स्रोतों से प्राप्त रंगों का उपयोग किया जाता है। सोने और चाँदी के वर्क या पाउडर का प्रयोग सजावटी भागों में किया जा सकता है।
*तूलिका*: सूक्ष्म रेखांकन और बारीक अलंकरण के लिए अत्यंत महीन तूलिकाओं का उपयोग किया जाता है। चित्र के आकार और बारीकियों के अनुसार अलग-अलग तूलिकाओं का प्रयोग किया जाता है।

*1. संरचनात्मक सिद्धांत*
पिछवाई की संरचना में केंद्रीय धार्मिक विषय को प्रमुखता दी जाती है। श्रीनाथजी के स्वरूप के अनुरूप पृष्ठभूमि, पुष्प, कमल, वृक्ष, गायें, गोप-गोपियाँ तथा उत्सव-संबंधी दृश्यों का संतुलित संयोजन किया जाता है। चित्र की रचना में सममिति, सूक्ष्म रेखांकन, रंग-संतुलन और सजावटी विस्तार का विशेष महत्व रहता है।
*पिछवाई चित्रकला में कपिल शर्मा का योगदान*
कपिल शर्मा पारंपरिक पत्थर एवं खनिज रंगों की तकनीक को अपनाकर पिछवाई कला को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। वे पारंपरिक कला को उसकी मूल पहचान के साथ आगे बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक दृष्टिकोण और नए प्रयोगों से भी जोड़ते हैं।

उनकी कला में पारंपरिक नाथद्वारा शैली, धार्मिक आस्था, सूक्ष्म रेखांकन, प्राकृतिक रंगों की सुंदरता और आधुनिक कलात्मक दृष्टिकोण का समन्वय दिखाई देता है।

*श्रीनाथजी के प्रति समर्पण एवं पारिवारिक परंपरा*
पिछवाई कला नाथद्वारा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कपिल शर्मा का कला-कर्म भी श्रीनाथजी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से जुड़ा हुआ है।
उनके परिवार की अनेक पीढ़ियाँ इसी कला से जुड़ी रही हैं। पारंपरिक कला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हुए कपिल शर्मा और उनका परिवार भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
*सम्मान, पुरस्कार एवं सहभागिताएँ*
*मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय — कला संबंधी सहभागिता/उपलब्धि।*
*राजस्थान ललित कला अकादमी — पुरस्कार।*
*नाथद्वारा मंदिर मंडल — पुरस्कार।*
*Whistling Woods International College — सहभागिता पुरस्कार।*

*कपिल शर्मा का परिवार*
पिताजी — महेश चंद्र शर्मा, माता — सुनीता शर्मा
पत्नी — माधुरी शर्मा, बेटी — निर्वी शर्मा
भाई — गौरंग शर्मा,ईश्वर जी शर्मा
आरती शर्मा
बहन — कृति शर्मा
बड़े पापा — चरण शर्मा
बड़ी मम्मी — निमिषा शर्मा
भाई — प्रतीक शर्मा (मुंबई)
कज़िन बहन — योगिता शर्मा
दादाजी — मोती लाल शर्मा
*भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत में योगदान*
कपिल शर्मा न केवल एक कुशल एवं अनुभवी चित्रकार हैं, बल्कि नाथद्वारा की समृद्ध पिछवाई कला परंपरा को सीखने, सहेजने और आगे बढ़ाने वाले कलाकार के रूप में भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनके कार्य में पारिवारिक संस्कार, लगभग 31 वर्षों का अनुभव, कला-शिक्षा, निरंतर अभ्यास, श्रीनाथजी के प्रति समर्पण तथा आधुनिक प्रयोगों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
पारंपरिक कला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हुए कपिल शर्मा और उनके परिवार का योगदान भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण है।

*संदर्भित ग्रंथ सूची-*
Nathdwara pichwais -the painting of lord Krishna - ANU JULKA

The pichvai painting tradition of Rajasthan -Desmond Peter Lazaro
भारतीय चित्रकला- वाचस्पति गैरोल
भारतीय चित्रकला का इतिहास - डॉक्टर रीता प्रताप

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